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पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेन्नम्मा का निधन, दिल का दौरा पड़ने से ली अंतिम सांस

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 18 जुलाई 2026

पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेन्नम्मा देवेगौड़ा का शनिवार को बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं और पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। उनके निधन से कर्नाटक सहित देशभर के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, चेन्नम्मा को 16 जुलाई की रात सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और अन्य आयु संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी, लेकिन शनिवार को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें बचाया नहीं जा सका।

चेन्नम्मा देवेगौड़ा ने हमेशा सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के लंबे राजनीतिक सफर में वह हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। उन्हें बेहद सादगीपूर्ण जीवन, पारिवारिक मूल्यों और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने के बावजूद वह जनता दल (सेक्युलर) परिवार का एक मजबूत आधार मानी जाती थीं।

एच.डी. देवेगौड़ा भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसान परिवार से आने वाले देवेगौड़ा ने कर्नाटक की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने।

साल 1996 के आम चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। भारतीय जनता पार्टी की सरकार केवल 13 दिन ही चल सकी। इसके बाद कई क्षेत्रीय और गैर-भाजपा दलों ने मिलकर संयुक्त मोर्चा (यूनाइटेड फ्रंट) सरकार बनाई और एच.डी. देवेगौड़ा को सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री चुना गया। उन्होंने 1 जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।

हालांकि उनका कार्यकाल राजनीतिक चुनौतियों से भरा रहा। संयुक्त मोर्चा सरकार कांग्रेस के बाहरी समर्थन पर निर्भर थी। विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच तालमेल बनाए रखना आसान नहीं था। केंद्र में गठबंधन सरकार होने के कारण कई नीतिगत फैसलों पर सहमति बनाने में समय लगता था। अंततः कांग्रेस ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद इंद्र कुमार गुजराल देश के अगले प्रधानमंत्री बने।

प्रधानमंत्री के रूप में देवेगौड़ा ने ग्रामीण विकास, कृषि और संघीय ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने के कारण उन्हें अक्सर “किसानों के नेता” के रूप में भी याद किया जाता है। प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने सक्रिय राजनीति जारी रखी और लंबे समय तक जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख नेता बने रहे।

चेन्नम्मा देवेगौड़ा ने अपने पति के राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव के दौरान हमेशा परिवार को संभाले रखा। सार्वजनिक मंचों पर उनकी मौजूदगी कम ही दिखाई देती थी, लेकिन देवेगौड़ा परिवार के करीबी लोग उन्हें परिवार की सबसे बड़ी ताकत मानते थे। उनके निधन से परिवार को गहरा व्यक्तिगत आघात पहुंचा है।

चेन्नम्मा के निधन की खबर मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। कई नेताओं ने उन्हें एक सादगीपूर्ण, सौम्य और प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताते हुए एच.डी. देवेगौड़ा और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं।

परिवार के अनुसार, चेन्नम्मा देवेगौड़ा का अंतिम संस्कार पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कर्नाटक में किया जाएगा। उनके निधन के साथ ही भारतीय राजनीति के एक वरिष्ठ परिवार की ऐसी शख्सियत का अध्याय समाप्त हो गया, जिन्होंने स्वयं कभी सत्ता या प्रचार की इच्छा नहीं की, लेकिन अपने धैर्य, सादगी और पारिवारिक समर्पण से हमेशा सम्मान अर्जित किया।

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