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खड़गे की मांग: चुनाव आयुक्त को कानूनी संरक्षण देने वाला कानून रद्द हो

EVM की जगह बैलेट पेपर, सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण पर रोक और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग; कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव आयुक्तों को दिए गए कानूनी संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 2023 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए उस कानून को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कुछ मामलों में कानूनी संरक्षण दिया गया है।

खड़गे का आरोप है कि इस संरक्षण से चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही प्रभावित होती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।

कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें

खड़गे ने चुनाव व्यवस्था में बदलाव के लिए तीन प्रमुख मांगें रखीं:

– कानूनी संरक्षण देने वाला कानून रद्द हो: चुनाव आयुक्तों को दिए गए कानूनी संरक्षण से संबंधित प्रावधान समाप्त किए जाएं।
– EVM की जगह बैलेट पेपर: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के स्थान पर मतपत्रों से मतदान कराने की व्यवस्था लागू की जाए।
– सॉफ्टवेयर का केंद्रीकरण खत्म हो: चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और तकनीकी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल

खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों के लिए ज्ञानेश कुमार की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने चुनाव आयुक्तों को ऐसा कानूनी संरक्षण क्यों दिया और क्या इससे जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

हालांकि, चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों और किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी के बीच अंतर करना जरूरी है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों के दस्तावेजों, जांच और कानूनी निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकती है।

कानून क्या कहता है?

2023 में संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून पारित किया था। इसी कानून की धारा 16 में पद पर रहते हुए आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए किसी कार्य, बात या अभिव्यक्ति के संबंध में अदालतों में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही से संरक्षण का प्रावधान है।

इस प्रावधान को लेकर राजनीतिक बहस का मूल प्रश्न यही है कि चुनाव आयुक्तों को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए किस सीमा तक कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए और उनके निर्णयों के लिए जवाबदेही किस तरह सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाए। वहीं, इस मुद्दे पर किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कानून के वास्तविक प्रावधानों और उनके व्यावहारिक प्रभावों को देखना जरूरी है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता का सवाल

खड़गे ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए संवैधानिक ढांचे का पालन होना चाहिए और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा प्रतिष्ठा की रक्षा की जानी चाहिए। कांग्रेस की मांगों के केंद्र में चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही, EVM के इस्तेमाल और चुनावी तकनीक की पारदर्शिता जैसे मुद्दे हैं।

अब बहस इस बात पर है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन जरूरी है या व्यापक संस्थागत सुधार की आवश्यकता है। इन सवालों पर सरकार, विपक्ष और चुनाव आयोग का पक्ष लोकतांत्रिक विमर्श के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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