[the_ad id="179"]
Home » International » चीन का गुप्त अंतरिक्ष विमान ‘शेनलोंग’ बना चिंता का कारण, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में अंतरिक्ष हथियारों की आशंका

चीन का गुप्त अंतरिक्ष विमान ‘शेनलोंग’ बना चिंता का कारण, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में अंतरिक्ष हथियारों की आशंका

कक्षा में शेनलोंग के साथ जुड़ा दिखा दूसरा अंतरिक्ष यान; उपग्रहों को जाम करने, लेजर से नुकसान पहुंचाने और अंतरिक्ष में सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में चीन की गतिविधियों पर अमेरिका की नजर

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026

चीन का गोपनीय अंतरिक्ष विमान ‘शेनलोंग’ एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के ध्यान में है। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की एक नई रिपोर्ट में इस अंतरिक्ष विमान की कक्षा में मौजूद एक दुर्लभ तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में शेनलोंग के साथ एक अन्य अंतरिक्ष यान जुड़ा दिखाई देता है और उसके पेलोड बे के दरवाजे खुले हैं। इस गतिविधि ने चीन की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और अंतरिक्ष में संभावित सैन्य इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

यह तस्वीर अमेरिकी अंतरिक्ष खुफिया कंपनी वैंटोर के वर्ल्डव्यू-3 उपग्रह ने 2024 में ली थी। इसे अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी की 130 पन्नों की रिपोर्ट में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान की अंतरिक्ष संबंधी क्षमताओं तथा उनसे जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया गया है।

क्या है चीन का शेनलोंग अंतरिक्ष विमान?

शेनलोंग चीन का पुनः इस्तेमाल किया जा सकने वाला प्रायोगिक अंतरिक्ष विमान है। इसे रॉकेट की मदद से पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाता है और मिशन पूरा होने के बाद यह रनवे पर उतरकर वापस आ सकता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य और तकनीकी विवरण चीन ने सार्वजनिक रूप से सीमित रखे हैं।

इसकी पहली उड़ान सितंबर 2020 में शुरू हुई थी। दूसरी उड़ान के दौरान यह कथित तौर पर 276 दिनों तक अंतरिक्ष में रहा। इससे लंबे समय तक कक्षा में काम करने की इसकी क्षमता का संकेत मिला।

चीन ने आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम को भविष्य में अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती आवागमन तकनीक विकसित करने का प्रयास बताया है। लेकिन शेनलोंग की गतिविधियों पर अमेरिकी और अन्य अंतरिक्ष निगरानी एजेंसियां लगातार नजर रख रही हैं।

कक्षा में दूसरे यान से जुड़ने का रहस्य

शेनलोंग की तस्वीर में एक अन्य अंतरिक्ष यान उसके साथ जुड़ा हुआ दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध तस्वीर से यह स्पष्ट नहीं होता कि दोनों यान किस उद्देश्य से जुड़े थे।

संभावनाओं में दूसरे छोटे उपग्रह को तैनात करना, अंतरिक्ष में पास जाकर संचालन का परीक्षण करना या किसी उपकरण को छोड़ना शामिल हो सकता है। जून 2026 में शेनलोंग के चौथे मिशन के दौरान अमेरिकी अंतरिक्ष निगरानी कंपनी लियोलैब्स ने भी एक ऐसी वस्तु का पता लगाया था, जिसे उसने उच्च विश्वास के साथ अंतरिक्ष विमान से छोड़ी गई वस्तु माना।

फिर भी, इन गतिविधियों का सटीक उद्देश्य सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए इन्हें सीधे अंतरिक्ष हथियारों की तैनाती का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी।

अमेरिका को चीन की अंतरिक्ष सैन्य क्षमता पर चिंता

अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी के अनुसार, चीन ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिसका इस्तेमाल दूसरे देशों के उपग्रहों को बाधित करने या नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। इस तरह की क्षमता को ‘काउंटरस्पेस’ तकनीक कहा जाता है।

रिपोर्ट में रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर, लेजर, उच्च शक्ति वाली माइक्रोवेव तकनीक, रासायनिक स्प्रे, रोबोटिक उपकरण और प्रक्षेप्य जैसे संभावित साधनों का उल्लेख किया गया है। इनमें से कुछ तकनीकों का इस्तेमाल उपग्रहों के संचार, संचालन या काम करने की क्षमता को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

रिपोर्ट में चीन की जमीन आधारित लेजर प्रणालियों पर भी चिंता जताई गई है। अमेरिकी एजेंसी का आकलन है कि ऐसी प्रणालियां पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों को बाधित कर सकती हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं। रिपोर्ट में दशक के उत्तरार्ध तक अंतरिक्ष आधारित लेजर प्रणालियों की संभावित तैनाती का भी उल्लेख है।

हालांकि, स्पेस सिक्योरिटी एंड स्टेबिलिटी से जुड़ी संस्था सिक्योर वर्ल्ड फाउंडेशन की विशेषज्ञ विक्टोरिया सैमसन ने इस समयसीमा पर संदेह जताया है। उन्होंने इसे अटकलों पर आधारित आकलन बताया।

अमेरिकी X-37B से भी हो रही तुलना

शेनलोंग की तुलना अमेरिकी स्पेस फोर्स के बोइंग निर्मित X-37B अंतरिक्ष विमान से की जा रही है। यह भी लंबे समय तक कक्षा में रहकर प्रयोग और अन्य गतिविधियां करने में सक्षम पुनः इस्तेमाल योग्य अंतरिक्ष विमान है। दोनों कार्यक्रमों से जुड़ी अनेक जानकारियां गोपनीय रखी जाती हैं।

अमेरिका ने X-37B के कुछ प्रयोगों की जानकारी सार्वजनिक की है, जबकि चीन ने शेनलोंग के मिशनों का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया है। दोनों देशों के कार्यक्रम बताते हैं कि पुनः इस्तेमाल योग्य अंतरिक्ष विमानों की तकनीक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।

उपग्रहों की सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?

आज संचार, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन, वित्तीय सेवाओं और सैन्य निगरानी के लिए उपग्रहों पर व्यापक निर्भरता है। किसी उपग्रह के संचार या संचालन में व्यवधान का असर नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

फिलहाल शेनलोंग की गतिविधियों से किसी खास देश के उपग्रह को नुकसान पहुंचाने का प्रमाण सामने नहीं आया है। लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष में तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में अमेरिका और चीन की अंतरिक्ष क्षमताओं पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *