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इजरायल-फ़िलिस्तीन विवाद पर प्रियंका गांधी का केंद्र पर सीधा हमला, राजनयिक ने दिया पलटवार

नई दिल्ली 12 अगस्त 2025

कांग्रेस महासचिव का आरोप: भारत सरकार की चुप्पी ‘अनुचित और असंवेदनशील’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इजरायल द्वारा फ़िलिस्तीन पर की जा रही कार्रवाइयों को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया ग़ाज़ा और वेस्ट बैंक में जारी मानवीय संकट पर चिंता जता रही है, भारत सरकार की ‘चुप्पी और निष्क्रियता’ हैरान करने वाली है। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया और प्रेस बयान में कहा कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति हमेशा शांति, संवाद और मानवीय मूल्यों के समर्थन में रही है, लेकिन वर्तमान सरकार ने उस परंपरा को छोड़ दिया है। उनका कहना था कि लाखों निर्दोष लोग हिंसा और विस्थापन के शिकार हो रहे हैं, ऐसे में चुप रहना भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए उचित नहीं है।

मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतरराष्ट्रीय चिंता का हवाला

प्रियंका गांधी ने अपने बयान में संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई में नागरिकों की जान जा रही है, बुनियादी ढांचा तबाह हो रहा है और मानवीय सहायता पर भी रोक लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी आवाज़ उन देशों में शामिल करनी चाहिए जो इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान और फ़िलिस्तीन के नागरिकों के संरक्षण की मांग कर रहे हैं। प्रियंका ने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल है।

भारतीय रुख पर इजरायली दूत का पलटवार

प्रियंका गांधी के बयान पर भारत में इजरायल के राजदूत ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल की कार्रवाई आत्मरक्षा में है और देश को अपने नागरिकों की सुरक्षा का पूरा अधिकार है। राजदूत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने स्थिति की वास्तविकताओं को नज़रअंदाज़ किया और तथ्यों की बजाय भावनात्मक तर्क दिए। उन्होंने यह भी कहा कि फ़िलिस्तीनी उग्रवादी संगठनों द्वारा इजरायल पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिनका जवाब देना जरूरी है।

सरकार की चुप्पी पर विपक्ष की बढ़ती आलोचना

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष पहले से ही केंद्र सरकार पर विदेश नीति में ‘एकतरफ़ा झुकाव’ का आरोप लगा रहा है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी समय-समय पर पश्चिम एशिया में भारत की ‘संवेदनशील और संतुलित भूमिका’ की मांग की है। प्रियंका गांधी का यह बयान न केवल विपक्षी एकजुटता को मजबूत करता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के मौजूदा रुख पर भी सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक और कूटनीतिक असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर भारत का संतुलित और सक्रिय रुख न केवल घरेलू राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी अहम भूमिका निभाता है। प्रियंका गांधी के बयान और इजरायली राजनयिक के पलटवार ने इस बहस को और तीखा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र सरकार इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं, क्योंकि चुप्पी अब विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुकी है।

 

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