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कांग्रेस का बड़ा आरोप: यूपी की वोटर लिस्ट में एक EPIC नंबर पर दो अलग पहचानें!

सुप्रिया श्रीनेत ने पीलीभीत में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर से जुड़े नाम बदलने का दावा किया; SIR के बाद जुलाई से सितंबर तक हुए बदलावों पर चुनाव आयोग से जवाब की मांग

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | उत्तर प्रदेश | 22 अक्टूबर 2026

उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और जोड़े गए। कांग्रेस का दावा है कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर समान रखते हुए नाम बदल दिए गए।

अंतिम सूची के बाद भी कैसे बदले गए नाम?

कांग्रेस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को जारी हुई थी। पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 2 करोड़ 4 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि अंतिम सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया कैसे चली।

पार्टी का आरोप है कि इस अवधि में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की सामान्य प्रक्रिया के बिना बदलाव किए गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अवधि के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। आयोग की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर आधिकारिक जवाब उपलब्ध होने पर उसकी स्थिति भी सामने आनी चाहिए।

पीलीभीत में एक EPIC नंबर पर दो अलग पहचानें?

सुप्रिया श्रीनेत द्वारा साझा किए गए उदाहरण के अनुसार, एक मतदाता का नाम मोहम्मद युसुफ, पिता का नाम रसीतल, उम्र 33 वर्ष और लिंग पुरुष दर्ज था। लेकिन कांग्रेस का दावा है कि उसी EPIC नंबर को खोजने पर दूसरी पहचान दिखाई देती है।

दूसरे रिकॉर्ड में नाम हसरत, पिता का नाम रमजान अली, उम्र 33 वर्ष और लिंग पुरुष बताया गया है।

यदि एक ही EPIC नंबर पर वास्तव में दो अलग-अलग व्यक्तियों के नाम और पिता के नाम दर्ज हैं, तो यह गंभीर विसंगति होगी। इससे मतदाता पहचान रिकॉर्ड की शुद्धता, बदलाव की प्रक्रिया और डेटा की जांच व्यवस्था पर सवाल उठेंगे। हालांकि, इस उदाहरण की पुष्टि मूल मतदाता सूची और चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से होना आवश्यक है।

चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग

कांग्रेस के आरोपों ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज कर दी है। पार्टी के सवालों का जवाब देने के लिए चुनाव आयोग को संबंधित विधानसभा क्षेत्र के रिकॉर्ड, बदलावों की तारीख, संशोधन का आधार और लागू प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए।

यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव हुआ, उन्हें इसकी सूचना दी गई या नहीं और किसी गलती की शिकायत होने पर उसे ठीक कराने का क्या रास्ता उपलब्ध है।

मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि एक ही EPIC नंबर पर अलग-अलग पहचानें दर्ज होने का दावा सही पाया जाता है, तो इसकी निष्पक्ष जांच और समयबद्ध सुधार जरूरी होगा। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल सूची जारी करना नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना भी है।

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