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“मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता हूं” – सोशल मीडिया आलोचनाओं पर CJI का जवाब

नई दिल्ली 18 सितम्बर 2025

मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस गवई ने कहा कि वे पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के पक्षधर हैं और उनके न्यायिक दृष्टिकोण को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। यह बयान उस समय आया जब सोशल मीडिया पर खजुराहो मामले पर उनकी टिप्पणी को लेकर आलोचनाएँ की जा रही थीं।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

हाल ही में खजुराहो मंदिर से जुड़े एक केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई की कुछ टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। इन पर कई यूज़र्स ने यह सवाल उठाया कि क्या न्यायपालिका धार्मिक मामलों में तटस्थ रह पा रही है। इस पर CJI गवई ने सीधे कहा कि उनकी सोच और कामकाज पूरी तरह भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप हैं।

CJI का स्पष्ट संदेश

CJI गवई ने कहा –

“मैं धर्मनिरपेक्षता में गहरी आस्था रखता हूँ। मेरे अब तक के फैसले और टिप्पणियाँ इस बात की गवाही देती हैं कि मैंने हमेशा संविधान की मर्यादा और संतुलन का पालन किया है। सोशल मीडिया पर की जा रही आलोचनाएँ एकतरफ़ा और भ्रामक हैं।”

न्यायपालिका की तटस्थता पर जोर

जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि न्यायपालिका का मूल आधार तटस्थता, निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्षता है। अदालतें न किसी धर्म के पक्ष में झुकती हैं और न ही किसी के खिलाफ। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की आत्मा है।

बहस और पारदर्शिता की ज़रूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान न्यायपालिका की पारदर्शिता और भरोसे को मज़बूत करते हैं। सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का जवाब देना और जनता को संविधान की मूल भावना याद दिलाना न्याय व्यवस्था के लिए बेहद अहम है।

 

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