अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | इस्लामाबाद | 8 अगस्त 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सऊदी अरब के मक्का में हुए इस समझौते के तहत तीनों देशों ने “सामूहिक रक्षा (Collective Defence)” और “सामूहिक प्रतिरोध (Collective Deterrence)” के सिद्धांत पर साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
समझौते के अनुसार, यदि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और संयुक्त रूप से उसका जवाब दिया जाएगा। यह प्रावधान NATO के सामूहिक सुरक्षा सिद्धांत की तर्ज पर देखा जा रहा है।
समझौते पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने हस्ताक्षर किए। तीनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, सुरक्षा समन्वय और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दिया।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमले जारी हैं और पूरे पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। हाल के सप्ताहों में हूती हमलों और फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक, हथियारों के विकास और आतंकवाद-रोधी अभियानों में भी सहयोग बढ़ा सकता है।
इस नए रक्षा समझौते की एक और खास बात यह है कि इसमें एक तेल समृद्ध खाड़ी देश (सऊदी अरब), एक परमाणु शक्ति (पाकिस्तान) और NATO का सदस्य देश (तुर्किये) एक साझा सुरक्षा ढांचे में साथ आए हैं। इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि तीनों देशों ने कहा है कि इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञ इसे पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक बड़े सुरक्षा गठबंधन के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में इस समझौते का प्रभाव क्षेत्रीय कूटनीति, रक्षा सहयोग और सुरक्षा रणनीतियों पर महत्वपूर्ण पड़ सकता है।




