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युवाओं के बीच बढ़ते जनाधार से सरकार में हड़कंप, झेंप मिटाने के लिए बीजेपी ने राहुल के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पॉलिटिकल कॉमेडी बताया

राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | पुणे/ मुंबई/ नई दिल्ली | 23 अगस्त 2026

पुणे में शनिवार 22 अगस्त 2026 को आयोजित लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में जोरदार हलचल मचा दी है। महिलाओं और छात्राओं पर विशेष रूप से केंद्रित इस चौथे संस्करण में भारी संख्या में युवा लड़कियों की उपस्थिति ने कांग्रेस को आत्मविश्वास दिया तो भाजपा को चिंतित कर दिया। रविवार को दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी हुई। भाजपा ने इसे “राजनीतिक कॉमेडी शो” करार दिया, जबकि कांग्रेस ने साफ कहा कि राहुल गांधी के युवाओं में बढ़ते जनाधार से सत्ताधारी दल नींद हराम कर बैठा है।

‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत राहुल गांधी ने जून 2026 में राजस्थान के कोटा से की थी। इसके बाद देहरादून और प्रयागराज में कार्यक्रम हुए। पुणे संस्करण को विशेष रूप से युवा महिलाओं के लिए समर्पित किया गया। कार्यक्रम एआईएसएसएमएस (एसएसपीएमएस) कॉलेज ग्राउंड पर शाम 4:30 से रात 9:30 बजे तक चला। पुलिस ने अनुमति तो दे दी, लेकिन 30 सख्त शर्तें लगाईं। इनमें आपत्तिजनक बैनर-पोस्टर पर रोक, ड्रोन कैमरे का पूर्ण प्रतिबंध, तेज बीम लाइट्स का इस्तेमाल न करना, महिलाओं की फ्रिस्किंग सिर्फ महिला सुरक्षाकर्मियों द्वारा कराना और धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करना शामिल था। पुलिस का अनुमान 8,000 से 10,000 लोगों का था, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि लाखों की संख्या में लड़कियां और महिलाएं पहुंचीं। कई रिपोर्टों में भी कार्यक्रम में महिलाओं की भारी उपस्थिति दर्ज की गई।

कार्यक्रम से पहले भी विवाद रहा। सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी हॉस्टल में एबीवीपी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्राओं को जबरन रजिस्टर करवा रही है, जबकि कांग्रेस ने कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने छात्राओं को धमकाया और रोका। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और सत्ताधारी दल कार्यक्रम को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे। मेट्रो सेवाओं पर असर और अन्य प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने कहा कि बावजूद इसके युवा महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंचीं।

राहुल गांधी ने पीले शर्ट में मंच संभाला। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी 70 करोड़ महिलाएं हैं—उनकी अनूठी यात्राएं, कल्पना और सपने।” उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा तक पहुंच, पेपर लीक, बेरोजगारी, साइबर उत्पीड़न और आर्थिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर छात्राओं से खुलकर संवाद किया। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वे महिलाओं को “पिंजरे” में बंद करना चाहते हैं। राहुल ने कहा कि हिंसा, अपमान और चिंता के रूप में छिपा नियंत्रण महिलाओं पर अत्याचार का औजार बन जाता है। आदिवासी छात्राओं की समस्याओं पर भी उन्होंने ध्यान दिया और उनके साथ बैठने की पेशकश की।

रविवार को भाजपा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने हमला बोला। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी का पुणे कार्यक्रम एक और राजनीतिक कॉमेडी शो था। इसमें बड़ी-बड़ी बातें और पुराने आरोप तो थे, लेकिन छात्रों के वास्तविक मुद्दों पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई।” उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को कॉलेज बसों में लाया गया और कार्यक्रम को छात्रों के नाम पर राजनीतिक सभा बना दिया गया। उपाध्ये ने कांग्रेस के अपने पिछले रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए विरोधाभास का दावा भी किया।

कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव सचिन सावंत ने जवाब देते हुए कहा, “मेट्रो बंद करने, कई प्रतिबंध लगाने और गुंडागर्दी के बावजूद बड़ी संख्या में युवा महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। इससे भाजपा हिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नींद उड़ गई लगती है। लेकिन यह डर अच्छा है।” पवन खेड़ा ने कहा कि ‘गूंज’ दिल्ली तक पहुंच गई है और राजधानी में घबराहट साफ दिख रही है।

कांग्रेस का तर्क है कि युवाओं, खासकर महिलाओं, के बीच राहुल गांधी का आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। भाजपा इसे “पैसा देकर भीड़ जुटाने” और प्रभावशाली लोगों को भुगतान करने का आरोप लगाती रही है, लेकिन कांग्रेस इसे स्वैच्छिक और स्वाभाविक समर्थन बताती है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले भी इस कार्यक्रम को “मोनोलॉग” करार दिया था।

यह कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्र की अनियमितताओं, पेपर लीक, बढ़ती फीस और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा में लाने का कांग्रेस का प्रयास है। दोनों दलों के तीखे आरोप-प्रत्यारोप से साफ है कि युवा और महिला वोटरों को साधने की होड़ अब और तेज हो गई है। ‘छात्रों की गूंज’ अब सिर्फ छात्र संवाद नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक संदेश और युवाओं के बीच बढ़ते प्रभाव का प्रतीक बन चुका है।

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