Home » International » गाजा शांति योजना पर नेतन्याहू का ट्रंप को झटका, 15 सूत्री अमेरिकी प्रस्ताव ठुकराया

गाजा शांति योजना पर नेतन्याहू का ट्रंप को झटका, 15 सूत्री अमेरिकी प्रस्ताव ठुकराया

इजरायली PM बोले—‘हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण तक IDF गाजा से नहीं हटेगी’; ट्रंप के क्षेत्र में शांति प्रयासों पर बढ़ा दबाव

अंतरराष्ट्रीय/पश्चिम एशिया/इजरायल-गाजा | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 10 अगस्त 2026

गाजा में युद्ध खत्म करने की अमेरिकी कोशिशों को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा झटका दिया है। नेतन्याहू ने अमेरिका समर्थित 15 सूत्री गाजा शांति योजना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं होता, तब तक इजरायली सेना यानी IDF गाजा से पीछे नहीं हटेगी। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेदों को सार्वजनिक तौर पर सामने लाता है।

‘हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण तक वापसी नहीं’

नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इजरायल 15 सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना था कि हमास का केवल औपचारिक या सीमित निरस्त्रीकरण पर्याप्त नहीं होगा। इजरायल भारी हथियारों से लेकर हल्के हथियारों तक पूरी तरह निरस्त्रीकरण चाहता है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन गाजा से इजरायली सेना की वापसी को हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण से जोड़ दिया गया है।

ट्रंप की योजना में क्या था?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने जुलाई में 15 सूत्री योजना पेश की थी। योजना के तहत हमास के निरस्त्रीकरण के बदले गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और आगे चलकर सत्ता एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्रीय समिति को सौंपने का प्रस्ताव था।

ट्रंप की योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना था। लेकिन नेतन्याहू का कहना है कि पहले हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण होना चाहिए और उसके बाद ही इजरायली सेना की वापसी पर आगे बढ़ा जा सकता है।

यही अंतर अब अमेरिकी योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में खुला मतभेद

नेतन्याहू की सार्वजनिक असहमति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से इजरायल का प्रमुख सहयोगी रहा है। लेकिन इस बार गाजा, लेबनान और ईरान में जारी संघर्षों को लेकर ट्रंप प्रशासन और इजरायली सरकार की प्राथमिकताओं में अंतर खुलकर सामने आ रहा है।

नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी फैसले खुद लेने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर वह अपने करीबी मित्रों के दबाव का भी सामना कर सकता है।

नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी

नेतन्याहू का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब इजरायल में अक्टूबर में चुनाव होने हैं और उनकी सरकार के भीतर कट्टरपंथी धड़े उन पर युद्ध को लेकर कड़ा रुख बनाए रखने का दबाव डाल रहे हैं।

ऐसे में हमास के खिलाफ सख्त रुख नेतन्याहू की घरेलू राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। वह खुद को इजरायल की सुरक्षा से समझौता न करने वाले नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं।

ट्रंप के लिए भी बढ़ी मुश्किल

नेतन्याहू के प्रस्ताव ठुकराने से ट्रंप के सामने भी बड़ी राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति खुद को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराने वाले नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं।

गाजा में युद्ध समाप्त कराने में सफलता उन्हें बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि दे सकती है। लेकिन इजरायल के समर्थन के बिना अमेरिकी योजना का लागू होना बेहद मुश्किल होगा।

इसके अलावा ईरान और होर्मुज संकट को लेकर भी अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने का दबाव है। पश्चिम एशिया के अलग-अलग मोर्चों पर चल रहे संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिससे अमेरिकी कूटनीति और जटिल हो गई है।

गाजा में जारी हैं हमले

अमेरिकी शांति प्रयासों के बावजूद गाजा में हिंसा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार इजरायली हमले जारी हैं और इससे शांति योजना को जमीन पर लागू करने की चुनौती और बढ़ गई है।

अमेरिका के अरब सहयोगी भी गाजा की स्थिति को लेकर चिंता जता चुके हैं। ऐसे में युद्ध समाप्त करने के लिए सिर्फ हमास और इजरायल के बीच समझौता ही नहीं, बल्कि गाजा के भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सहमति जरूरी होगी।

अब ट्रंप के सामने बड़ा फैसला

नेतन्याहू के खुले विरोध के बाद अब ट्रंप के सामने दो रास्ते हैं—या तो वह इजरायल पर अधिक दबाव डालकर अपनी शांति योजना को आगे बढ़ाएं या फिर मौजूदा स्थिति को स्वीकार करते हुए बातचीत को लंबा खिंचने दें।

गाजा को लेकर अमेरिकी योजना का भविष्य अब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप नेतन्याहू को कितना दबाव में ला सकते हैं और इजरायल हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण की अपनी शर्त से कितनी दूर जाने को तैयार होता है। साफ है कि गाजा में शांति की अमेरिकी कोशिशों के सामने सबसे बड़ी बाधा अब सिर्फ हमास नहीं, बल्कि इजरायल की अपनी शर्तें भी बनती दिखाई दे रही हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted