Home » Blog » समुद्र की गहराइयों में नई सैन्य दौड़: अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया मिलकर बनाएंगे अंडरवॉटर ड्रोन नेटवर्क

समुद्र की गहराइयों में नई सैन्य दौड़: अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया मिलकर बनाएंगे अंडरवॉटर ड्रोन नेटवर्क

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | ABC NATIONAL NEWS | सिंगापुर | 31 मई 2026

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्र के भीतर संचालित होने वाली अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक विकसित करने की घोषणा की है। तीनों देशों ने कहा है कि यह नई अंडरवॉटर ड्रोन प्रणाली समुद्र के नीचे बिछे संचार केबलों, ऊर्जा पाइपलाइनों और रणनीतिक ढांचों की सुरक्षा के साथ-साथ निगरानी, टोही और सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यह घोषणा सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांग्री-ला डायलॉग सुरक्षा सम्मेलन के दौरान की गई, जहां अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त रूप से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी। यह परियोजना ऑकस (AUKUS) रक्षा समझौते के तहत शुरू की जा रही है, जिसमें तीनों देश उन्नत सैन्य तकनीकों और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने बताया कि इस परियोजना में ब्रिटेन लगभग 150 मिलियन पाउंड (करीब 201 मिलियन डॉलर) का योगदान देगा। उन्होंने स्वीकार किया कि ऑकस परियोजनाओं की प्रगति को लेकर पहले आलोचनाएं हुई थीं, लेकिन अब तीनों सरकारें तेजी से परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

नई तकनीक के तहत विकसित किए जाने वाले अनमैन्ड अंडरसी व्हीकल्स (UUVs) यानी मानव रहित पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन समुद्री आधारभूत ढांचे की सुरक्षा, दुश्मन गतिविधियों की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और आवश्यक सैन्य सामग्री के परिवहन जैसे कार्य कर सकेंगे। इन ड्रोन में अत्याधुनिक सेंसर, निगरानी उपकरण और उन्नत हथियार प्रणालियां भी लगाई जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के नीचे बिछे फाइबर ऑप्टिक केबल आज वैश्विक इंटरनेट, बैंकिंग और संचार व्यवस्था की रीढ़ हैं। हाल के वर्षों में यूरोप, ताइवान और बाल्टिक सागर क्षेत्र में कई अंडरसी केबलों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं ने पश्चिमी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ब्रिटेन पहले ही रूस पर समुद्री केबलों और पाइपलाइनों के खिलाफ गुप्त गतिविधियां चलाने के आरोप लगा चुका है, हालांकि मॉस्को इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

ALSO READ  Imran Khan के समर्थन में उतरे कपिल देव, सुनील गावस्कर समेत 14 पूर्व क्रिकेटर, पाकिस्तान सरकार को लिखा पत्र

ऑकस समझौता वर्ष 2021 में शुरू हुआ था और इसे व्यापक रूप से चीन की बढ़ती समुद्री शक्ति तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके प्रभाव के जवाब के रूप में देखा जाता है। हालांकि सम्मेलन में तीनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने सीधे तौर पर यह स्वीकार नहीं किया कि नई अंडरवॉटर ड्रोन परियोजना रूस या चीन को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

ऑकस के पहले चरण के तहत ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के लिए परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों के निर्माण की योजना पर भी काम जारी है। ऑस्ट्रेलिया को इस समझौते के माध्यम से अमेरिका की अत्यंत संवेदनशील परमाणु प्रणोदन तकनीक तक पहुंच प्राप्त होगी, जो पहले केवल ब्रिटेन के पास थी।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में अमेरिकी और ब्रिटिश परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती की योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ रही है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने भरोसा जताया कि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया स्थित HMAS स्टर्लिंग नौसैनिक अड्डा 2027 तक इस नई व्यवस्था के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि यह परियोजना केवल सैन्य तकनीक का विकास नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। समुद्र के भीतर बढ़ती गतिविधियों और महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क की सुरक्षा को देखते हुए आने वाले वर्षों में अंडरवॉटर ड्रोन तकनीक वैश्विक रक्षा नीति का अहम हिस्सा बन सकती है।

ऑकस देशों की यह नई पहल संकेत देती है कि भविष्य की सामरिक प्रतिस्पर्धा केवल जमीन, आकाश और अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी तकनीकी और रणनीतिक वर्चस्व की नई दौड़ देखने को मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *