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हॉर्मुज खुला तो परमाणु समझौते से पीछे हट सकते हैं ट्रंप: रिपोर्ट

ईरान से समझौते के लिए अमेरिकी रुख में बड़ा बदलाव! ट्रंप हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने को बना सकते हैं ‘विजय’ का आधार; तेहरान ने मुआवजे, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और नाकाबंदी खत्म करने समेत रखीं कई शर्तें

अंतरराष्ट्रीय/पश्चिम एशिया | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/ वाशिंगटन 10 अगस्त 2026

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी नए समझौते के बिना भी संघर्ष समाप्त करने के लिए तैयार हो सकते हैं, बशर्ते तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दे और वहां से समुद्री यातायात सामान्य हो जाए। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप अपने लिए संघर्ष समाप्त करने और इसे अमेरिकी जीत के रूप में पेश करने की जमीन तैयार कर रहे हैं। हालांकि ईरान की ओर से रखी गई नई शर्तों ने इस रास्ते को आसान बनाने के बजाय बातचीत को और जटिल कर दिया है।

हॉर्मुज बना संघर्ष का सबसे बड़ा दबाव बिंदु

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस मार्ग पर लंबे समय तक किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और महंगाई पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि ईरान के पास हॉर्मुज को लेकर महत्वपूर्ण रणनीतिक दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए समुद्री यातायात बाधित होने से अमेरिका पर संघर्ष समाप्त करने का दबाव बढ़ा है। ट्रंप लगातार हॉर्मुज के खुले होने की बात कहते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर रिपोर्ट में इसके बंद रहने की बात कही गई है।

ईरान की शर्तें अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती

ईरान ने जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए केवल समुद्री यातायात बहाल करने की बात नहीं की है। रिपोर्ट के अनुसार तेहरान ने युद्ध से हुए नुकसान के लिए अरबों डॉलर के अमेरिकी मुआवजे, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने जैसी मांगें रखी हैं।

इसके अलावा ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने संघर्ष और ईरान के सहयोगी माने जाने वाले लेबनान, फिलिस्तीन, यमन और इराक के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई समाप्त करने की भी शर्त रखी है। ईरान का रुख फिलहाल काफी सख्त दिखाई दे रहा है। उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि जब तक उसकी सभी शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक हॉर्मुज को खोलने का सवाल नहीं है।

परमाणु कार्यक्रम अब भी सबसे बड़ा पेच

अमेरिका ने संघर्ष की शुरुआत से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बातचीत का केंद्रीय मुद्दा बनाया था। ट्रंप प्रशासन की ओर से तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था। लेकिन अब रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप हॉर्मुज को पूरी तरह खोलने की स्थिति में परमाणु समझौते की शर्त के बिना भी युद्ध समाप्त करने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं।

यदि यह रुख वास्तव में अमेरिकी नीति का हिस्सा बनता है तो यह बातचीत की दिशा में बड़ा बदलाव होगा। इसका अर्थ होगा कि वाशिंगटन परमाणु मुद्दे पर तत्काल समझौते के बजाय पहले समुद्री मार्ग खोलने और संघर्ष समाप्त करने को प्राथमिकता दे सकता है। हालांकि यह अभी रिपोर्ट पर आधारित संभावना है और अंतिम अमेरिकी नीति के रूप में इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

ट्रंप के सामने समय और घरेलू राजनीति की चुनौती

रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति की जल्दबाजी के पीछे घरेलू राजनीतिक कारणों की संभावना भी जताई गई है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब आ रहे हैं और युद्ध के कारण ऊर्जा तथा पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी अमेरिकी मतदाताओं के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है। लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू राजनीति दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है।

ऐसे में यदि ट्रंप हॉर्मुज को खुलवाकर संघर्ष को समाप्त करने में सफल होते हैं, तो वे इसे अपने प्रशासन की कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए ईरान को उसकी मांगों पर कितना समझौता कराया जा सकता है, यही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं

दूसरी ओर ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल अमेरिकी दबाव में हॉर्मुज खोलने के लिए तैयार नहीं है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य उनके लिए सामान्य समुद्री मार्ग नहीं बल्कि युद्ध का क्षेत्र है।

यह रुख बताता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें क्षेत्रीय सैन्य मौजूदगी, आर्थिक प्रतिबंध, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा और समुद्री व्यापार जैसे कई मुद्दे एक साथ जुड़ गए हैं।

दुनिया की नजर हॉर्मुज पर

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का अगला चरण अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से काफी हद तक जुड़ा दिखाई दे रहा है। यदि मार्ग खुलता है तो वैश्विक बाजारों को राहत मिलने की संभावना है और संघर्ष को समाप्त करने की कूटनीतिक कोशिशों को गति मिल सकती है। लेकिन यदि ईरान अपनी शर्तों पर कायम रहता है और अमेरिका उन्हें स्वीकार नहीं करता, तो तनाव लंबा खिंच सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप परमाणु समझौते की अपनी पुरानी शर्त को पीछे रखकर हॉर्मुज को संघर्ष समाप्ति का आधार बनाएंगे, और क्या ईरान इसके बदले अमेरिका से अपनी आर्थिक तथा सैन्य मांगें मनवा पाएगा? आने वाले दिनों की कूटनीति का केंद्र यही सवाल रहने वाला है।

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