राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026
अग्निवीर योजना को लेकर राहुल गांधी चार साल से जिस सवाल को लगातार उठा रहे थे, आखिरकार मोदी सरकार को उसी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है। चार साल की सेवा के बाद 75 फीसदी अग्निवीरों को सेना से बाहर करने के प्रावधान में अब दो साल की अतिरिक्त सेवा जोड़ दी गई है। सरकार के इस फैसले ने अग्निपथ योजना को लेकर उठ रहे सवालों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
चार साल बाद घर भेजने की व्यवस्था पर सरकार को करना पड़ा पुनर्विचार
अग्निपथ योजना जून 2022 में लागू हुई थी। इसके मूल प्रावधान के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से केवल 25 फीसदी को योग्यता और सेना की जरूरतों के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जाना था। शेष 75 फीसदी को सेना से बाहर होना था।
अब पहले चार साल पूरे करने के बाद नियमित सेवा में चयनित नहीं होने वाले अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर दिया जाएगा। इस अवधि में उन्हें पहले से अधिक पारिश्रमिक मिलेगा। छह साल पूरे होने पर वे नियमित सैनिक के रूप में भर्ती होने के लिए फिर विचार के दायरे में आएंगे। हालांकि, नियमित नियुक्ति स्वतः नहीं मिलेगी; इसके लिए अग्निवीर की इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों पर खरा उतरना जरूरी होगा। Press Information Bureau +2
राहुल गांधी लगातार उठा रहे थे सवाल
राहुल गांधी ने अग्निपथ योजना की शुरुआत से ही चार साल की सेवा और उसके बाद 75 फीसदी युवाओं को बाहर किए जाने के प्रावधान पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सेना में भर्ती होने वाले युवाओं को स्थायी रोजगार और भविष्य की सुरक्षा मिलनी चाहिए। कांग्रेस ने भी योजना में बदलाव और इसे वापस लेने की मांग की थी।
अब सरकार ने उसी चार साल की व्यवस्था में दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर जोड़ दिया है। यह बदलाव उन सवालों को फिर सामने लाता है जिन्हें राहुल गांधी और विपक्ष लगातार उठा रहे थे। सरकार इसे योजना की नियमित समीक्षा और सेना के अनुभव के आधार पर लिया गया फैसला बता रही है। Press Information Bureau +1
पवन खेड़ा का तंज—‘भारतीय जनता पलटी’
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अग्निवीर योजना में बदलाव पर तंज कसते हुए बीजेपी को ‘भारतीय जनता पलटी’ कहा। उनका इशारा सरकार के उन फैसलों की ओर था, जिनमें राजनीतिक विरोध और जनदबाव के बाद बदलाव करना पड़ा। खेड़ा ने अग्निवीर योजना के फैसले को चुनावी राज्यों में युवाओं की नाराजगी से भी जोड़ा।
हालांकि, सरकार ने इस फैसले के पीछे चुनावी कारणों का उल्लेख नहीं किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों के प्रदर्शन का आकलन किया गया और सेना से मिले सकारात्मक फीडबैक के आधार पर अतिरिक्त सेवा अवधि की सिफारिश की गई। Press Information Bureau +1
मोदी सरकार का फैसला क्या स्वीकार करता है?
सरकार का कहना है कि अग्निपथ योजना बंद नहीं की जा रही है। मूल चार साल की सेवा व्यवस्था जारी रहेगी। बदलाव यह है कि पहले चार साल बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को अब दो साल और सेवा का अवसर मिलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ बताया है। Press Information Bureau +1
लेकिन सवाल यह है कि अगर चार साल की सेवा के बाद 75 फीसदी अग्निवीरों को बाहर करने की व्यवस्था इतनी कारगर थी, तो अब उसमें दो साल जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पहले से उठाई जा रही चिंताओं को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया? और छह साल बाद भी नियमित सेवा में जगह नहीं पाने वाले युवाओं के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
राहुल गांधी के सवाल फिर केंद्र में
अग्निपथ योजना को लेकर राहुल गांधी की आलोचना को सरकार ने लंबे समय तक खारिज किया। अब उसी योजना में बड़ा बदलाव किया गया है। इसे राहुल गांधी की राजनीतिक जीत मानना कांग्रेस का नजरिया हो सकता है, लेकिन यह तथ्य अपनी जगह है कि चार साल बाद 75 फीसदी अग्निवीरों को बाहर करने वाला मूल प्रावधान अब दो साल के अतिरिक्त सेवा अवसर के साथ बदल दिया गया है।
मोदी सरकार ने योजना वापस नहीं ली है, लेकिन उसे पहले जैसा भी नहीं रहने दिया। जिस व्यवस्था को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि बताती रही, उसमें अब खुद सरकार को संशोधन करना पड़ा है। अग्निवीरों के भविष्य पर उठे सवाल खत्म नहीं हुए हैं—बस उनके जवाब देने की जिम्मेदारी अब सरकार पर और बढ़ गई है।



