राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026
संसद के मानसून सत्र से पहले प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि परिसीमन केवल कांग्रेस या INDIA गठबंधन का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे से जुड़ा अहम राष्ट्रीय विषय है।
अंग्रेजी अखबार “द हिंदू” को दिए एक साक्षात्कार में वेणुगोपाल ने कहा, “परिसीमन सिर्फ कांग्रेस या INDIA ब्लॉक का मुद्दा नहीं है। यह पूरे देश का मुद्दा है, क्योंकि इसका संबंध भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे से है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संविधान में संशोधन के जरिए ऐसा परिसीमन लागू करना चाहती है, जिससे संघीय ढांचा (फेडरलिज्म) और राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी ऐसे प्रयास का विरोध करेगी, जो संविधान के संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करता हो।
वेणुगोपाल ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को किसी भी तरह से दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो दक्षिण भारत और अन्य कुछ राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व घट सकता है, जिससे संघीय व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी और विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार से जवाब मांगेगी। उनका कहना था कि परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर सभी राज्यों और राजनीतिक दलों के साथ व्यापक सहमति बनाना आवश्यक है।
साक्षात्कार में वेणुगोपाल ने नीट सहित विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही अनियमितताओं से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ है और केंद्र सरकार को परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करना चाहिए।
उन्होंने ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को लेकर भी वाहन मालिकों की चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को इस विषय पर वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रहें।
केंद्र सरकार ने परिसीमन को लेकर अब तक कहा है कि इस विषय पर अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया और सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे को संसद के आगामी मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों में से एक बनाने की तैयारी कर रहा है।




