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विचार से नई तकनीक तक: भारत के भविष्य पर GVFL का बड़ा भरोसा

35 साल से नए उद्यमियों का साथ दे रही GVFL अब अंतरिक्ष, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जैव तकनीक और आधुनिक निर्माण जैसे क्षेत्रों में तलाश रही है भारत की अगली बड़ी सफलता

बिजनेस/ बिजनेस प्रोफाइल/ राष्ट्रीय/ गुजरात | ABC NATIONAL NEWS | अहमदाबाद | 3 अगस्त 2026

35 साल का सफर: जब नए विचार पर पैसा लगाना भी आसान नहीं था

आज भारत में स्टार्टअप और नए कारोबार की चर्चा आम है। किसी युवा के पास अच्छा विचार हो तो उसके सामने पैसा जुटाने के कई रास्ते मौजूद हैं। निवेश करने वाली कंपनियां हैं, नए कारोबार को आगे बढ़ाने वाले केंद्र हैं, सरकारी योजनाएं हैं और अनुभवी कारोबारी भी नए उद्यमियों की मदद के लिए आगे आते हैं। लेकिन 1990 में भारत की तस्वीर ऐसी नहीं थी। उस समय अगर किसी युवा के पास कोई नया और शानदार कारोबारी विचार होता, तब भी उसे उस विचार को कंपनी में बदलने के लिए पैसा मिलना बहुत मुश्किल था। बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाएं आम तौर पर यह देखती थीं कि कारोबार कितना पुराना है, आमदनी कितनी है और कर्ज के बदले गिरवी रखने के लिए क्या है। नए उद्यमी के पास अक्सर इन सवालों के जवाब नहीं होते थे। उसके पास संपत्ति भले कम हो, लेकिन विचार बड़ा हो सकता था। इसी कमी को दूर करने के लिए 1990 में GVFL की शुरुआत हुई। सोच यह थी कि अगर किसी व्यक्ति के पास मजबूत विचार, उसे पूरा करने की क्षमता और कुछ नया बनाने का हौसला है, तो केवल इसलिए उसका रास्ता बंद नहीं होना चाहिए कि उसके पास बड़ी संपत्ति या पुराना कारोबार नहीं है। उस समय भारत में नए कारोबार में हिस्सेदारी लेकर पैसा लगाने का विचार भी नया था। इस लिहाज से GVFL की शुरुआत केवल एक निवेश कंपनी की शुरुआत नहीं थी, बल्कि भारत में नए विचारों और नए उद्यमियों पर भरोसा करने वाली एक नई सोच की शुरुआत भी थी।

बदल गया भारत: अब छोटे शहर से भी दुनिया जीतने का सपना देख रहा उद्यमी

पिछले 35 वर्षों में भारत का कारोबारी माहौल पूरी तरह बदल चुका है। पहले नया कारोबार शुरू करने वाला व्यक्ति अपने शहर, राज्य या अधिक से अधिक पूरे देश के बाजार के बारे में सोचता था, लेकिन आज का युवा उद्यमी शुरुआत से दुनिया को अपना बाजार मानकर चल सकता है। उसके पास बाजार की बेहतर जानकारी है, वह अपने मुकाबले की कंपनियों को समझता है और इंटरनेट तथा तकनीक ने उसके लिए दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचना आसान बनाया है। आज नए उद्यमियों के लिए निवेशक, प्रशिक्षण केंद्र, विश्वविद्यालय, सरकारी योजनाएं और उद्योग जगत के अनुभवी लोग उपलब्ध हैं। GVFL ने इस पूरे बदलाव को करीब से देखा है। अलग-अलग समय में कंपनी ने अलग-अलग क्षेत्रों के कारोबार में निवेश किया, नई कंपनियों को शुरुआती दौर से आगे बढ़ते देखा और कई सफल निवेश यात्राओं का हिस्सा बनी। समय के साथ उसने अपनी निवेश नीति को भी बदला। अब उसकी नजर केवल सामान्य नए कारोबार पर नहीं, बल्कि ऐसी कंपनियों पर ज्यादा है जो विज्ञान, शोध और कठिन तकनीक के सहारे भविष्य के बड़े समाधान तैयार कर रही हैं।

नई और कठिन तकनीक पर दांव: भारत को केवल खरीदार नहीं, निर्माता बनाने की सोच

GVFL का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव नई और गहरी तकनीक वाली कंपनियों पर बढ़ता ध्यान है। ऐसी कंपनियों को आम तौर पर ‘डीप-टेक’ कंपनियां कहा जाता है। आसान शब्दों में समझें तो ये ऐसी कंपनियां हैं जो केवल पहले से मौजूद तकनीक का इस्तेमाल करके कोई नया ऐप या वेबसाइट नहीं बनातीं, बल्कि विज्ञान, इंजीनियरिंग और शोध के आधार पर अपनी नई तकनीक तैयार करती हैं। ऐसी तकनीक बनाने में कई साल लग सकते हैं। कई प्रयोग असफल हो सकते हैं, उत्पाद तैयार होने में लंबा समय लग सकता है और बाजार तक पहुंचने से पहले कई तरह की जांच और मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन अगर ऐसी तकनीक सफल हो जाती है तो उसे दूसरी कंपनी के लिए तुरंत नकल करना आसान नहीं होता। भारत में स्वदेशी उत्पादन, अपनी तकनीक तैयार करने, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों को अवसर देने और रक्षा उपकरणों के देश में निर्माण पर बढ़ते जोर ने ऐसी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर पैदा किया है। GVFL का मानना है कि भारत को अगर दुनिया की बड़ी तकनीकी और औद्योगिक ताकत बनना है तो उसे केवल विदेशों से तकनीक खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहिए। भारत को ऐसी तकनीक भी बनानी होगी जिसे दूसरे देश भारत से खरीदना चाहें।

