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राहुल गांधी की ललकार ने मोदी-शाह सरकार की नींद उड़ा दी — झूठ, घोटाले और दमन के खिलाफ युवाओं की आवाज

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026

राहुल गांधी आज भारतीय राजनीति में उस विपक्षी नेता की भूमिका निभा रहे हैं जो सत्ता के सामने झुकने से इनकार करता है। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने और विपक्ष ने नरेंद्र मोदी-अमित शाह सरकार के कई बड़े दावों और विफलताओं को बेनकाब किया है। संसद में 20 दिनों तक प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का न आना, राम मंदिर दान घोटाला, NEET पेपर लीक, ऑपरेशन सिंदूर में सैनिकों की शहादत को छिपाने का आरोप और छात्रों पर लाठी-गोली—ये सब मुद्दे अब सरकार की पोल खोल रहे हैं।

राहुल गांधी ने साफ कहा कि जब तक मोदी और शाह इस्तीफा नहीं देते, तब तक उन्हें चैन से सोने नहीं दिया जाएगा। यह कोई व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक राजनीतिक ललकार है। संसद का मानसून सत्र लगभग ध्वस्त रहा। विपक्ष ने बार-बार राम मंदिर चंदा चोरी, NEET घोटाले और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई की चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार बहस से भागती रही। आखिरकार आखिरी दिन मोदी और शाह सदन में आए, वंदे मातरम गाया गया और सत्र खत्म कर दिया गया। यह “चाणक्य” कहे जाने वाले अमित शाह की चुप्पी और प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का सबसे बड़ा प्रमाण है।

ऑपरेशन सिंदूर का मामला और भी गंभीर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में दावा किया था कि “हमारे किसी भी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा”। एक साल बाद सरकार ने खुद छह शहीद सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित किए। कांग्रेस और विपक्ष ने इसे संसद में झूठ बोलना बताया। सरकार का जवाब “संदर्भ” और “अफवाह” का रहा, लेकिन सवाल बना रहा—अगर शहीद हुए तो पहले क्यों छिपाया गया? अब राहुल गांधी के लगातार हमलों से खुद राजनाथ सिंह भी बेचैन हो गए हैं। वे राहुल गांधी के बयानों को “अत्यंत निम्न स्तर का और निंदनीय” बताते हुए हमलावर हो गए हैं। यह साफ संकेत है कि विपक्ष का दबाव अब रक्षा मंत्री तक पहुंच चुका है।

राम मंदिर दान पेटी से चोरी का मामला भी सत्ता की नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है। विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर से सैकड़ों करोड़ रुपये की चोरी हुई। SIT ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया, करीब 80 लाख रुपये बरामद हुए और ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया। विपक्ष इसे सिर्फ छोटी चोरी नहीं, बल्कि मंदिर के नाम पर जनता के विश्वास और श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ बड़े पैमाने पर खिलवाड़ बता रहा है।

NEET पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया। CBI जांच में NTA के विषय विशेषज्ञों तक की संलिप्तता सामने आई। परीक्षा रद्द हुई, शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। Gen Z और Gen Alpha ने सड़कों पर उतरकर सरकार की नींद हराम कर दी। लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन जैसे मामलों ने युवाओं में गुस्सा और बढ़ाया।

राहुल गांधी लगातार इन्हीं मुद्दों पर हमलावर हैं। उन्होंने सरकार की विदेश नीति को “हगिंग” तक सीमित बताया और RSS-BJP को व्यवस्था थोपने वाली ताकत बताया। BJP मंत्री इसे “निम्न स्तर” और “अशोभनीय” कह रहे हैं। लेकिन विपक्ष का तर्क साफ है—सत्ता जब जवाबदेही से भागती है, तो विपक्ष की जिम्मेदारी सवाल पूछना है।

आज राहुल गांधी और विपक्ष सरकार को घेरने में सफल दिख रहे हैं क्योंकि मुद्दे वास्तविक हैं—झूठ, घोटाले, छात्रों का भविष्य और संसदीय जवाबदेही का अभाव। युवाओं की आवाज और विपक्ष की लगातार ललकार ने सत्ता को असहज किया है। लोकतंत्र में यही विपक्ष की भूमिका है—सत्ता को आईना दिखाना, चाहे सत्ता कितनी भी नाराज क्यों न हो।

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