अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | यरुशलम | 24 अक्टूबर 2026
इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाला आम चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब देश 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले और उसके बाद शुरू हुए युद्धों के सुरक्षा, राजनीतिक और कूटनीतिक परिणामों से जूझ रहा है। चुनाव में नेतन्याहू की सत्ता बरकरार रहती है या विपक्ष सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचता है, इस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में किसी भी प्रमुख राजनीतिक खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सदस्य होते हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में मतदान के बाद भी सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती
नेतन्याहू के लिए यह चुनाव केवल सत्ता में बने रहने का सवाल नहीं है, बल्कि उनके नेतृत्व और सुरक्षा नीतियों पर जनता के भरोसे की भी परीक्षा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के दौरान इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग उठती रही है।
चुनाव में मतदाताओं के सामने यह अहम सवाल होगा कि उस हमले को रोकने में नाकामी के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और सरकार ने उसके बाद पैदा हुए हालात से निपटने में कैसा प्रदर्शन किया। युद्धों के दौरान लिए गए फैसले, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि भी चुनावी बहस के प्रमुख मुद्दे हैं।
नेतन्याहू लंबे समय से इजरायल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती यह है कि क्या वह अपने समर्थकों को एकजुट रख पाएंगे और सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सहयोगियों का समर्थन जुटा सकेंगे।
बहुमत के लिए छोटी पार्टियों पर नजर
इजरायल की आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली चुनाव प्रणाली में किसी एक पार्टी के लिए अकेले बहुमत हासिल करना मुश्किल होता है। सरकार आम तौर पर कई दलों के गठबंधन से बनती है। इसलिए चुनाव के बाद छोटी पार्टियों और क्षेत्रीय या वैचारिक समूहों का समर्थन निर्णायक हो सकता है।
मौजूदा चुनावी अनुमानों के अनुसार, न तो नेतन्याहू के समर्थन वाला खेमा और न ही विपक्ष स्पष्ट रूप से 61 सीटों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। ऐसी स्थिति में छोटी पार्टियों के साथ-साथ अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार गठन के लिए विभिन्न दलों के बीच बातचीत और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया कई सप्ताह तक चल सकती है।
हालांकि, चुनाव पूर्व सर्वेक्षण अंतिम नतीजे नहीं होते। वास्तविक तस्वीर मतदान, मतगणना और उसके बाद होने वाली गठबंधन वार्ताओं से ही स्पष्ट होगी।
सैन्य सेवा और महंगाई भी बड़े मुद्दे
इस चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा सामाजिक और आर्थिक मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय के पुरुषों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य होनी चाहिए या नहीं, यह लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और धार्मिक समूहों के बीच मतभेद हैं।
इजरायल की सेना और सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच सैन्य सेवा में समान भागीदारी का सवाल चुनावी चर्चा में अहम स्थान रखता है। मतदाता यह भी देखेंगे कि विभिन्न दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और गठबंधन सरकार बनने की स्थिति में इस विवाद का समाधान कैसे किया जाएगा।
इसके साथ ही महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत भी मतदाताओं की चिंताओं में शामिल हैं। घरेलू खर्च, आर्थिक स्थिरता और युद्धों के कारण पैदा हुए दबाव का असर सरकार के प्रति जनता के रुख पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय छवि भी चुनावी बहस का हिस्सा
युद्धों के बाद इजरायल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और दूसरे देशों के साथ उसके संबंध भी इस चुनाव के महत्वपूर्ण पहलू हैं। नेतन्याहू सरकार की नीतियों को लेकर विदेशों में उठे सवाल और इजरायल की कूटनीतिक स्थिति मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, चुनाव का परिणाम केवल विदेश नीति पर निर्भर नहीं करेगा। सुरक्षा, सैन्य सेवा, आर्थिक दबाव और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर जनता की राय भी अहम होगी।
क्या सत्ता में बने रहेंगे नेतन्याहू?
27 अक्टूबर का मतदान इजरायल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। यदि नेतन्याहू का खेमा बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटा लेता है, तो वह सत्ता में बने रहने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर, विपक्ष को अवसर तभी मिलेगा, जब वह विभिन्न दलों को साथ लाकर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल कर सके।
लेकिन फिलहाल किसी भी पक्ष के लिए जीत या सरकार गठन का दावा करना जल्दबाजी होगी। चुनाव के बाद गठबंधन की बातचीत और छोटी पार्टियों के फैसले नतीजों जितने ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इस चुनाव में इजरायली मतदाता केवल अगली सरकार नहीं चुनेंगे, बल्कि सुरक्षा विफलताओं की जवाबदेही, युद्ध के बाद देश की दिशा और आर्थिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर भी अपना फैसला सुनाएंगे। नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य इन्हीं मुद्दों और चुनाव के बाद बनने वाले गठबंधन के समीकरणों पर निर्भर करेगा।



