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‘सरकार सोनम वांगचुक के धैर्य की परीक्षा न ले’, अन्ना हजारे ने केंद्र से बातचीत की अपील की

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 18 जुलाई 2026

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सोनम वांगचुक के समर्थन में केंद्र सरकार से बातचीत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार को वांगचुक के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए और उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए उनसे संवाद करना चाहिए।

शनिवार को जारी एक वीडियो संदेश में अन्ना हजारे ने कहा, “सरकार को उनके धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उनकी मांगें माननी हैं या नहीं, यह सरकार तय करे, लेकिन बातचीत करने में क्या दिक्कत है? उनसे चर्चा होनी चाहिए।”

हजारे का यह बयान ऐसे समय आया है जब शिक्षा सुधार और अन्य मांगों को लेकर सोनम वांगचुक का आंदोलन लगातार चर्चा में है। अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद भी उनके समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है और सरकार से बातचीत की मांग की है।

अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान संवाद के जरिए निकलता है। उनका कहना था कि सरकार को बातचीत से पीछे नहीं हटना चाहिए और आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार मांगें स्वीकार नहीं करना चाहती, तो भी स्पष्ट रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए।

सोनम वांगचुक के आंदोलन को हाल के दिनों में कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार से बातचीत की अपील की है। विभिन्न छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने भी वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किए हैं।

गौरतलब है कि 2011 में लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हजारे के नेतृत्व में चला भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन देशव्यापी जनआंदोलन बन गया था, जिसने तत्कालीन यूपीए सरकार पर भारी राजनीतिक दबाव बनाया था। उस आंदोलन के बाद संसद ने लोकपाल कानून पारित किया और अन्ना हजारे राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली जनआंदोलन नेताओं में गिने जाने लगे।

हालांकि, 2011 के आंदोलन के बाद अन्ना हजारे राष्ट्रीय स्तर के अधिकांश बड़े राजनीतिक और जन मुद्दों पर अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई दिए। ऐसे में सोनम वांगचुक के मुद्दे पर उनका यह बयान लंबे समय बाद किसी बड़े राष्ट्रीय विवाद पर आई उनकी प्रमुख सार्वजनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

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