नई दिल्ली 12 अगस्त 2025
अभिषेक बनर्जी का तीखा बयान
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) विवाद पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग यह मानता है कि मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां हैं और इसी वजह से SIR हो रहा है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी कैबिनेट को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, साथ ही लोकसभा को भंग कर देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मतदाता सूची के मामले में चुनिंदा राज्यों पर कार्रवाई कर रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
‘चुनिंदा राज्यों’ पर निशाना
बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह बीजेपी शासित राज्यों जैसे गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मतदाता सूचियों को “ठीक” बता रहा है, जबकि विपक्ष शासित राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु में खामियां बताकर SIR लागू कर रहा है। उन्होंने कहा, “नियम सबके लिए एक जैसे होने चाहिए। अगर एक जगह मतदाता सूची में खामियां हैं, तो पूरे देश में जांच होनी चाहिए। अलग-अलग राज्यों के लिए अलग नियम नहीं चलेंगे।”
बिहार में SIR का राजनीतिक तूफान
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी नेताओं के मुताबिक, मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम, डुप्लीकेट एंट्री और अविश्वसनीय उम्र के मतदाताओं का नाम दर्ज है। सबसे चर्चित मामला 124 वर्षीय पहली बार वोट देने वाली महिला ‘मिंटा देवी’ का है। इसके अलावा, 65 लाख नाम हटाए जाने और हटाए गए नामों का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट को न देने से विपक्ष के संदेह और गहरे हो गए हैं।
लोकसभा की वैधता पर सवाल
बनर्जी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग यह मानता है कि मतदाता सूचियां गलत थीं, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में चुनी गई मौजूदा सरकार की वैधता ही खत्म हो जाती है, क्योंकि यही सूचियां उस चुनाव में इस्तेमाल हुई थीं। उन्होंने तर्क दिया कि इन्हीं सूचियों से 240 से अधिक बीजेपी सांसद चुने गए और इन्हीं के आधार पर लोकसभा का गठन हुआ, जो आने वाले समय में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव भी करेगी।
‘भय के कारण हो रही कार्रवाई’
TMC नेता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि बिहार में SIR की शुरुआत इसलिए की गई है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल को डर है कि अगर लोग स्वतंत्र रूप से वोट डालेंगे, तो वह चुनाव हार सकता है। उन्होंने कहा, “ये प्रक्रिया विपक्षी गढ़ों को कमजोर करने की साजिश है। अगर ईमानदारी से चुनाव कराने का इरादा है, तो SIR पूरे देश में एक साथ लागू किया जाए।”
बीजेपी और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि SIR एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका मकसद केवल मतदाता सूची को सटीक बनाना है। वहीं चुनाव आयोग ने अब तक बनर्जी की देशव्यापी SIR की मांग या प्रधानमंत्री के इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। आयोग का कहना है कि SIR आवश्यकता के आधार पर होती है और बिहार में यह प्रक्रिया चुनावी तैयारियों का हिस्सा है।




