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यमन में हूतियों का बड़ा कब्जा: रणनीतिक मोखा बंदरगाह हाथ में, लाल सागर से सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव

ABC NATIONAL NEWS | यमन | 12 सितंबर 2026

 

मोखा पर हूतियों का कब्जा, बाब-अल-मंदब बेहद करीब

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक लाल सागर बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने का दावा किया है। बीबीसी के मुताबिक, सैन्य सूत्रों और स्थानीय लोगों ने भी हूतियों के शहर में पहुंचने की पुष्टि की है। मोखा पर नियंत्रण का दावा इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बंदरगाह बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य से सिर्फ करीब 75 किलोमीटर दूर है। यही जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया तथा यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम रास्ता है। अगर मोखा में हूतियों का नियंत्रण मजबूत होता है, तो लाल सागर की सुरक्षा, तेल की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।

शहर में घुसते ही मची अफरा-तफरी, परिवार घर छोड़कर भागे

स्थानीय लोगों के अनुसार, बुधवार रात सरकारी समर्थक बलों और हूतियों के बीच भारी लड़ाई हुई। इसके बाद हूती लड़ाके शहर में दाखिल हुए और सड़कों पर गश्त करते दिखाई दिए। कई सरकारी दफ्तर और दुकानें बंद हो गईं। बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों को लेकर शहर से बाहर निकलने लगे। कुछ विस्थापित परिवार अदन की ओर जा रहे हैं, जहां यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद का मुख्यालय है। एक महिला ने बीबीसी को बताया कि परिवारों के पास घर, बिस्तर और जरूरी सामान तक नहीं बचा। हालांकि, हूतियों ने तत्काल सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि उन्होंने मोखा पर कब्जा कर लिया है। उनके राजनीतिक परिषद ने केवल इतना कहा कि पश्चिमी तटीय इलाकों में लड़ाई रुक गई है और सऊदी समर्थित बलों को पीछे हटाया गया है।

क्या अब लाल सागर की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है?

मोखा पर नियंत्रण की खबर ऐसे समय आई है जब हूती और सऊदी अरब के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में हूतियों ने दक्षिणी सऊदी शहरों और तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। सऊदी अधिकारियों के अनुसार मंगलवार के हमलों में 73 नागरिक घायल हुए और कई तेल प्रतिष्ठानों में आग लगी, जिसके कारण कुछ समय के लिए उनका काम प्रभावित हुआ। इसके जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हूती नियंत्रण वाले इलाकों में हवाई हमले किए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में पश्चिमी यमन के कई प्रांतों में सऊदी विमानों ने 64 हमले किए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तेल और दुनिया के कारोबार पर सीधा असर

सबसे बड़ा सवाल अब समुद्री व्यापार और तेल का है। बाब-अल-मंदब एशिया और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ऊर्जा बाजार दबाव में है। ऐसे में लाल सागर के इस रास्ते पर भी खतरा बढ़ता है तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत, बीमा खर्च और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। बीबीसी के अनुसार, यमन में बढ़ती लड़ाई ने पहले ही तेल की कीमतों में तेजी में योगदान दिया है। ऐसे में सवाल सिर्फ यमन का नहीं है—क्या लाल सागर और बाब-अल-मंदब पर बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है?

हूती बोले—अंतरराष्ट्रीय जहाजों को खतरा नहीं, लेकिन सऊदी जहाजों पर रोक जारी

हूतियों ने कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा नहीं हैं और लाल सागर में नौवहन सुरक्षित रहेगा। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया है कि सऊदी जहाजों के खिलाफ उनकी समुद्री पाबंदी जारी रहेगी। यही विरोधाभास चिंता बढ़ा रहा है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रखने का दावा और दूसरी तरफ सऊदी जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी—ऐसे में दूसरे देशों के व्यापारिक जहाज इस इलाके से गुजरने का जोखिम कैसे तय करेंगे?

एक दशक से जारी युद्ध फिर खतरनाक मोड़ पर

सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन पिछले एक दशक से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में हूतियों से लड़ रहा है। करीब चार साल से चल रहा अनौपचारिक युद्धविराम जुलाई में कमजोर पड़ने लगा, जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ “समुद्री पाबंदी” की घोषणा की और मिसाइल तथा ड्रोन हमले शुरू किए। अब मोखा जैसे रणनीतिक इलाके पर हूतियों की बढ़त ने संघर्ष को एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में पहुंचा दिया है। अगर लड़ाई मोखा से आगे बढ़ती है और बाब-अल-मंदब तक दबाव पहुंचता है, तो क्या लाल सागर का संकट वैश्विक व्यापार और तेल बाजार के लिए अगली बड़ी चुनौती बनने जा रहा है?

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