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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का बड़ा दांव! अब रूस से आएंगे 5 और एस-400, चीन की आसमानी चुनौती के सामने मजबूत होगा कवच

रूस ने कीमत का प्रस्ताव भेजा, अब शुरू होगी सौदेबाजी; एक नया एस-400 चीन की तरफ पूर्वी मोर्चे पर तैनात करने की तैयारी

राष्ट्रीय | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 सितंबर 2026

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस हथियार ने भारत की हवाई सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी, अब उसी एस-400 पर भारत और बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। रूस ने भारत को पांच और एस-400 वायु रक्षा प्रणालियां देने के लिए कीमत और निर्माण से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव भेज दिया है। अब दोनों देशों के बीच कीमत को लेकर बातचीत होगी। कीमत तय होने के बाद वित्त मंत्रालय की मंजूरी और फिर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की अंतिम हरी झंडी जरूरी होगी। यानी सौदा अभी अंतिम रूप से मंजूर नहीं हुआ है, लेकिन इसकी गाड़ी आगे बढ़ चुकी है।

जिसकी वजह से दुश्मन के विमान सीमा के करीब आने से पहले ही सतर्क हो जाएं

एस-400 की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता है। आसान भाषा में समझें तो यह भारत के आसमान के लिए एक ऐसा सुरक्षा कवच है, जो काफी दूर से आने वाले हवाई खतरों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए बनाया गया है। आधुनिक युद्ध में खतरा सिर्फ लड़ाकू विमानों से नहीं आता। ड्रोन, क्रूज मिसाइल और दूसरी हवाई प्रणालियां भी किसी देश के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में एस-400 जैसी लंबी दूरी की प्रणाली भारत की कई परतों वाली वायु रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऑपरेशन सिंदूर ने बढ़ाया भरोसा

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के दौरान एस-400 की भूमिका को लेकर खूब चर्चा हुई। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पक्ष के आकलन में एस-400 ने पाकिस्तान की हवाई गतिविधियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि एस-400 की एक लंबी दूरी की मिसाइल ने पाकिस्तान के भीतर करीब 314 किलोमीटर दूर एक हवाई चेतावनी विमान को निशाना बनाया।

पाकिस्तान की ओर से भारतीय एस-400 प्रणालियों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाने की कोशिशों की भी रिपोर्ट सामने आई थी। लेकिन भारतीय वायु रक्षा व्यवस्था ने इन खतरों से निपटने में भूमिका निभाई। युद्ध के दौरान अलग-अलग पक्षों के सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती, इसलिए इन आंकड़ों को संबंधित रिपोर्ट और भारतीय पक्ष के दावों के संदर्भ में देखना चाहिए। लेकिन इतना जरूर है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद एस-400 की उपयोगिता पर भारत का भरोसा और मजबूत दिखाई देता है।

अब पांच और एस-400 क्यों?

भारत ने 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर का पांच एस-400 सिस्टम का सौदा किया था। उस सौदे की पांचवीं और आखिरी प्रणाली के नवंबर 2026 में भारत पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन दुनिया का सुरक्षा माहौल तेजी से बदल रहा है। चीन अपनी हवाई और मिसाइल क्षमता बढ़ा रहा है और भारत को एक साथ पश्चिमी तथा उत्तरी सीमाओं पर नजर रखनी है।

इसीलिए पांच और एस-400 लेने की तैयारी को सिर्फ पुराने सौदे का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की लंबी अवधि की हवाई सुरक्षा योजना के रूप में देखा जा सकता है।

चीन के जे-20 के सामने भारत की तैयारी

भारत की चिंता का एक बड़ा कारण चीन का जे-20 पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान भी है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने तिब्बत के होतान, ल्हासा और न्यिंगची जैसे इलाकों में अपनी हवाई क्षमता को मजबूत किया है। ये इलाके भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे में भारत का संदेश साफ है—अगर सीमा के दूसरी तरफ अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और मिसाइलें बढ़ रही हैं, तो भारत भी अपनी जमीन और आसमान की सुरक्षा को कमजोर नहीं छोड़ सकता। नए एस-400 सिस्टम में से एक को चीन की दिशा में पूर्वी क्षेत्र में तैनात करने की योजना बताई गई है।

दिलचस्प बात—एसयू-57 पर अभी फैसला नहीं

एस-400 के साथ रूस के एसयू-57 लड़ाकू विमान को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अभी दो स्क्वाड्रन एसयू-57 खरीदने का अंतिम फैसला नहीं किया है। भारतीय वायुसेना ने रूस के प्रस्ताव में रुचि जरूर दिखाई है, लेकिन रुचि और खरीद की मंजूरी एक बात नहीं है।

इसलिए फिलहाल सबसे पक्की प्रगति एस-400 के मामले में है, जहां रूस कीमत का विस्तृत प्रस्ताव भारत को भेज चुका है।

पुतिन के दिल्ली दौरे पर भी रहेगी नजर

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 से 13 सितंबर के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली आने की उम्मीद है। ऐसे में भारत-रूस रक्षा संबंधों पर भी दुनिया की नजर रहेगी। एस-400 के अलावा दोनों देशों के बीच मिसाइल और दूसरी रक्षा तकनीकों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होती रही है।

भारत एक तरफ रूस के साथ पुराने रक्षा संबंधों को बनाए रख रहा है, वहीं अमेरिका, फ्रांस और दूसरे देशों के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। यानी भारत की रणनीति किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग साझेदारों के साथ अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने की है।

अब नजर सौदे की कीमत पर

पांच नए एस-400 का रास्ता खुल चुका है, लेकिन अभी कई सीढ़ियां बाकी हैं। पहले रूस और भारत के बीच कीमत तय होगी, फिर वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलेगी और उसके बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति अंतिम फैसला करेगी।

लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि भारत अब सिर्फ सीमा पर सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ा रहा, बल्कि आसमान को सुरक्षित रखने की क्षमता भी लगातार मजबूत कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव और चीन की बढ़ती हवाई ताकत के बीच पांच और एस-400 की तैयारी बताती है कि आने वाले समय में भारत का सबसे बड़ा जोर सिर्फ हमला करने की क्षमता पर नहीं, बल्कि दुश्मन के हमले को आसमान में ही रोक देने की क्षमता पर भी होगा।

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