राष्ट्रीय/विमानन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 अगस्त 2026
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान AI 2379 में 4 अगस्त को हुई घटना को लेकर नई और गंभीर जानकारी सामने आई है। शुरुआती तौर पर विमान के अचानक नीचे आने की वजह टर्बुलेंस बताई गई थी, लेकिन अब सामने आई तकनीकी जानकारी के मुताबिक विमान को करीब 300 फीट की ऊंचाई का नुकसान होने से पहले उसके हाइड्रोलिक और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में कई गड़बड़ियां एक साथ सामने आई थीं। इस घटना में विमान में सवार 17 लोग घायल हुए थे।
घटना ने विमान की तकनीकी सुरक्षा और उड़ान के दौरान सामने आने वाली सिस्टम फेल्योर की स्थिति से निपटने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयर इंडिया ने इस मामले में विमान निर्माता कंपनी एयरबस से भी संपर्क किया है।
करीब ढाई घंटे बाद अचानक शुरू हुई तकनीकी गड़बड़ियां
एयर इंडिया का यह Airbus A320neo विमान 4 अगस्त को सुबह 6:56 बजे फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के करीब ढाई घंटे बाद, सुबह लगभग 9:32 बजे IST, विमान के सिस्टम में एक के बाद एक कई तकनीकी समस्याएं दर्ज होने की बात सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक करीब एक मिनट के भीतर नौ तकनीकी गड़बड़ियों का सिलसिला सामने आया। इनमें ऑटोपायलट का डिस्कनेक्ट होना, हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी खराबियां और विमान की नाक को ऊपर-नीचे नियंत्रित करने वाले फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम से संबंधित फॉल्ट शामिल बताए जा रहे हैं।
यही वह हिस्सा है जो इस घटना को सामान्य टर्बुलेंस से अलग बनाता है।
विमान की ऊंचाई में अचानक आई गिरावट
तकनीकी समस्याओं के बीच विमान को कुछ समय के लिए ऊंचाई का नुकसान हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक विमान करीब 300 फीट नीचे चला गया। अचानक हुए इस बदलाव के कारण विमान में सवार यात्रियों और क्रू के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बनी और 17 लोगों को चोटें आईं।
हालांकि घटना के बाद विमान ने अपनी उड़ान जारी रखी और दिल्ली में सुरक्षित उतर गया। किसी बड़े हादसे में तब्दील न होना राहत की बात रही।
शुरुआती बयान पर उठे सवाल
घटना के तुरंत बाद इसे टर्बुलेंस से जोड़कर देखा गया था। लेकिन अब सामने आई तकनीकी जानकारी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या विमान के नीचे आने की वास्तविक वजह केवल मौसम या टर्बुलेंस थी।
यदि फ्लाइट-कंट्रोल और हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ कई गड़बड़ियां हुई थीं, तो इसकी विस्तृत तकनीकी जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, अंतिम कारण आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे निश्चित रूप से किसी एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।
एयर इंडिया और एयरबस के सामने बड़ी जिम्मेदारी
इस घटना के बाद एयर इंडिया द्वारा एयरबस को जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। विमान के तकनीकी डेटा, कॉकपिट रिकॉर्ड, सिस्टम अलर्ट और रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड की जांच यह समझने में मदद कर सकती है कि एक साथ इतनी गड़बड़ियां क्यों सामने आईं।
विमानन सुरक्षा में एक छोटी तकनीकी समस्या भी गंभीर हो सकती है, लेकिन कई प्रणालियों में एक साथ फॉल्ट सामने आने पर उसकी जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर तब, जब इसका सीधा असर विमान की ऊंचाई और दिशा नियंत्रित करने वाली प्रणालियों पर पड़ा हो।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
इस घटना का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया और कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। एयरलाइन और संबंधित एजेंसियों के लिए यह घटना विमानन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का अवसर भी है।
लेकिन दूसरी तरफ, 17 यात्रियों का घायल होना और विमान का अचानक लगभग 300 फीट नीचे आना गंभीर चेतावनी है। इसलिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि विमान सुरक्षित उतर गया। जरूरी है कि तकनीकी गड़बड़ियों की जड़ तक पहुंचा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
अब निगाह आधिकारिक जांच के निष्कर्षों पर है। अगर जांच में हाइड्रोलिक या फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम की खराबी की पुष्टि होती है, तो एयर इंडिया और एयरबस दोनों के लिए इसके कारणों, रखरखाव और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर स्पष्ट जवाब देना जरूरी होगा।