अंतरिक्ष से रक्षा तक: भविष्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश

GVFL ने अपनी इसी सोच के तहत कई ऐसे क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश किया है जिनका महत्व आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकता है। अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में Dhruva Space और SatLeo, रक्षा तकनीक में Indrajaal, Optimized Electrotech और InsideFPV, इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में Brandworks, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े ढांचे में VideoSDK और Formcept, डिजिटल सुरक्षा में Sequretek, बैटरी तकनीक में Triolt और Cellegant तथा चिकित्सा तकनीक में HRS Navigation जैसी कंपनियां उसके निवेश का हिस्सा हैं। पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े क्षेत्र में Canvaloop, Soleos और Evify जैसी कंपनियों पर भी GVFL ने भरोसा किया है, जबकि जैव तकनीक में Genexis Biotech जैसी कंपनी उसकी भविष्य की सोच को दिखाती है। इन सभी कंपनियों को केवल अलग-अलग निवेश के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। इनमें से कई कंपनियां ऐसी समस्याओं के समाधान तैयार कर रही हैं जिनका सीधा संबंध भारत की रक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल सुरक्षा, उद्योग और तकनीकी आत्मनिर्भरता से है। यही वजह है कि GVFL किसी एक क्षेत्र को भविष्य का अकेला विजेता मानने के बजाय कई महत्वपूर्ण तकनीकों में एक साथ अवसर तलाश रही है।

आने वाला समय कई तकनीकों के एक साथ काम करने का होगा

भविष्य की सबसे बड़ी खोजें शायद किसी एक तकनीक से नहीं, बल्कि कई तकनीकों के आपस में जुड़ने से सामने आएंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को तेज कंप्यूटर और बेहतर सेमीकंडक्टर की जरूरत होगी। आधुनिक कारखानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ रोबोट, सेंसर और नई तरह की सामग्री इस्तेमाल होगी। रक्षा क्षेत्र में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक्स, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक एक-दूसरे से जुड़ेंगे। उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल खेती, मौसम, पर्यावरण, रक्षा, परिवहन और शहरों की योजना बनाने तक में हो सकता है। इसी तरह बेहतर बैटरी, नई सामग्री और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिलकर ऊर्जा तथा वाहनों की दुनिया में बड़े बदलाव ला सकती हैं। GVFL का मानना है कि आने वाला दशक इन्हीं तकनीकों के मेल का दशक होगा। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर देश के पास अपनी रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा व्यवस्था, अंतरिक्ष क्षमता, सेमीकंडक्टर, जैव तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े समाधान होंगे तो उसकी आर्थिक ताकत के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।

नई तकनीक को केवल पैसा नहीं, समय और धैर्य भी चाहिए

नई और कठिन तकनीक में निवेश सामान्य कारोबार में निवेश करने जैसा नहीं होता। किसी मोबाइल ऐप या इंटरनेट सेवा को कुछ महीनों में बाजार में उतारकर यह देखा जा सकता है कि ग्राहक उसे पसंद कर रहे हैं या नहीं, लेकिन जैव तकनीक, अंतरिक्ष, रक्षा, सेमीकंडक्टर या चिकित्सा उपकरण के मामले में ऐसा हमेशा संभव नहीं है। यहां किसी उत्पाद को तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने में कई साल लग सकते हैं। यही कारण है कि ऐसी कंपनियों को केवल पूंजी नहीं बल्कि धैर्य रखने वाले निवेशकों की जरूरत होती है। GVFL किसी नई तकनीकी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसके संस्थापकों की जानकारी, अनुभव, तकनीकी समझ और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता को गंभीरता से देखती है। साथ ही यह भी देखा जाता है कि कंपनी जिस समस्या को हल करने का दावा कर रही है, क्या वह समस्या वास्तव में मौजूद है और क्या ग्राहक उसके समाधान में रुचि दिखा रहे हैं। शुरुआती परीक्षण, ग्राहकों की प्रतिक्रिया, दूसरी संस्थाओं के साथ साझेदारी और सरकारी विभागों के साथ काम जैसे संकेत इस बात को समझने में मदद करते हैं कि तकनीक केवल प्रयोगशाला में अच्छी दिख रही है या वास्तव में बाजार में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

