राष्ट्रीय | कर्नाटक | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 2 जुलाई 2026
बेंगलुरु स्थित देश की प्रमुख आईटी कंपनी कैपजेमिनी के कार्यालय परिसर में संचालित डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित शारीरिक दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। यह मामला केवल एक क्रेच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कॉरपोरेट कार्यालयों में संचालित डे-केयर सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस ने इस मामले में ‘लिटिल बड्स डे-केयर’ के पांच कर्मचारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है।
जानकारी के अनुसार, कथित घटना बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड स्थित कैपजेमिनी कार्यालय परिसर में संचालित लिटिल बड्स डे-केयर में हुई। यह क्रेच विशेष रूप से कंपनी के कर्मचारियों के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए बनाया गया है। आरोप है कि यहां बच्चों के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया गया। शिकायत मिलने के बाद एचएएल थाना पुलिस ने 29 जून को क्रेच कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।
अब पुलिस ने पांच कर्मचारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित दुर्व्यवहार किन परिस्थितियों में हुआ, इसमें कितने लोग शामिल थे और क्या यह कोई एक अलग घटना थी या लंबे समय से बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा था। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर, बच्चों की देखभाल से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी बारीकी से जांच कर रही है।
इस घटना ने उन हजारों कामकाजी माता-पिताओं की चिंता भी बढ़ा दी है, जो अपने छोटे बच्चों को दिनभर ऐसे डे-केयर सेंटरों के भरोसे छोड़कर कार्यालय जाते हैं। महानगरों में कॉरपोरेट क्रेच अब कामकाजी परिवारों की एक बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं। ऐसे में यदि किसी डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित मारपीट या क्रूर व्यवहार की शिकायत सामने आती है, तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरे डे-केयर सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या डे-केयर सेंटर में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा था। कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, उनका प्रशिक्षण, बच्चों की निगरानी की व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, शिकायत निवारण प्रणाली और प्रबंधन की निगरानी—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के साथ-साथ प्रबंधन के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
बाल अधिकार और बाल सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों की देखभाल केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती। ऐसे संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों का व्यवहार, उनका मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित निगरानी और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होती है। छोटे बच्चे अक्सर अपने साथ हुई घटनाओं को स्पष्ट रूप से बता नहीं पाते, इसलिए उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी संस्थान और उसके कर्मचारियों पर होती है।
फिलहाल कैपजेमिनी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि कार्यस्थलों पर संचालित डे-केयर सेंटर केवल कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधा नहीं, बल्कि एक अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारी भी हैं। माता-पिता अपने सबसे अनमोल भरोसे—अपने बच्चों—को इन संस्थानों के हवाले करते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के विश्वास पर सीधा आघात है।
अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है। आने वाले दिनों में जांच यह स्पष्ट करेगी कि कथित दुर्व्यवहार के आरोप कितने सही हैं, इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।




