राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 24 अक्टूबर 2026
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाकर किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की जांच कर रही सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने शनिवार को पहली गिरफ्तारी करते हुए दिल्ली के रहने वाले रितेश पांडे को हिरासत में लिया। उन पर सोशल मीडिया पर संबंधित वीडियो अपलोड करने का आरोप है। पूछताछ के लिए उन्हें बेंगलुरु लाया गया और वीडियो अपलोड करने में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी जब्त किया गया।
पुलिस के अनुसार, रितेश पांडे को यह वीडियो अपलोड करने का निर्देश एक ऐसे व्यक्ति ने दिया था, जो एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल की सोशल मीडिया टीम से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो किसने तैयार किया, इसे सार्वजनिक करने के पीछे किसका हाथ था और इस पूरे घटनाक्रम में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहाई
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रितेश पांडे को गिरफ्तार किए जाने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में उनकी गिरफ्तारी से जुड़े आरोपों की विस्तृत कानूनी धाराओं और जमानत की शर्तों का उल्लेख नहीं है।
जांच एजेंसी ने वीडियो अपलोड करने में इस्तेमाल किए गए फोन को अपने कब्जे में लेकर डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल शुरू की है। मोबाइल फोन में मौजूद सामग्री, वीडियो के स्रोत और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से जुड़ी गतिविधियां जांच का अहम हिस्सा हो सकती हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वीडियो को किस समय और किन परिस्थितियों में अपलोड किया गया तथा इसके प्रसार में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर वीडियो तैयार करने वाले व्यक्ति या कथित निर्देश देने वाले शख्स की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
सिद्धारमैया ने निष्पक्ष जांच की मांग की
इस मामले में सिद्धारमैया ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ गढ़ा गया मामला बताया है और इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान सामने लाने की बात कही है। मामले की जांच ऐसे समय में आगे बढ़ रही है, जब कर्नाटक में इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
कांग्रेस नेतृत्व ने भी कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच कराने की मांग उठाई है। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच शुरू कराने को कहा था। पार्टी की ओर से यह जानने पर जोर दिया गया है कि वीडियो के पीछे कौन लोग हैं और इसे किस उद्देश्य से सामने लाया गया।
वहीं, केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने राज्य सरकार पर आरोपियों को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, बीजेपी ने इस विवाद को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। इन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच की दिशा और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी नजर है।
जांच के केंद्र में वीडियो का स्रोत और राजनीतिक कनेक्शन
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल वीडियो की प्रामाणिकता, उसे तैयार करने की परिस्थितियों और उसके प्रसार के पीछे की भूमिका को लेकर हैं। पुलिस की ओर से सामने आई शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वीडियो अपलोड करने वाले व्यक्ति तक जांच पहुंच चुकी है, लेकिन इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि वीडियो बनाने या उसके पीछे कथित साजिश रचने में कौन शामिल था।
जांच एजेंसी को डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़नी होंगी। यदि वीडियो अपलोड करने के निर्देश किसी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति ने दिए थे, तो उस संबंध की प्रकृति और निर्देश देने वाले की वास्तविक भूमिका की पुष्टि भी जांच के जरिए ही होगी।
फिलहाल, इस मामले में पहली गिरफ्तारी हो चुकी है और आरोपी जमानत पर रिहा है। अब जांच का मुख्य उद्देश्य वीडियो के निर्माण से लेकर सोशल मीडिया पर उसके प्रसार तक की पूरी प्रक्रिया का पता लगाना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला केवल वीडियो अपलोड करने तक सीमित है या इसके पीछे कोई व्यापक योजना भी थी।



