मनोरंजन | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 4 जून 2026
नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म “मां बहन” अपने अनोखे शीर्षक और अलग कहानी के कारण चर्चा में है। निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने भारतीय समाज में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली गाली “मां-बहन” को एक व्यंग्यात्मक और सामाजिक टिप्पणी में बदलने की कोशिश की है। फिल्म में माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धारणा दुर्गा मुख्य भूमिकाओं में हैं।
फिल्म की कहानी एक मध्यमवर्गीय कॉलोनी में रहने वाली एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमती है जो समाज की तयशुदा परंपराओं और अपेक्षाओं को मानने से इनकार करती है। हालात तब नाटकीय मोड़ लेते हैं जब उसके घर में एक पड़ोसी की लाश मिलती है और अपनी बेटियों के साथ वह एक ऐसे घटनाक्रम में फंस जाती है जो अपराध, हास्य और सामाजिक व्यंग्य का मिश्रण बन जाता है।
समीक्षकों के अनुसार फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका सामाजिक संदेश है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि किस प्रकार समाज महिलाओं के चरित्र का आकलन उनके पहनावे, जीवनशैली और व्यक्तिगत फैसलों के आधार पर करता है। हालांकि निर्देशक एक साथ सामाजिक टिप्पणी, मिस्ट्री और कॉमेडी तीनों को साधने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई जगह कहानी अपनी पकड़ खो देती है।
फिल्म में माधुरी दीक्षित ने एक चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई है और अंतिम हिस्सों में उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है। वहीं तृप्ति डिमरी और धारणा दुर्गा ने भी अपने किरदारों को मजबूती से निभाया है। हालांकि कुछ समीक्षकों का मानना है कि फिल्म की पटकथा और गति कमजोर पड़ जाती है, जिससे इसका प्रभाव पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाता।
रवि किशन का किरदार भी दर्शकों का ध्यान खींचता है, लेकिन उनके लिए अधिक मजबूत और विस्तृत भूमिका की गुंजाइश थी। फिल्म का व्यंग्य और सामाजिक संदेश कई बार प्रभावी लगता है, लेकिन बार-बार अपनी “अलग” होने की कोशिश में कहानी का स्वाभाविक प्रवाह बाधित होता है।
“मां बहन” एक ऐसी फिल्म है जो महिलाओं को लेकर समाज की सोच पर सवाल उठाती है, लेकिन मजबूत विचार के बावजूद अपनी कहानी और प्रस्तुति में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। फिर भी माधुरी दीक्षित का अभिनय और फिल्म का अलग विषय इसे एक बार देखने लायक बनाता है।




