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चीन में जिनपिंग का बड़ा शुद्धिकरण अभियान, 33 शीर्ष नेता कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर; सेना में भी भारी उथल-पुथल

पहली बार शी जिनपिंग के 14 साल के नेतृत्व में केंद्रीय समिति की बैठक में सदस्यों की संख्या 300 से नीचे; 33 निष्कासित नेताओं में 16 सैन्य अधिकारी, भ्रष्टाचार के साथ वफादारी पर भी उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 29 अक्टूबर 2026

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई तेज कर दी है। पार्टी की चार दिवसीय बंद कमरे में हुई अहम बैठक के समापन पर 33 सदस्यों को पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें 16 सैन्य अधिकारी शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने चीन की राजनीतिक व्यवस्था और सेना के शीर्ष नेतृत्व में जारी उथल-पुथल को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की पांचवीं पूर्ण बैठक में 279 सदस्य शामिल हुए। अक्टूबर 2025 में हुई पिछली बैठक में 315 और जुलाई 2024 की बैठक में 364 सदस्य शामिल हुए थे। जिनपिंग के 14 साल के नेतृत्व में यह पहला मौका बताया गया है, जब बैठक में सदस्यों की उपस्थिति 300 से नीचे रही।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान या सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की कवायद?

शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को अपने शासन की प्रमुख प्राथमिकता बनाया है। उनका कहना रहा है कि भ्रष्टाचार कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। लेकिन चीन के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखने वाले कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान अब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से आगे बढ़कर पार्टी में निष्ठा और नियंत्रण सुनिश्चित करने का माध्यम भी बन गया है।

पार्टी के आधिकारिक बयान में स्वीकार किया गया कि कुछ मौकों पर नेतृत्व कमजोर हुआ या उसकी प्रभावशीलता कम हुई। बयान में पार्टी के भीतर सख्त अनुशासन लागू करने और संगठन को दुरुस्त करने का संकल्प दोहराया गया।

हालांकि, निष्कासित नेताओं पर लगाए गए आरोपों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। आधिकारिक तौर पर उनके खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी उल्लंघनों का उल्लेख किया गया है।

सेना के शीर्ष अधिकारियों पर भी कार्रवाई

इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चीनी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई है। निष्कासित नेताओं में शिनजियांग के पूर्व पार्टी प्रमुख मा शिंगरुई और पूर्व शीर्ष जनरल झांग यूशिया तथा लियू झेनली जैसे नाम शामिल हैं।

झांग यूशिया केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। यह आयोग चीन की सशस्त्र सेनाओं पर नियंत्रण रखने वाली सर्वोच्च संस्था है। कार्रवाई के बाद आयोग में केवल दो सदस्य बचे हैं—अध्यक्ष के रूप में शी जिनपिंग और उपाध्यक्ष झांग शेंगमिन।

सैन्य नेतृत्व में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव ने चीन की सेना की कमान, संगठनात्मक स्थिरता और युद्ध के लिए तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट से जुड़े विश्लेषकों ने भी इसे असाधारण घटनाक्रम बताया है।

चीन लगातार आधुनिक सैन्य तकनीक और हथियारों का प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई से यह सवाल उठता है कि क्या सेना के भीतर नेतृत्व और निर्णय लेने की व्यवस्था भी उतनी ही स्थिर है।

तीसरे कार्यकाल में निष्कासन का रिकॉर्ड

जिनपिंग के तीसरे कार्यकाल के दौरान अब तक 51 नेताओं को पार्टी से निकाला जा चुका है। उनके पहले कार्यकाल में यह संख्या 35 और दूसरे कार्यकाल में पांच थी। इसके अतिरिक्त, चीन के शीर्ष भ्रष्टाचार निगरानी निकाय के मुताबिक, इस साल के पहले नौ महीनों में पार्टी तंत्र से जुड़े 6.80 लाख लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर अनुशासन अभियान व्यापक स्तर पर जारी है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाई के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार खत्म करना है या नेतृत्व के प्रति पूर्ण निष्ठा सुनिश्चित करना।

2027 की पार्टी कांग्रेस पर नजर

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की अगली बड़ी कांग्रेस 2027 में होनी है, जहां नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। कई विश्लेषकों का अनुमान है कि शी जिनपिंग चौथे कार्यकाल के लिए भी शीर्ष पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो वह माओत्से तुंग के बाद चीन में सबसे लंबे समय तक शीर्ष नेतृत्व संभालने वाले नेताओं में शामिल होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी नेतृत्व परिवर्तन को देखते हुए जिनपिंग पार्टी और सरकार के भीतर संभावित उत्तराधिकारियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की निष्ठा पर अधिक बारीकी से नजर रख सकते हैं।

सत्ता का केंद्रीकरण कितना टिकाऊ?

चीन में लगातार हो रही निष्कासन की कार्रवाइयां दिखाती हैं कि जिनपिंग पार्टी के भीतर नियंत्रण और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण भविष्य में उत्तराधिकार और नेतृत्व परिवर्तन के दौरान नई समस्याएं भी पैदा कर सकता है।

फिलहाल, चीन की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान पार्टी को मजबूत बना रहा है या शीर्ष नेतृत्व के इर्द-गिर्द सत्ता को और अधिक केंद्रित कर रहा है। इसका असर न केवल चीन की आंतरिक राजनीति, बल्कि उसकी सेना और वैश्विक रणनीतिक भूमिका पर भी पड़ सकता है।

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