मनोरंजन | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 31 जुलाई 2026
राघव जुयाल और संजय कपूर अभिनीत कॉमेडी फिल्म ‘भाई तेरा स्टार है’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म से दर्शकों को एक हल्की-फुल्की मनोरंजक कॉमेडी की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आती। निर्देशक विवेक बी. अग्रवाल ने फिल्म को हास्य और मनोरंजन से भरपूर बनाने की कोशिश की है, मगर कमजोर पटकथा, बिखरे हुए घटनाक्रम और स्पष्ट दिशा के अभाव में फिल्म अपना प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है। करीब दो घंटे की यह फिल्म कई जगह दर्शकों को उलझाती है और अंत तक यह तय नहीं कर पाती कि वह आखिर कहना क्या चाहती है।
कहानी
फिल्म की कहानी अजय (राघव जुयाल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर एक बार मालिक फैटी (संजय कपूर) का बड़ा कर्ज़ है। फैटी उसे चेतावनी देता है कि रात खत्म होने से पहले पूरा पैसा लौटाना होगा। अजय के साथ फैटी का कर्मचारी जेडी (विकल्प मेहता) भी रहता है। दूसरी ओर, सिड (विवान भाटेना) अपनी पूर्व प्रेमिकाओं से उधार दिए गए पैसे वापस लेने की कोशिश में लगा है। उसके साथ लैला (बरखा सिंह) भी इस सफर का हिस्सा बनती है।
इन दोनों समानांतर कहानियों के बीच कई छोटे-बड़े किरदार आते-जाते रहते हैं। निर्देशक ने अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर हास्य पैदा करने का प्रयास किया है, लेकिन अधिकांश दृश्य एक-दूसरे से कटे हुए महसूस होते हैं। कहानी में ऐसा कोई मजबूत मोड़ नहीं आता जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रख सके। फिल्म का पहला भाग उम्मीद जगाता है कि आगे कोई रोचक मोड़ आएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता।
पटकथा और निर्देशन
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी पटकथा है। शुरुआत से लेकर अंत तक कहानी बिना किसी स्पष्ट दिशा के आगे बढ़ती रहती है। कई दृश्य केवल इसलिए जोड़े गए प्रतीत होते हैं ताकि दर्शकों को हंसाया जा सके, लेकिन अधिकांश हास्य प्रभाव छोड़ने में विफल रहता है।
निर्देशक विवेक बी. अग्रवाल ने एक अलग तरह की कॉमिक फिल्म बनाने की कोशिश की है, लेकिन हास्य और कहानी के बीच संतुलन स्थापित नहीं कर पाए। कई दृश्य इतने अचानक आते हैं कि वे कहानी से जुड़े हुए नहीं लगते। चरम दृश्य (क्लाइमेक्स) में भी शोर और अफरा-तफरी अधिक दिखाई देती है, जबकि भावनात्मक या हास्यपूर्ण प्रभाव बहुत कम नजर आता है।
अभिनय
राघव जुयाल ने हाल के वर्षों में ‘किल’ और अन्य फिल्मों में अपने अभिनय से प्रभावित किया था, लेकिन इस फिल्म में उनका प्रदर्शन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचता। कई जगह उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा ऊंचा और बनावटी महसूस होता है। हालांकि, उन्होंने अपने किरदार में ऊर्जा बनाए रखने की पूरी कोशिश की है।
संजय कपूर अपने परिचित अंदाज में नजर आते हैं। उनका अभिनय ठीक-ठाक है, लेकिन उन्हें ऐसा किरदार नहीं मिला जो उन्हें अलग पहचान दिला सके।
विकल्प मेहता फिल्म के सकारात्मक पक्षों में शामिल हैं। उन्होंने जेडी के किरदार को सहजता से निभाया है और जहां भी उन्हें अवसर मिला, उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। निकी वालिया भी सीमित स्क्रीन टाइम में प्रभाव छोड़ती हैं। निहारिका एनएम सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बावजूद फिल्म में बहुत कम दिखाई देती हैं और उनके हिस्से में अभिनय के लिए पर्याप्त अवसर नहीं आते।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत कहानी को विशेष मजबूती नहीं देता। कुछ गाने मनोरंजक हैं, लेकिन वे लंबे समय तक याद नहीं रहते। बैकग्राउंड स्कोर कई जगह जरूरत से ज्यादा तेज महसूस होता है। सिनेमैटोग्राफी सामान्य है और फिल्म के तकनीकी पक्ष में कोई बड़ी कमी नहीं दिखती, लेकिन कमजोर लेखन इन खूबियों को दबा देता है।
क्या फिल्म देखने लायक है?
यदि आप बिना किसी अपेक्षा के हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो फिल्म के दूसरे हिस्से में कुछ संवाद आपको मुस्कुराने का मौका दे सकते हैं। हालांकि, पूरी फिल्म में ऐसे पल बहुत कम हैं। कमजोर कहानी, बिखरी पटकथा और प्रभावहीन हास्य के कारण फिल्म दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखने में सफल नहीं होती।
निष्कर्ष
‘भाई तेरा स्टार है’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें अच्छे कलाकार होने के बावजूद मजबूत कहानी और प्रभावी लेखन की कमी साफ दिखाई देती है। निर्देशक ने अलग तरह की कॉमेडी पेश करने का प्रयास किया, लेकिन पटकथा की कमजोरी के कारण फिल्म अपनी पहचान नहीं बना पाती। यदि कहानी पर अधिक मेहनत की जाती और हास्य को स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत किया जाता, तो परिणाम कहीं बेहतर हो सकता था।
ABC NATIONAL NEWS रेटिंग: ⭐⭐☆☆☆ (2/5)
फिल्म: भाई तेरा स्टार है
निर्देशक: विवेक बी. अग्रवाल
कलाकार: राघव जुयाल, संजय कपूर, विकल्प मेहता, निहारिका एनएम, बरखा सिंह, विवान भाटेना
शैली: कॉमेडी-ड्रामा
निर्णय: अच्छी स्टारकास्ट के बावजूद कमजोर पटकथा और बिखरी कॉमेडी के कारण यह फिल्म अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती।




