राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 सितंबर 2026
दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR के बाद सामने आए आंकड़ों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 24 सीटों पर मौजूदा ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं की संख्या फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में वास्तव में वोट डालने वाले मतदाताओं से भी कम हो गई है। यानी इन विधानसभा क्षेत्रों में अब जितने मतदाता ड्राफ्ट रोल में दिखाई दे रहे हैं, उससे अधिक लोगों ने पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। यह स्थिति दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में एक-तिहाई से अधिक सीटों में सामने आई है और इसी वजह से SIR के दौरान हुई मतदाता विलोपन प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।
आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 में दिल्ली की इन 24 विधानसभा सीटों पर कुल करीब 49.1 लाख मतदाता पंजीकृत थे। विधानसभा चुनाव में इनमें से लगभग 28.9 लाख लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, यानी इन सीटों पर मतदान प्रतिशत करीब 58.9% रहा था। लेकिन SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद अब इन 24 विधानसभा क्षेत्रों के ड्राफ्ट मतदाता रोल में केवल करीब 27.7 लाख मतदाता बचे हैं। इसका अर्थ है कि मौजूदा ड्राफ्ट सूची में दर्ज मतदाताओं की संख्या उन लोगों से करीब 1.23 लाख कम है, जिन्होंने फरवरी 2025 के चुनाव में वास्तव में वोट डाला था।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में किसी नाम का होना और चुनाव में उसका मतदान करना दो अलग-अलग बातें हैं। कोई मतदाता पंजीकृत होने के बावजूद चुनाव में वोट नहीं डाल सकता। इसके बावजूद जब किसी विधानसभा क्षेत्र की संशोधित मतदाता सूची में कुल मतदाता ही पिछले चुनाव में पड़े कुल वोट से कम हो जाएं, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि हटाए गए नामों की जांच किस प्रक्रिया के तहत हुई और कितने नाम वास्तविक मतदाताओं के थे। यही वजह है कि SIR के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और मतदाताओं को अपना नाम बरकरार रखने के लिए दिए गए अवसर को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों की चिंता सामने आई है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या एक से अधिक जगह दर्ज मतदाताओं जैसे मामलों की पहचान करना है। इसके तहत Booth Level Officers यानी BLO घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित जानकारी और दस्तावेज जुटा रहे हैं। दिल्ली में भी इसी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नामों की समीक्षा और विलोपन किया गया। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग पर विपक्ष की चिंताओं का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है।
दिल्ली के मामले में सबसे बड़ा सवाल उन 24 विधानसभा क्षेत्रों को लेकर है जहां यह अंतर दिखाई दे रहा है। अगर 2025 में 28.9 लाख लोगों ने मतदान किया था और अब ड्राफ्ट रोल में 27.7 लाख मतदाता हैं, तो चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासन के लिए यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि इन करीब 1.23 लाख मतदाताओं का क्या हुआ। क्या इनमें से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली से स्थायी रूप से बाहर चले गए? क्या कुछ मतदाताओं के नाम दो जगह दर्ज थे? क्या मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए? या फिर ऐसे मतदाताओं के नाम भी हटे हैं जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान किया था? इन सवालों के जवाब अंतिम मतदाता सूची और आयोग की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
मामला अब अदालत तक भी पहुंच चुका है। दिल्ली SIR के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है। इससे यह मुद्दा केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मतदाता सूची की प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान अधिकार से जुड़े कानूनी सवाल भी न्यायिक जांच के दायरे में आ गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी ये ड्राफ्ट रोल हैं। अंतिम मतदाता सूची में बदलाव संभव है और जिन लोगों के नाम हटे हैं, उनके लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए इन आंकड़ों को अंतिम रूप से मतदाताओं के नुकसान का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन 24 विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा ड्राफ्ट मतदाता संख्या का पिछले चुनाव में वास्तविक मतदान से नीचे चले जाना एक ऐसा आंकड़ा जरूर है, जिसकी सार्वजनिक और पारदर्शी व्याख्या जरूरी है।
लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ मतदान के दिन नहीं होता—उसकी पहली और सबसे अहम कड़ी मतदाता सूची होती है। इसलिए सवाल अब यही है कि SIR के बाद हटाए गए नामों में कितने नाम वास्तव में अपात्र थे और कितने ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने 2025 में वोट डाला था लेकिन आज ड्राफ्ट सूची में उनका नाम नहीं है।



