राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 18 जुलाई 2026
डॉक्टरों से मारपीट के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को बड़ी राहत देने वाले निचली अदालत के जमानत आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें 19 जुलाई की शाम तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने शनिवार को विशेष सुनवाई के दौरान समाचार रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और मजिस्ट्रेट अदालत ने जमानत देते समय इसकी गंभीरता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड पर भी विचार नहीं किया, जबकि जमानत पर फैसला करते समय यह एक महत्वपूर्ण पहलू था। इसी आधार पर अदालत ने जमानत पर रोक लगाते हुए रमेश म्हात्रे को सरेंडर करने का आदेश दिया।
मामला 6 जुलाई का है, जब ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित एक नगर निगम अस्पताल में नवजात शिशु को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दिए जाने के बाद कथित तौर पर रमेश म्हात्रे और उनके सहयोगियों ने दो डॉक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट की थी।
घटना के बाद पुलिस ने रमेश म्हात्रे और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। बाद में निचली अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उस जमानत पर फिलहाल रोक लगा दी है।
अदालत के इस आदेश को डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के मामलों में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। मामले की आगे की सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रहेगी।




