अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 31 मई 2026
चीन और अफ्रीका के बीच संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों पक्षों ने अपने ऐतिहासिक रिश्तों, आर्थिक सहयोग और साझा विकास की उपलब्धियों को नई ऊर्जा के साथ याद किया। इस अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने बधाई संदेशों का आदान-प्रदान करते हुए सात दशक पुराने संबंधों को विकासशील देशों के बीच सहयोग का आदर्श मॉडल बताया।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में चीन और अफ्रीकी देशों के बीच मित्रता, एकजुटता और सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि चीन-अफ्रीका संबंध न केवल विकासशील देशों के बीच साझेदारी का उदाहरण हैं, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की उभरती ताकत का भी प्रतीक बन चुके हैं।
चीन और अफ्रीका के रिश्तों की नींव 1950 और 1970 के दशक के बीच उस दौर में पड़ी थी जब अनेक अफ्रीकी देश स्वतंत्रता और राष्ट्रीय मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे थे। चीन ने उस समय अफ्रीकी देशों का समर्थन किया, जबकि 1971 में संयुक्त राष्ट्र में चीन की वैध सदस्यता बहाल कराने में अफ्रीकी देशों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस ऐतिहासिक मतदान में चीन के पक्ष में पड़े 76 मतों में से 26 अफ्रीकी देशों के थे।
पिछले दो दशकों में चीन-अफ्रीका सहयोग तेजी से विस्तारित हुआ है। वर्ष 2000 में स्थापित फोरम ऑन चाइना-अफ्रीका कोऑपरेशन (FOCAC) ने दोनों पक्षों के बीच संस्थागत सहयोग को नई दिशा दी। इसके बाद व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ता गया।
वर्ष 2024 के FOCAC शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को “नई पीढ़ी के लिए साझा भविष्य वाले सर्वकालिक समुदाय” का दर्जा दिया। चीन ने 2025 तक राजनयिक संबंध रखने वाले सभी 53 अफ्रीकी देशों को शून्य-शुल्क (Zero Tariff) व्यापार सुविधा देने की घोषणा कर एक नया आर्थिक अध्याय शुरू किया।
आर्थिक मोर्चे पर चीन और अफ्रीका की साझेदारी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। चीन के सीमा शुल्क प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में दोनों पक्षों के बीच व्यापार 348 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.7 प्रतिशत अधिक था। चीन लगातार 17वें वर्ष अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत चीन ने अफ्रीका में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया है। तंजानिया-जाम्बिया रेलवे (TAZARA) और मोम्बासा-नैरोबी स्टैंडर्ड गेज रेलवे जैसी परियोजनाओं ने अफ्रीका में परिवहन और व्यापारिक संपर्क को नई गति दी है। इन परियोजनाओं को चीन-अफ्रीका सहयोग की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।
इसके अलावा चीन ने अफ्रीकी देशों को ऋण राहत, तकनीकी प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग भी प्रदान किया है। वर्ष 2025 तक चीन ने 15 अफ्रीकी देशों में 17 लुबान वर्कशॉप स्थापित की हैं, जहां हजारों युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही 114 विश्वविद्यालयों को जोड़ने वाली चीन-अफ्रीका विश्वविद्यालय सहयोग योजना भी संचालित की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-अफ्रीका साझेदारी अब केवल व्यापार या निवेश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह औद्योगिकीकरण, हरित ऊर्जा, शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बन चुकी है। अफ्रीकी नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह सहयोग विकासशील देशों को वैश्विक व्यवस्था में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर प्रदान कर रहा है।
सात दशक की इस यात्रा ने साबित किया है कि चीन और अफ्रीका के रिश्ते केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा विकास, आर्थिक प्रगति और वैश्विक दक्षिण की मजबूती के लिए एक दीर्घकालिक साझेदारी में बदल चुके हैं। आने वाले वर्षों में यह संबंध अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




