राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 अक्टूबर 2026
अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के संदर्भ को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। विवाद जुलाई 2017 के एक ईमेल से जुड़ा है, जिसमें एपस्टीन ने दावा किया था कि मोदी ने सलाह ली थी और अमेरिकी राष्ट्रपति के हित में इजरायल में कार्यक्रम किया था। इस ईमेल को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, ईमेल में किसी व्यक्ति का नाम आना अपने आप में उसके साथ संपर्क, मिलीभगत या किसी अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है।
कांग्रेस ने क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस नेताओं ने पूछा कि एपस्टीन ने प्रधानमंत्री के बारे में ऐसा दावा किस आधार पर किया, कथित सलाह किससे और किस विषय पर ली गई थी और ईमेल में लिखे ‘It worked’ का क्या अर्थ था। पार्टी ने इस मामले को देश की प्रतिष्ठा, प्रधानमंत्री की पारदर्शिता और विदेश नीति से जुड़े सवालों के रूप में उठाया।
विवादित ईमेल 9 जुलाई 2017 की तारीख का बताया गया है। इसमें एपस्टीन ने मोदी के इजरायल दौरे का उल्लेख करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के हित का संदर्भ दिया था। मोदी ने 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इजरायल की आधिकारिक यात्रा की थी। इससे पहले जून 2017 में उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इन घटनाओं को जोड़कर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 31 जनवरी 2026 को कहा कि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा का संदर्भ देने वाले ईमेल की खबरें देखी हैं। मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्रा के तथ्य को स्वीकार करते हुए ईमेल में किए गए बाकी दावों को एक दोषी अपराधी की ‘बेतुकी बातें’ बताते हुए खारिज कर दिया।
इसलिए इस विवाद में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है। पहली, एपस्टीन के ईमेल में प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे का उल्लेख होने की खबर सामने आई। दूसरी, एपस्टीन ने उस दौरे के पीछे जिस कथित सलाह और अमेरिकी राष्ट्रपति के हित का दावा किया, उसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। प्रधानमंत्री और एपस्टीन के बीच प्रत्यक्ष संपर्क या किसी अनुचित संबंध का प्रमाण भी इस ईमेल से अपने आप स्थापित नहीं होता।
एपस्टीन फाइल्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?
जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिसे यौन अपराधों में दोषी ठहराया गया था और जिस पर नाबालिगों के यौन शोषण तथा मानव तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे। अमेरिकी न्याय विभाग ने उससे जुड़े मामलों के लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए हैं। इन दस्तावेजों में ईमेल, संपर्कों और विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों के संदर्भ शामिल हैं। न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जारी सामग्री में कुछ ऐसे दावे या सामग्री हो सकती है जिनकी सत्यता स्थापित नहीं है।
किसी दस्तावेज में नाम आने और किसी अपराध में संलिप्त होने के बीच स्पष्ट अंतर है। इसलिए हर संदर्भ को उसके पूरे संदर्भ, स्रोत और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर देखना जरूरी है।
अब जवाबदेही पर बहस
कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री को ईमेल में किए गए दावों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय ने ईमेल के दावों को खारिज कर दिया है। ऐसे में इस विवाद का केंद्र यही है कि एपस्टीन के दावे का कोई स्वतंत्र आधार है या नहीं और क्या ऐसा कोई प्रमाण मौजूद है जो उसके कथन की पुष्टि करता हो।
यह मामला राजनीतिक बहस का विषय जरूर है, लेकिन किसी गंभीर आरोप को तथ्य मान लेने से पहले उसकी पुष्टि आवश्यक है। प्रधानमंत्री के नाम का उल्लेख अपने आप में किसी अपराध या अनुचित संबंध का प्रमाण नहीं है। यदि कांग्रेस इस मामले में और दस्तावेज या प्रमाण पेश करती है, तो उनका भी इसी कसौटी पर मूल्यांकन होना चाहिए।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी से इतना स्पष्ट है कि एपस्टीन के एक ईमेल में मोदी के इजरायल दौरे का संदर्भ आया, कांग्रेस ने सवाल उठाए और विदेश मंत्रालय ने ईमेल के दावों को खारिज किया। इस विवाद पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए आरोपों से आगे बढ़कर प्रमाणों की जरूरत होगी।



