राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 अगस्त 2026
तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। बिहार के बांकीपुर में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने BJP के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व में बड़ी सेंध लगाते हुए जीत दर्ज की, जबकि मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस के खाते में गई। गुजरात के मांजलपुर में BJP ने अपनी पकड़ बनाए रखी। इस तरह तीन सीटों की लड़ाई में BJP को दो जगह हार का सामना करना पड़ा, जबकि एक सीट उसके लिए राहत लेकर आई।
इन नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा पटना की बांकीपुर सीट की है। चुनावी रणनीतिकार से सक्रिय राजनेता बने प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी पदार्पण में BJP के मजबूत माने जाने वाले किले को भेद दिया। परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांकीपुर लंबे समय से BJP की मजबूत शहरी सीटों में गिनी जाती रही है।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर को करीब 49 प्रतिशत वोट
बांकीपुर उपचुनाव में 31 राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर को 63,203 वोट मिले। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उनका वोट शेयर करीब 49 प्रतिशत रहा। BJP उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा करीब 34 प्रतिशत वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे।
इस विधानसभा क्षेत्र में 3.80 लाख से अधिक मतदाता थे। 30 जुलाई को हुए मतदान में करीब 34 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहने के बावजूद प्रशांत किशोर ने बड़ी संख्या में पड़े वोटों को अपने पक्ष में खींचा।
मतगणना के शुरुआती दौर से ही मुकाबले पर नजरें टिकी थीं। जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़े, प्रशांत किशोर की बढ़त मजबूत होती गई। 15वें राउंड के बाद वे 8,202 वोट से आगे थे। 24वें राउंड तक बढ़त 13,868 वोट और 29वें राउंड में करीब 19 हजार वोट तक पहुंच गई। अंतिम चरण तक BJP के लिए इस अंतर को पाटना मुश्किल हो गया।
BJP के गढ़ में जन सुराज की सेंध क्यों अहम?
बांकीपुर की जीत प्रशांत किशोर के लिए महज विधानसभा पहुंचने का रास्ता नहीं है। यह जन सुराज की उस राजनीतिक परियोजना के लिए भी बड़ी परीक्षा थी, जिसके जरिए वह बिहार में BJP, RJD, JDU और कांग्रेस जैसे स्थापित दलों के बीच नया राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर की पहचान लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार की रही है। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं के चुनाव अभियानों में रणनीतिक भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने बिहार में पदयात्रा और जन सुराज अभियान के जरिए सीधे राजनीति में उतरने का रास्ता चुना। बांकीपुर के परिणाम ने पहली बार उन्हें स्वयं उम्मीदवार के रूप में चुनावी सफलता दिलाई है।
यही कारण है कि अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जन सुराज इस जीत को पटना की एक शहरी सीट से निकालकर बिहार के दूसरे हिस्सों तक पहुंचा पाएगा।
Gen Z के संदेश की चर्चा
आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने बांकीपुर के परिणाम को युवाओं की नाराजगी से जोड़ते हुए इसे बड़ा राजनीतिक संकेत बताया। उन्होंने दावा किया कि BJP का वोट आधार, खासकर युवा मतदाता, सरकार से निराश हो रहा है। संजय सिंह ने इसे “Gen Z का पहला बड़ा राजनीतिक संदेश” करार दिया।
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भी नतीजे को बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि जहां BJP की हार की कल्पना नहीं की जाती थी, वहां भी उसे पराजय मिली है।
जन सुराज के बिहार अध्यक्ष मनोज भारती ने बांकीपुर के मतदाताओं को बधाई देते हुए परिणाम को बदलाव के पक्ष में जनादेश बताया। उनके मुताबिक प्रशांत किशोर को विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला है और परिणाम बताता है कि जन सुराज की बात मतदाताओं तक पहुंच रही है।
