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अरुणाचल में जुलाई से चीनी सैनिकों से झड़प, अक्टूबर में हुआ खुलासा! मोदी सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का हमला

ITBP महानिदेशक ने कई स्थानों पर चीनी सैनिकों से टकराव जारी रहने की बात कही; कांग्रेस का सवाल—जब सीमा पर तनाव था, तब देश को भरोसे में क्यों नहीं लिया गया?

राष्ट्रीय/ सुरक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 अक्टूबर 2026

सीमा पर चीनी सैनिकों से टकराव की खबरें महीनों से सामने आ रही थीं, लेकिन देश को इसकी गंभीरता का पता अब जाकर चल रहा है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के हालिया बयान ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि जुलाई से सामने आ रही झड़पों की खबरों को दबाया गया और जनता को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया गया।

यह मामला केवल विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है। सवाल देश की सीमाओं, सैनिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के बारे में जनता को भरोसे में लेने का है।

ITBP प्रमुख का बयान: कई जगह टकराव अब भी जारी

ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है और ऐसी परिस्थितियां अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने इन परिस्थितियों में ITBP के शौर्य कमांडो की भूमिका की भी सराहना की।

रिपोर्टों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में जुलाई से टकराव की खबरें सामने आ रही थीं। सितंबर में वाचा-दमाई क्षेत्र में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच कमांडर स्तर की बातचीत भी हुई थी। इसके बावजूद ताजा बयान से स्पष्ट हुआ कि सीमा पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

अब सवाल यह है कि यदि सीमा पर ऐसी स्थिति बनी हुई थी, तो सरकार की ओर से देश को स्थिति की स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई? राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मामलों में हर जानकारी सार्वजनिक करना संभव नहीं होता, लेकिन क्या इतना भी नहीं बताया जा सकता कि सीमा पर स्थिति क्या है और उसे संभालने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

कांग्रेस का हमला: सैनिकों के साथ टकराव, चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात

ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की स्थिति बनी हुई थी, तब प्रधानमंत्री ने सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात क्यों की और सीमा की स्थिति पर देश को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी?

कांग्रेस नेताओं ने इसे सरकार की चीन नीति में विरोधाभास बताते हुए आरोप लगाया कि एक ओर सीमा पर भारतीय जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी ओर सरकार चीन के साथ सामान्य संबंधों का संदेश दे रही है। पार्टी ने इसे सैनिकों के सम्मान और देश की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बताया।

हालांकि, किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुलाकात अपने-आप में गलत नीति का प्रमाण नहीं है। असली सवाल यह है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ सीमा पर भारत के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए और उनकी जानकारी जनता के सामने कितनी पारदर्शिता से रखी गई।

चीन नीति पर पुराने सवाल भी फिर उठे

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सीमा विवाद के साथ चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने, प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना और भारत के साथ बढ़ते व्यापार घाटे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 99 अरब डॉलर था। ये आंकड़े कांग्रेस नेता के बयान के संदर्भ में हैं; इनके आधिकारिक आंकड़ों से स्वतंत्र मिलान की जरूरत है।

रमेश ने 2020 के गलवान संघर्ष के बाद प्रधानमंत्री के बयान को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने चीन के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपनाया। सरकार की ओर से सीमा सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और चीन के साथ बातचीत को लेकर अलग-अलग समय पर कदम उठाए गए हैं; इसलिए इन आरोपों का आकलन तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए।

देश को भरोसे में लेना सरकार की जिम्मेदारी

सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा कर रहे हैं। उनके साहस और कर्तव्य पर राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान होना चाहिए। लेकिन सैनिकों की बहादुरी का उल्लेख पर्याप्त नहीं है; जनता को यह भी जानने का अधिकार है कि सीमा पर तनाव की स्थिति से निपटने के लिए सरकार की रणनीति क्या है।

ITBP प्रमुख के बयान ने सरकार के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या जुलाई से सामने आ रही घटनाओं पर नियमित आधिकारिक जानकारी दी गई? क्या सीमा पर टकराव कम करने के लिए हुई बातचीत के परिणाम स्पष्ट किए गए? और क्या सरकार संसद तथा जनता को भरोसे में लेने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगी?

राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल पूछना देश के खिलाफ जाना नहीं है। लोकतंत्र में सरकार से जवाब मांगना नागरिकों और विपक्ष का अधिकार है। अब केंद्र सरकार को राजनीतिक आरोपों का जवाब देने के बजाय सीमा की स्थिति, सैनिकों की तैयारियों और कूटनीतिक प्रयासों पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देना चाहिए। सीमा की रक्षा करने वाले जवानों के सम्मान के साथ-साथ जनता का भरोसा बनाए रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

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