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राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी का झूठ फैलाने में जुटी AAP! केजरीवाल ने अपनी पार्टी को बनाया IT सेल का एक्सटेंशन?

कांग्रेस पर हमला करने के लिए ‘आलू से सोना’ वाले पुराने प्रचार को AAP ने बनाया अपना पिन पोस्ट; राहुल गांधी को बदनाम करने वाला बीजेपी का नैरेटिव अब केजरीवाल की पार्टी के आधिकारिक मंच पर!

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026

राहुल गांधी पर हमला करने के लिए आम आदमी पार्टी को अब बीजेपी के IT सेल का पुराना झूठ ही क्यों याद आ रहा है? अरविंद केजरीवाल की पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर ‘आलू से सोना’ वाली पोस्ट को पिन करके रखा गया है। यानी जिस प्रचार को बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ वर्षों तक हथियार बनाया, उसी को AAP ने अपनी पार्टी का स्थायी संदेश बना लिया है। कांग्रेस पर हमला करने के लिए क्या केजरीवाल की पार्टी के पास अपने तर्क और अपने मुद्दे तक नहीं बचे?

यह महज एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं है। पिन पोस्ट पार्टी के आधिकारिक मंच पर सबसे प्रमुखता से दिखाई देती है। वह बताती है कि पार्टी जनता को क्या दिखाना चाहती है और किस राजनीतिक संदेश को अपनी पहचान बनाना चाहती है। ऐसे में बीजेपी के पुराने प्रचार को स्थायी जगह देना आम आदमी पार्टी की राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

बीजेपी का झूठ, केजरीवाल का हथियार!

‘आलू से सोना’ वाला कथित बयान राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया प्रचार का पुराना हथियार रहा है। वायरल क्लिप और उसके संदर्भ को लेकर फैक्ट-चेक में भी सवाल उठाए गए हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी ने उसी विवादित प्रचार को अपने आधिकारिक हैंडल पर पिन कर रखा है।

कांग्रेस की नीतियों पर हमला करना है तो कीजिए। राहुल गांधी के राजनीतिक फैसलों की आलोचना करनी है तो कीजिए। लेकिन बीजेपी के प्रचार तंत्र से उठाकर पुराना कंटेंट अपनी पार्टी का स्थायी संदेश बना देना किस तरह की स्वतंत्र राजनीति है? केजरीवाल की पार्टी आखिर किसके नैरेटिव को आगे बढ़ा रही है—अपना या बीजेपी का?

सोनिया गांधी का साथ याद है या सियासी सुविधा भारी पड़ गई?

31 मार्च 2024 को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली हुई थी। उस समय अरविंद केजरीवाल जेल में थे। सोनिया गांधी ने सुनीता केजरीवाल को अपने पास बैठाकर समर्थन और एकजुटता का संदेश दिया था। मुश्किल वक्त में कांग्रेस ने केजरीवाल परिवार के साथ राजनीतिक और मानवीय एकजुटता दिखाई थी।

आज उसी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी के पुराने प्रचार को AAP अपने आधिकारिक मंच पर सजाकर बैठी है। क्या यही गठबंधन की राजनीति है? जब समर्थन चाहिए तो कांग्रेस अपना परिवार और जब राजनीतिक हमला करना हो तो बीजेपी का पुराना प्रोपेगेंडा अपना हथियार?

एक नवंबर की रैली की गूंज और AAP की बेचैनी!

एक नवंबर की रामलीला मैदान रैली ने राहुल गांधी और विपक्षी एकजुटता को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ी। रैली को लेकर जिस तरह का जनसमर्थन दिखाई दिया, उसने विपक्ष की ताकत का संदेश दिया। राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार, चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे समय में AAP का उनके खिलाफ पुराने और विवादित प्रचार को प्रमुखता देना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से आगे बढ़कर एक बड़े सवाल को जन्म देता है।

क्या केजरीवाल की पार्टी को राहुल गांधी से राजनीतिक मुकाबला करना है, या उन्हें बदनाम करने के लिए वही पुराने हथकंडे अपनाने हैं जिनकी आलोचना वह खुद बीजेपी के संदर्भ में करती रही है?

केजरीवाल की राजनीति का पुराना तरीका भी देखिए

आम आदमी पार्टी का राजनीतिक सफर कांग्रेस और शीला दीक्षित के खिलाफ तीखे आरोपों और आक्रामक प्रचार से शुरू हुआ था। शीला दीक्षित के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा, कपिल मिश्रा से जुड़े राजनीतिक विवाद, सोमनाथ भारती के विवादित प्रसंग और तबलीगी जमात के मुद्दे पर केजरीवाल के बयानों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।

अब सवाल यह है कि क्या AAP की राजनीति आज भी विरोधियों को घेरने के लिए आरोप, कटाक्ष और सोशल मीडिया प्रचार तक ही सिमट गई है? जिस पार्टी ने वैकल्पिक राजनीति का दावा करके सत्ता हासिल की थी, वह आज बीजेपी के पुराने प्रचार को अपना सबसे प्रमुख संदेश क्यों बना रही है?

विपक्ष से लड़कर किसे फायदा पहुंचा रहे हैं केजरीवाल?

बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता का दावा करने वाले दल अगर एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए उसी प्रचार सामग्री का इस्तेमाल करने लगें जिसे बीजेपी ने गढ़ा या आगे बढ़ाया, तो इसका राजनीतिक फायदा आखिर किसे मिलेगा? कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश में AAP अनजाने में बीजेपी के नैरेटिव को ही ताकत दे रही है—और यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा विरोधाभास है।

राहुल गांधी की आलोचना कीजिए, लेकिन बीजेपी के झूठ को अपना झंडा मत बनाइए। केजरीवाल को राहुल गांधी से मुकाबला करना है तो अपनी राजनीति, अपने काम और अपने विचारों के दम पर करें। बीजेपी के IT सेल के पुराने माल को पिन पोस्ट बनाकर कोई वैकल्पिक राजनीति खड़ी नहीं होती।

राहुल गांधी का संघर्ष जारी है। लेकिन केजरीवाल की पार्टी का यह कदम एक कड़वा सवाल छोड़ गया है—क्या AAP अब बीजेपी से लड़ने के बजाय उसके प्रचार की भाषा बोलने लगी है?

आखिर में वही तंज—

“सड़े हुए जी साहब जी से मिले हुए हैं जी!”

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