अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/ढाका | 6 अगस्त 2026
नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की कथित गतिविधियों को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। जॉय ने दावा किया कि बांग्लादेश में ISI को अब लगभग “खुली छूट” मिल गई है और मौजूदा हालात केवल बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि भारत और दुनिया के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि भारत के पश्चिम में पहले से पाकिस्तान है और अब उसके पूर्वी मोर्चे पर भी “एक और पाकिस्तान” जैसी स्थिति पैदा हो रही है। ये आरोप जॉय के हैं और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि आवश्यक है।
‘पाकिस्तान की ISI को बांग्लादेश में खुली छूट’—जॉय का सनसनीखेज दावा
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI का बांग्लादेश में प्रभाव तेजी से बढ़ा है। उनके मुताबिक अवामी लीग सरकार के दौरान गिरफ्तार और दोषी ठहराए गए सैकड़ों उग्रवादियों को मौजूदा व्यवस्था में जेलों से रिहा किया गया है। जॉय ने दावा किया कि हिज्ब-उत-तहरीर जैसे संगठन खुलेआम मार्च कर रहे हैं और अल-कायदा से जुड़े लोग सार्वजनिक रैलियों में भाषण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये दावे और परिस्थितियां सही हैं तो मामला सिर्फ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता बन जाता है।
‘पश्चिम में पाकिस्तान, पूर्व में भी एक और पाकिस्तान’—भारत को लेकर बड़ी चेतावनी
जॉय की सबसे तीखी टिप्पणी भारत की सुरक्षा को लेकर सामने आई। उन्होंने कहा कि भारत के पश्चिमी हिस्से में पाकिस्तान पहले से मौजूद है, लेकिन आज पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश की परिस्थितियां भी उसी तरह की सुरक्षा चुनौती पैदा कर रही हैं। उनके शब्दों में, “आपके पश्चिमी हिस्से में पाकिस्तान है और आज आपके पूर्वी मोर्चे पर एक और पाकिस्तान है।” जॉय ने दावा किया कि विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर ISI को बांग्लादेश में खुलकर काम करने का अवसर मिल रहा है। उनका यह बयान भारत के लिए इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है और दोनों देशों की सुरक्षा एक-दूसरे के घटनाक्रम से सीधे प्रभावित होती रही है।
‘अगले वैश्विक आतंकी बांग्लादेश से निकल सकते हैं’—जॉय की गंभीर चेतावनी
जॉय ने इससे भी आगे बढ़कर चेतावनी दी कि अगर मौजूदा परिस्थितियों को तत्काल नहीं रोका गया तो भविष्य में दुनिया के सामने उभरने वाली अगली बड़ी आतंकी चुनौती बांग्लादेश से आ सकती है। उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम “भारत और पूरी दुनिया के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।” हालांकि जॉय के इन आरोपों को स्थापित तथ्य के बजाय उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इतनी गंभीर चेतावनी की स्वतंत्र सुरक्षा और खुफिया आकलन से पुष्टि जरूरी होगी।
जेलों से ‘सैकड़ों आतंकियों’ की रिहाई का दावा, कट्टरपंथ को लेकर उठाए सवाल
जॉय के मुताबिक अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े जिन लोगों को गिरफ्तार कर अदालतों से सजा दिलाई गई थी, उनमें से सैकड़ों अब जेलों से बाहर हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में हिज्ब-उत-तहरीर और अल-कायदा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कट्टरपंथी तत्वों की सार्वजनिक मौजूदगी बढ़ी है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह भारत के लिए विशेष चिंता का विषय होगा, क्योंकि पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, सीमा पार नेटवर्क, अवैध आवाजाही और कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों को लेकर नई दिल्ली लंबे समय से सतर्क रही है।
भारतीय मीडिया से अपील—‘बांग्लादेश पर नजर बनाए रखिए’
सजीब वाजेद जॉय ने भारतीय मीडिया से भी बांग्लादेश की परिस्थितियों को लगातार दुनिया के सामने लाने की अपील की। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, उस पर भारतीय मीडिया की नजर बनी रहनी चाहिए। जॉय ने अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की अस्थिरता का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते आज जिस स्थिति में हैं, कुछ वर्ष पहले वैसे नहीं थे और वैश्विक संबंध बहुत तेजी से बदल सकते हैं। उनके इस बयान का संकेत साफ था—बांग्लादेश के घटनाक्रम को भारत केवल पड़ोसी देश का आंतरिक राजनीतिक संकट समझकर नजरअंदाज न करे।
दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना—‘जेल भेजें या मार दें, डर मेरा कर्तव्य तय नहीं करेगा’
