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सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सुनवाई के बजाय कह दिया—‘हवाई सफर मत कीजिए!’ 700% तक किराया बढ़ने पर आम यात्री जाए तो कहां?

हवाई टिकटों की कीमतों में सात गुना तक बढ़ोतरी की शिकायत लेकर पहुंचा याचिकाकर्ता, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार; सवाल—किसी की मेडिकल इमरजेंसी हो, परिवार में संकट हो या जरूरी काम, तो क्या वह सफर भी छोड़ दे?

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 नवंबर 2026

हवाई टिकटों के किराये में 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एक याचिकाकर्ता को तत्काल सुनवाई नहीं मिली। राहत की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचे याचिकाकर्ता को पीठ की ओर से सलाह मिली—हवाई यात्रा मत कीजिए।

अब सवाल यह है कि अगर किसी को अचानक मेडिकल इमरजेंसी हो जाए, परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार हो, किसी की जान बचाने के लिए दूसरे शहर पहुंचना जरूरी हो या नौकरी और जरूरी काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़े, तो वह क्या करे? क्या सिर्फ इसलिए सफर छोड़ दे कि हवाई टिकट उसकी पहुंच से बाहर हो गया है?

सोमवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ के सामने एक अधिवक्ता ने हवाई किरायों में लगभग 700 प्रतिशत तक वृद्धि का मुद्दा उठाया और मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

सात गुना किराया, यात्री आखिर जाए तो जाए कहां?

हवाई यात्रा हर व्यक्ति के लिए शौक या विलासिता नहीं होती। कई बार यह मजबूरी होती है। किसी परिवार में अचानक दुर्घटना हो जाए, अस्पताल से गंभीर बीमारी की खबर आए, किसी मरीज को दूसरे शहर ले जाना हो या किसी व्यक्ति को तत्काल अपने घर पहुंचना हो—ऐसे समय में टिकट की कीमत से ज्यादा जरूरी समय होता है।

लेकिन जब किराये में कई गुना बढ़ोतरी की शिकायत सामने आती है, तो आम यात्री के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। जिसके पास सीमित पैसे हैं, वह इतनी महंगी टिकट कैसे खरीदेगा? और जिसके पास यात्रा टालने का विकल्प ही नहीं है, वह क्या करेगा?

क्या अब आपातकाल में भी आम आदमी को अपनी जेब देखकर तय करना होगा कि वह अपनों तक पहुंच सकता है या नहीं?

### सरकार नियम बना रही है, यात्री आज परेशान है

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत विमानन नियमों को तेजी से तैयार किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य हवाई किरायों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना और यात्रियों के हितों की रक्षा करना है।

लेकिन यात्रियों की परेशानी नियम तैयार होने तक इंतजार नहीं कर सकती। टिकटों की कीमतों में असाधारण बढ़ोतरी की शिकायतों पर तत्काल निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।

आम आदमी के लिए हवाई सफर कितना सुलभ?

देश में हवाई सेवाओं का विस्तार आम लोगों को तेज और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया। लेकिन यदि टिकटों की कीमतें अचानक सात गुना तक बढ़ने लगें और शिकायत लेकर अदालत पहुंचने वाले व्यक्ति को भी तत्काल सुनवाई न मिले, तो यात्री हितों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठेंगे।

मुद्दा यह नहीं कि कोई व्यक्ति हवाई यात्रा करे या न करे। असली सवाल यह है कि हवाई किराये में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की शिकायतों पर जवाबदेही कौन तय करेगा? आपात स्थिति में फंसे यात्रियों को राहत कौन देगा?

सवाल सीधा है—हवाई सफर मत कीजिए, यह कहना आसान है। लेकिन अगर किसी की जान, परिवार या जरूरी काम का सवाल हो, तो वह क्या करे? आम आदमी को सलाह नहीं, किफायती किराया और समय पर न्याय चाहिए।

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