राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन ने मंगलवार को बेहद गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया। संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक INDIA bloc के मार्च के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, RSS प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने मिलकर देश की चुनावी व्यवस्था को प्रभावित किया और कथित “वोट चोरी” के जरिए लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में इन आरोपों के लिए जवाबदेही तय की जाएगी और ‘देशद्रोह’ के आरोप में कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया जब INDIA bloc के सैकड़ों सांसद संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्षी सांसद SIR यानी Special Intensive Revision और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने चुनाव आयोग की ओर बढ़ रहे सांसदों को बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचकर धरने पर बैठ गए।
आकाशवाणी भवन से राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी राजनीतिक टकराव के लिए नहीं, बल्कि चुनाव आयुक्तों से सवाल पूछने के लिए यहां आया है। राहुल गांधी के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी सांसद करोड़ों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उन्हें चुनाव आयोग से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर सवाल खड़े करता है।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयुक्तों से मिलकर उनसे कथित “वोट चोरी” के बारे में सवाल पूछना चाहता है। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग विपक्ष के सवालों का सामना करने से बच रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के करोड़ों नागरिकों ने विपक्षी दलों को अपना प्रतिनिधि चुना है तो उनके सांसदों को देश की सर्वोच्च चुनावी संस्था के सामने अपनी बात रखने से क्यों रोका जा रहा है।
इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, RSS प्रमुख मोहन भागवत और CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने कथित “वोट चोरी” के जरिए चुनावी व्यवस्था को प्रभावित किया और देश को “हाइजैक” किया। राहुल ने कहा कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होगी और कोई भी व्यक्ति कार्रवाई से बच नहीं सकेगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र की लड़ाई बताते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है।
हालांकि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ये आरोप राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। चुनाव आयोग और बीजेपी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी का बयान फिलहाल राजनीतिक संघर्ष के बीच सामने आया एक बेहद तीखा आरोप है, जिस पर संबंधित पक्षों की कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इस पूरे विवाद के केंद्र में SIR और मतदाता सूची का संशोधन है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है तथा इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्ष ने Form-6 में कथित बदलाव को लेकर भी चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए क्योंकि मतदाता सूची में नाम ही नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की पहली सीढ़ी है।
दूसरी ओर बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक प्रोपेगेंडा बताया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के प्रदर्शन को “ड्रामा” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने के बजाय जनता के बीच जाना चाहिए। बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और राजनीतिक दबाव बनाकर उसकी कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
राहुल गांधी के बयान के बाद अब राजनीतिक टकराव और गहरा होने के आसार हैं। एक तरफ विपक्ष “वोट चोरी” के आरोप को लगातार राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना रहा है, वहीं बीजेपी इसे चुनावी हार और राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है। चुनाव आयोग की ओर से भी कहा गया है कि उसे किसी राजनीतिक दल की ओर से बैठक के लिए कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ था। इस बयान ने विपक्ष की उस मांग पर भी सवाल खड़ा किया है जिसमें वह लगातार चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की बात कह रहा है।
धरने के दौरान राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्षी सांसद जहां बैठने को कहा जाएगा, वहां बैठने को तैयार हैं। उन्होंने पुलिस से सवाल किया कि यदि आकाशवाणी भवन में बैठना गलत है तो उन्हें ऐसी जगह बताई जाए जहां वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर सकें। उनका कहना था कि वे लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और जरूरत पड़ने तक धरने पर बैठे रहेंगे।
इस बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी आकाशवाणी भवन से कहा कि विपक्ष चुनाव आयुक्तों से मुलाकात किए बिना वहां से नहीं हटेगा। विपक्षी नेताओं की मौजूदगी बढ़ने के साथ आकाशवाणी भवन मंगलवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया।
सड़क पर हुए इस शक्ति प्रदर्शन का असर दिल्ली के आम जनजीवन पर भी पड़ा। संसद मार्ग और नई दिल्ली के कई प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के कारण यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए कई मार्गों पर आवाजाही प्रतिबंधित की और लोगों को वैकल्पिक रास्तों तथा मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
अब सवाल सिर्फ एक प्रदर्शन या एक दिन के राजनीतिक मार्च का नहीं रह गया है। राहुल गांधी ने जिस तरह प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, RSS प्रमुख और CEC का नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, उससे यह विवाद सीधे देश की चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के सवाल तक पहुंच गया है।
विपक्ष का दावा है कि यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। सरकार इसे राजनीतिक नाटक बता रही है। चुनाव आयोग अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करता। लेकिन मंगलवार को दिल्ली की सड़कों पर जो टकराव दिखाई दिया, उसने साफ कर दिया है कि ‘वोट चोरी’, SIR और मतदाता सूची का विवाद अब आने वाले दिनों में देश की राजनीति के सबसे बड़े संघर्षों में शामिल रहने वाला है।