हालांकि एक विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को पूरे बिहार या राष्ट्रीय स्तर पर मतदाताओं के रुझान का निर्णायक प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। जन सुराज के सामने अगली चुनौती इस समर्थन को स्थायी संगठन और व्यापक वोट आधार में बदलने की होगी।
RJD ने उठाए प्रशांत किशोर पर सवाल
बांकीपुर के नतीजे पर RJD की प्रतिक्रिया अलग रही। RJD सांसद मीसा भारती ने दावा किया कि प्रशांत किशोर की जीत को एक तरह से BJP की जीत माना जाना चाहिए। उन्होंने BJP के उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर और BJP के बीच राजनीतिक समीकरण को लेकर आरोप लगाए।
ये RJD के राजनीतिक आरोप हैं और प्रशांत किशोर की जीत को BJP से जोड़ने का कोई स्वतंत्र प्रमाण इन दावों के साथ सामने नहीं रखा गया है। फिर भी यह प्रतिक्रिया बताती है कि जन सुराज की जीत ने सिर्फ BJP ही नहीं, बल्कि बिहार के दूसरे प्रमुख दलों के लिए भी नई राजनीतिक चुनौती पैदा की है।
दतिया में कांग्रेस ने BJP से छीनी सीट
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी BJP को बड़ा झटका लगा। यहां कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने BJP उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से पराजित किया।
सभी 15 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि BJP के आशुतोष तिवारी 60,741 वोट हासिल कर सके।
दतिया का मुकाबला केवल BJP और कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव मंडल को 22,527 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। तीसरे उम्मीदवार को मिले 22 हजार से अधिक वोट दतिया के चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
गुजरात के मांजलपुर ने BJP को दी राहत
बिहार और मध्य प्रदेश से आए प्रतिकूल नतीजों के बीच गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट BJP के लिए राहत लेकर आई। यहां BJP उम्मीदवार सत्येंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी के खिलाफ मजबूत प्रदर्शन किया और पार्टी का गढ़ बचाने में सफल रहे।
मांजलपुर में 30 जुलाई को करीब 37.5 प्रतिशत मतदान हुआ था। मतगणना के दौरान BJP प्रत्याशी लगातार आगे रहे। इस जीत से BJP तीन उपचुनावों में पूरी तरह खाली हाथ लौटने से बच गई।
तीन सीटें, तीन अलग राजनीतिक संकेत
तीनों उपचुनावों का राजनीतिक चरित्र अलग-अलग है। मांजलपुर में BJP ने अपना आधार बचाया, दतिया में कांग्रेस ने उसे शिकस्त दी और बांकीपुर में एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक ताकत जन सुराज ने स्थापित दलों के समीकरण को चुनौती दी।
इनमें बांकीपुर का परिणाम आने वाले दिनों में सबसे अधिक राजनीतिक चर्चा पैदा कर सकता है। प्रशांत किशोर के सामने अब जीत से भी कठिन परीक्षा है—बांकीपुर के प्रयोग को बिहार के दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में दोहराना।
दूसरी ओर BJP के लिए यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि उसके मजबूत माने जाने वाले शहरी गढ़ में मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा उससे अलग क्यों हुआ। कांग्रेस को दतिया की जीत से मध्य प्रदेश में मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है, जबकि जन सुराज को बांकीपुर ने वह चुनावी सफलता दी है जिसकी उसे बिहार में अपनी राजनीतिक दावेदारी मजबूत करने के लिए जरूरत थी।
तीन सीटों के नतीजे किसी व्यापक राष्ट्रीय जनादेश का विकल्प नहीं हैं, लेकिन बांकीपुर और दतिया की हार BJP के लिए चेतावनी जरूर है। खासकर बांकीपुर ने बिहार की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या प्रशांत किशोर अब चुनावी रणनीतिकार से आगे बढ़कर एक प्रभावी चुनावी ताकत खड़ी कर सकते हैं? आने वाले चुनाव इसका असली जवाब देंगे।




