राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026
दशहरे के मंच पर सियासत, पुतलों के जरिए विरोध
दिल्ली में मंगलवार को दशहरे का पर्व राजनीतिक विरोध का मंच बन गया। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण दहन के बीच प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। पारंपरिक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ इस बार 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी चर्चा का केंद्र बना।
राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। इसी माहौल में छात्र संगठनों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने दशहरे के प्रतीकवाद का इस्तेमाल करते हुए अपने विरोध को सार्वजनिक रूप दिया।
प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जोड़ते हुए उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ नाराजगी जताई, जिन्हें वे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के लिए जिम्मेदार मानते हैं।
रावण के पुतले पर राजनीतिक चेहरों के पोस्टर
दिल्ली में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान रावण के पुतले पर देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों के पोस्टर लगाए गए। मंगलवार को हुए इस प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे वाला पोस्टर भी दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुतला दहन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
दशहरे पर रावण दहन आम तौर पर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में आयोजित किया जाता है। इस बार प्रदर्शनकारियों ने इसी परंपरा को राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल किया। उनके लिए पुतला दहन केवल उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करने का माध्यम भी बना।
SIR और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ जारी है विरोध
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही ‘वोट चोरी’ के आरोपों और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग इस विरोध का प्रमुख हिस्सा बन गई है। छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने इस मुद्दे को राजधानी में लगातार चर्चा में बनाए रखा है।
हालांकि, SIR और वोट चोरी से जुड़े आरोपों पर अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं। इन आरोपों और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सवालों का अंतिम आकलन तथ्यों तथा संबंधित संस्थाओं के जवाबों के आधार पर ही किया जा सकता है।
30 फुट का कॉकरोच बना चर्चा का केंद्र
इस बार दिल्ली के दशहरे में 30 फुट ऊंचे कॉकरोच के पुतले ने भी खास ध्यान खींचा। पारंपरिक राक्षसों के साथ इस विशाल पुतले को शामिल करना विरोध की प्रतीकात्मक राजनीति का हिस्सा था।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पहले भी अपने नाम और कॉकरोच के प्रतीक के कारण चर्चा में रही है। दिल्ली के दशहरे में विशाल कॉकरोच का पुतला शामिल होना इस राजनीतिक माहौल को और अधिक असामान्य बनाता है।
रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद जैसे पारंपरिक पुतलों के बीच कॉकरोच का शामिल होना इस बात का संकेत था कि आयोजकों ने धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन को समकालीन राजनीतिक विरोध से जोड़ने का प्रयास किया।
त्योहार के प्रतीकवाद से लोकतांत्रिक सवालों तक
दशहरा भारतीय परंपरा में अन्याय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने इसी संदेश को अपने राजनीतिक विरोध से जोड़ा। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सार्वजनिक जवाबदेही जरूरी है।
इस तरह राजधानी में दशहरा केवल पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि SIR, वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर जारी बहस का एक और मंच बन गया।
दिल्ली में इन मुद्दों पर विरोध आगे किस दिशा में बढ़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल दशहरे के दौरान हुए पुतला दहन ने दिखाया कि चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस राजधानी के सार्वजनिक जीवन में प्रमुख स्थान बनाए हुए है।


