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झारखंड में पेपर लीक पर उबल रहे युवा, भूख हड़ताल पर देवेंद्र महतो; सोनम वांगचुक की अपील पर तीसरे दिन पिया पानी

25 जुलाई से सत्याग्रह, 2 अगस्त से आमरण अनशन; देवेंद्र बोले—26 साल से लीक हो रहे पेपर, CBI जांच तक नहीं खाऊंगा अन्न; पांच और अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर, CJP ने भी आंदोलन में उतरने का किया ऐलान

शिक्षा/रोजगार | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 5 अगस्त 2026

रांची: NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी युवाओं की आवाज अब झारखंड के भर्ती परीक्षा विवाद में भी गूंजने लगी है। JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की CBI जांच की मांग को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर हैं। लगातार तीन दिन तक पानी भी नहीं लेने से उनकी हालत बिगड़ने लगी तो हाल ही में जंतर-मंतर पर 26 दिनों की भूख हड़ताल कर चुके सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल कर उनसे पानी पीने की अपील की। वांगचुक की बात मानते हुए महतो ने पानी तो पी लिया, लेकिन साफ कर दिया—सरकार जब तक आंदोलनकारी युवाओं की मांग नहीं सुनती, तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।

‘पानी छोड़ना सत्याग्रह नहीं, आत्महत्या जैसा’—वांगचुक ने समझाया

वीडियो कॉल के दौरान कमजोर नजर आ रहे देवेंद्र महतो को साथी प्रदर्शनकारियों ने सहारा दे रखा था। सोनम वांगचुक ने उनसे कहा कि भूख हड़ताल के साथ पानी भी छोड़ देना जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने महतो से संघर्ष जारी रखने, लेकिन पानी पीने की अपील की। वांगचुक ने समझाया कि आंदोलन लंबा भी चल सकता है और सरकार को निर्णय लेने में दो-तीन सप्ताह भी लग सकते हैं, इसलिए जीवन को संकट में डालना उचित नहीं है। इसके बाद महतो ने पानी पिया। हालांकि उन्होंने घोषणा की कि अब वह केवल पानी और नमक लेंगे, भोजन नहीं, और उनका अनशन सरकार द्वारा उनकी मांगों पर कार्रवाई किए जाने तक जारी रहेगा।

‘26 साल से पेपर लीक हो रहे हैं, आखिर युवा कब तक सहें?’

देवेंद्र महतो ने वांगचुक से बातचीत में झारखंड की भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं और 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। महतो के मुताबिक उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि पानी नहीं लिया तो अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में 26 वर्षों से पेपर लीक की समस्या चली आ रही है। आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि वर्षों तक पढ़ाई करने, फॉर्म भरने और परीक्षाओं की तैयारी करने के बाद यदि भर्ती प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ जाए तो यह लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

आंदोलन और तेज, पांच और अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर

रांची का आंदोलन अब केवल देवेंद्र महतो तक सीमित नहीं रहा है। JPSC-JSSC Reforms Manch के बैनर तले दो महिलाओं सहित पांच और प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। आंदोलनकारी JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार मामले की जांच CID को देकर विवाद पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। परीक्षाएं आयोजित करने वाली निजी एजेंसी TDPL की भूमिका पर भी प्रदर्शनकारी सवाल उठा रहे हैं।

CID जांच पर भरोसा नहीं, छात्र मांग रहे CBI जांच

युवाओं की सबसे बड़ी मांग मामले की CBI जांच है। झारखंड पुलिस की CID अब तक कथित अनियमितताओं के सिलसिले में 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद सहित 18 ठिकानों पर छापेमारी की है। पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांगते से भी कई बार पूछताछ की गई है। विवाद के बीच 25 से 27 जुलाई तक प्रस्तावित Combined Civil Services Mains Examination भी स्थगित किया गया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी CID जांच से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र CBI जांच पर अड़े हुए हैं।

हेमंत सोरेन बोले—सरकार गंभीर, सही समय पर होगा फैसला

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आंदोलनकारी युवाओं की चिंताओं पर सरकार के गंभीर होने की बात कही है। उनका कहना है कि सरकार मामले और छात्रों की मांगों को गंभीरता से देख रही है तथा उचित समय पर निर्णय की घोषणा की जाएगी। लेकिन आंदोलनकारी अब केवल आश्वासन से संतुष्ट होते नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है और सरकार को स्पष्ट तथा समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

जंतर-मंतर के बाद अब झारखंड के युवाओं के साथ खड़ी हुई CJP

झारखंड के आंदोलन को अब Cockroach Janta Party (CJP) का समर्थन भी मिल गया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कहा कि उनका आंदोलन झारखंड जाएगा और प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों के साथ खड़ा होगा। दिपके ने साफ कहा कि वे झारखंड के युवाओं के आंदोलन और उनकी मांगों का समर्थन करेंगे। इससे पहले NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP, छात्रों और सोनम वांगचुक के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक बड़ा आंदोलन चला था।

दिल्ली से रांची तक एक ही सवाल—परीक्षा मेहनत की होगी या सिस्टम की?

NEET विवाद के बाद अब झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सड़कों पर उतरे युवा देश की परीक्षा व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष लगा देते हैं। ऐसे में पेपर लीक या भर्ती में अनियमितता का प्रत्येक आरोप केवल किसी एक परीक्षा का विवाद नहीं रहता, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर चोट करता है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक संदेश लगभग एक ही है—युवा अब सिर्फ आश्वासन नहीं, निष्पक्ष परीक्षा, जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

पानी पी लिया, लेकिन लड़ाई खत्म नहीं—महतो का अनशन जारी

सोनम वांगचुक की अपील के बाद देवेंद्र महतो का पानी पीना आंदोलन समाप्त होने का संकेत नहीं है। उलटे उन्होंने पानी और नमक के सहारे अनशन जारी रखने का फैसला किया है। एक तरफ सरकार CID जांच और उचित समय पर फैसले का भरोसा दे रही है, दूसरी तरफ आंदोलनकारी CBI जांच से कम पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पांच और युवाओं के भूख हड़ताल में शामिल होने और CJP के समर्थन के बाद झारखंड का परीक्षा आंदोलन अब सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल बनता दिखाई दे रहा है—क्या सरकार युवाओं को ठोस जवाब देकर आंदोलन खत्म कराएगी, या पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुई यह चिंगारी और फैलती जाएगी?

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