राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वडोदरा | 21 अक्टूबर 2026
विवादित जमीन का हिस्सा मुफ्त देने का प्रस्ताव
गुजरात सरकार ने पूर्व क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में लंबे समय से विवादित नगर निगम की जमीन का एक हिस्सा देने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के तहत 500 वर्गमीटर जमीन मुफ्त देने और शेष जमीन रियायती दर पर आवंटित करने की योजना है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब यूसुफ पठान के तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति चर्चा में है। वडोदरा नगर निगम आयुक्त की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव पर 23 अक्टूबर को भाजपा शासित नगर निकाय की स्थायी समिति में अंतिम मंजूरी के लिए विचार किया जाएगा।
नगर निगम की बैठक के एजेंडे में इस प्रस्ताव को शामिल किए जाने की जानकारी सोमवार, 19 अक्टूबर को सामने आई।
लंबे समय से विवादों में रही है जमीन
वडोदरा में जिस नगर निगम की जमीन को लेकर प्रस्ताव लाया गया है, वह लंबे समय से विवादित रही है। अब इसके एक हिस्से को मुफ्त और शेष को रियायती दर पर यूसुफ पठान को देने की योजना ने जमीन के आवंटन की प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जमीन के कुल क्षेत्रफल, उसके बाजार मूल्य, रियायती दर या विवाद की पूरी पृष्ठभूमि का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए प्रस्ताव के वित्तीय प्रभाव और जमीन आवंटन की शर्तों का आकलन विस्तृत दस्तावेज सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
फिलहाल यह एक प्रस्ताव है। इसे अंतिम मंजूरी मिलने से पहले नगर निगम की स्थायी समिति के समक्ष रखा जाना है।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आया प्रस्ताव
यूसुफ पठान के राजनीतिक घटनाक्रम ने भी इस प्रस्ताव को चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग चार महीने पहले वह तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले खेमे से अलग हुए थे। वह बागी TMC समूह का हिस्सा बने और बाद में इस समूह का नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (इंडिया) यानी NCPI में विलय हुआ, जिसके बाद समूह भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हुआ।
इस राजनीतिक बदलाव के बाद गुजरात सरकार की ओर से जमीन आवंटन का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी यह साबित नहीं करती कि प्रस्ताव और यूसुफ पठान के राजनीतिक कदमों के बीच कोई सीधा संबंध है।
23 अक्टूबर को होगा प्रस्ताव पर विचार
वडोदरा नगर निगम आयुक्त की ओर से पेश प्रस्ताव पर 23 अक्टूबर को स्थायी समिति में विचार किया जाना है। यह समिति भाजपा शासित नगर निकाय का हिस्सा है और प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में प्रस्ताव के समर्थन या विरोध में क्या निर्णय लिया जाता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति जमीन के आवंटन की शर्तों, मुफ्त दिए जाने वाले हिस्से और शेष जमीन की रियायती कीमत पर क्या रुख अपनाती है।
पारदर्शिता और शर्तों पर रहेगी नजर
नगर निगम की जमीन के आवंटन से जुड़े मामलों में प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण और पात्रता की शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं। यूसुफ पठान को 500 वर्गमीटर जमीन मुफ्त देने और बाकी रियायती दर पर आवंटित करने के प्रस्ताव पर भी इन पहलुओं को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
प्रस्ताव की अंतिम मंजूरी और उसकी शर्तें सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन किस आधार पर आवंटित की जाएगी और नगर निगम को इससे जुड़ी वित्तीय शर्तों का क्या प्रभाव पड़ेगा।
फिलहाल गुजरात सरकार का प्रस्ताव स्थायी समिति के विचाराधीन है। 23 अक्टूबर की बैठक इस मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी।