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने करीब दो वर्षों के निर्वासन के बाद दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने की घोषणा कर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी। हालांकि उन्होंने वापसी की निश्चित तारीख नहीं बताई। हसीना ने कहा कि स्वदेश लौटने के बाद उन्हें जेल भेजा जा सकता है या उनकी जान तक जा सकती है, लेकिन डर यह तय नहीं कर सकता कि अपने देश और लोगों के प्रति उनका कर्तव्य क्या है। उन्होंने 1975 में अपने परिवार को खोने और छह वर्ष निर्वासन में बिताने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें अपने भविष्य से ज्यादा बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है।
‘सत्ता के लिए नहीं, बांग्लादेश को पटरी पर लाने के लिए लौटना चाहती हूं’
हसीना ने कहा कि उनकी प्रस्तावित वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं बल्कि देश को फिर से विकास, सुरक्षा, समृद्धि और शांति के रास्ते पर लाने के लिए है। उनके मुताबिक बांग्लादेश की जनता ऐसी अर्थव्यवस्था और व्यवस्था की हकदार है जो उसे अवसर और सुरक्षा दे। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने देश को संकट से गुजरते देखा है और आज का बांग्लादेश वह देश नहीं है जिसे बनाने के लिए 1971 में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। हसीना के इन बयानों से स्पष्ट है कि उनकी दिसंबर में प्रस्तावित वापसी केवल व्यक्तिगत स्वदेश वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में बड़े राजनीतिक पुनर्प्रवेश के रूप में देखी जाएगी।
2024 के छात्र आंदोलन पर हसीना का पलटवार—‘यह स्वतःस्फूर्त शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था’
शेख हसीना ने अगस्त 2024 में उनकी सरकार गिरने की वजह बने आंदोलन को लेकर भी अपना पुराना आरोप दोहराया। उन्होंने दावा किया कि जुलाई-अगस्त 2024 का आंदोलन न तो पूरी तरह शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन था और न ही स्वतःस्फूर्त विरोध। उनके मुताबिक छात्रों को सामने रखकर हिंसा और सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से एक सुनियोजित अभियान चलाया गया था। यह हसीना का राजनीतिक दावा है और 2024 के घटनाक्रम को लेकर बांग्लादेश में अलग-अलग पक्षों के बिल्कुल अलग आकलन रहे हैं।
भारत को बताया ‘महान मित्र’, मोदी सरकार का जताया आभार
शेख हसीना ने भारत को बांग्लादेश का “महान मित्र” बताया, वहीं जॉय ने पिछले करीब दो वर्षों से हसीना को भारत में आश्रय और सुरक्षा देने के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। जॉय ने कहा कि भारत में उनकी मां को पूरा सम्मान और सुरक्षा दी गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की प्रशंसा करते हुए दावा किया कि हसीना के साथ अत्यंत सम्मानजनक व्यवहार किया गया है। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं और अब उनकी प्रस्तावित वापसी भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगी।
भारत के लिए क्यों बेहद संवेदनशील है बांग्लादेश का बदलता सुरक्षा परिदृश्य?
बांग्लादेश में पाकिस्तान की ISI की कथित बढ़ती सक्रियता का प्रश्न भारत के लिए सामान्य विदेश नीति का विषय नहीं है। भारत की पूर्वी और पूर्वोत्तर सुरक्षा व्यवस्था बांग्लादेश के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। पिछले वर्षों में ढाका और नई दिल्ली के बीच सुरक्षा सहयोग ने सीमा पार उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में यदि बांग्लादेश की जमीन पर भारत-विरोधी या अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क को फिर से जगह मिलने के जॉय के आरोपों में तथ्य पाया जाता है, तो नई दिल्ली के सामने एक नई रणनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
हसीना की वापसी और ISI के आरोप—बांग्लादेश फिर दक्षिण एशियाई राजनीति के केंद्र में
एक तरफ शेख हसीना ने दिसंबर में स्वदेश लौटने का ऐलान कर दिया है, दूसरी तरफ उनके बेटे ने बांग्लादेश में ISI की कथित खुली गतिविधियों और आतंकवादी तत्वों की रिहाई का मुद्दा उठाकर इसे सीधे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया है। इससे आने वाले महीनों में बांग्लादेश का राजनीतिक संघर्ष केवल ढाका की सत्ता की लड़ाई नहीं रहेगा; भारत, पाकिस्तान और व्यापक दक्षिण एशियाई सुरक्षा समीकरण भी इसके केंद्र में आ सकते हैं।
जॉय के आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि और बांग्लादेश के मौजूदा प्रशासन तथा संबंधित पक्षों का जवाब उतना ही जरूरी है। यदि उनके दावों में तथ्य हैं तो भारत के लिए सवाल बड़ा है—क्या उसकी पूर्वी सीमा पर ऐसा सुरक्षा परिदृश्य उभर रहा है जिसकी कीमत आने वाले वर्षों में पूरे दक्षिण एशिया को चुकानी पड़ सकती है? और यदि आरोप गलत हैं, तो ढाका को भी तथ्यों के साथ उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज करना होगा। फिलहाल एक बात तय है—शेख हसीना की दिसंबर में घोषित वापसी और उनके बेटे की ISI संबंधी चेतावनी ने बांग्लादेश को एक बार फिर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।