कंपनी से पहले उसके संस्थापक को समझना जरूरी

GVFL की निवेश सोच में कंपनी बनाने वाले व्यक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर नई तकनीक के क्षेत्र में किसी कंपनी के शुरुआती वर्षों में उसके पास बड़ी आमदनी या भारी बिक्री के आंकड़े नहीं होते। कई बार उसका पहला उत्पाद भी पूरी तरह तैयार नहीं होता। ऐसे में केवल हिसाब-किताब देखकर उसके भविष्य का फैसला करना मुश्किल होता है। इसलिए निवेशक को उस व्यक्ति और टीम को समझना पड़ता है जो उस विचार के पीछे खड़ी है। GVFL ऐसे उद्यमियों की तलाश करती है जिन्हें अपने क्षेत्र की गहरी जानकारी हो, जिन्होंने उद्योग की असली समस्याओं को समझा हो और जो यह जानते हों कि एक अच्छे विचार को सफल कारोबार में बदलना आसान नहीं है। नई तकनीक बनाने वाले व्यक्ति को केवल अच्छा वैज्ञानिक या इंजीनियर होना पर्याप्त नहीं है। उसमें असफल प्रयोग के बाद दोबारा कोशिश करने का साहस, ग्राहक की आलोचना सुनने की क्षमता, अपनी गलतियों से सीखने की आदत और कई वर्षों तक अपने लक्ष्य पर टिके रहने का धैर्य भी होना चाहिए। यही गुण किसी कठिन तकनीकी विचार को एक मजबूत कंपनी में बदल सकते हैं।

पैसा लगाने के बाद भी साथ: GVFL खुद को लंबे सफर का भागीदार मानती है

GVFL का मानना है कि किसी कंपनी में निवेश कर देने के बाद निवेशक की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। खासकर नई तकनीक वाली कंपनियों की यात्रा इतनी लंबी और कठिन होती है कि उन्हें अलग-अलग समय पर अलग तरह की मदद की जरूरत पड़ सकती है। कहीं सही कारोबारी सलाह चाहिए, कहीं किसी बड़ी कंपनी तक पहुंच बनाने की जरूरत होती है, कहीं सरकारी नियम समझने होते हैं और कहीं अगले दौर का निवेश जुटाना होता है। GVFL इन क्षेत्रों में अपनी कंपनियों के साथ काम करने की कोशिश करती है। हालांकि कंपनी चलाने का अधिकार और जिम्मेदारी उसके संस्थापकों की ही रहती है। निवेशक का काम उनके स्थान पर फैसले लेना नहीं, बल्कि अपने अनुभव और संपर्कों के जरिए बेहतर फैसले लेने में उनकी मदद करना है। तीन दशक से अधिक की यात्रा के कारण GVFL ने बाजार के अच्छे और कठिन दोनों दौर देखे हैं। यह अनुभव उन युवा कंपनियों के लिए उपयोगी हो सकता है जो पहली बार किसी बड़े कारोबारी या तकनीकी चुनौती का सामना कर रही हों।

गुजरात की कारोबारी ताकत अब नई तकनीक की तरफ बढ़ रही है

गुजरात लंबे समय से कारोबार और उद्योग के लिए जाना जाता है। व्यापार करने और नया उद्योग खड़ा करने की संस्कृति यहां पुरानी है। अब इसी कारोबारी सोच में नई तकनीक और शोध की ताकत भी जुड़ रही है। iCreate, IN-SPACe, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और नए कारोबार को आगे बढ़ाने वाले केंद्रों के कारण गुजरात में ऐसी नई पीढ़ी तैयार हो रही है जो केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहती। GVFL पिछले तीन दशकों से इस यात्रा का हिस्सा रही है। उसकी कोशिश गुजरात में शुरू होने वाली कंपनियों को केवल राज्य के बाजार तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि उन्हें पूरे भारत और दुनिया में आगे बढ़ने में मदद देने की है। किसी राज्य को नई कंपनियों का बड़ा केंद्र बनाने के लिए केवल पैसा काफी नहीं होता। अच्छे विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक, अनुभवी कारोबारी, निवेशक, सरकारी सहयोग और सफल उद्यमियों का एक-दूसरे से जुड़ना जरूरी होता है। गुजरात में यह पूरा ढांचा मजबूत होता है तो राज्य आने वाले समय में भारत के प्रमुख तकनीकी और नए कारोबार के केंद्रों में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है।

मिहिर जोशी का नेतृत्व: 35 साल के अनुभव को नए दौर से जोड़ने की जिम्मेदारी

GVFL की मौजूदा यात्रा में प्रबंध निदेशक मिहिर जोशी के नेतृत्व की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि कंपनी ऐसे समय में अपने भविष्य की दिशा तय कर रही है जब भारत का निवेश बाजार भी बदल रहा है। किसी निवेश कंपनी के प्रमुख की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसने कितनी रकम निवेश की। असली चुनौती यह पहचानने की होती है कि पांच या दस साल बाद कौन-सी तकनीक महत्वपूर्ण हो सकती है और आज किस उद्यमी में उस भविष्य को बनाने की क्षमता दिखाई दे रही है। GVFL की वर्तमान सोच में नई खोज के साथ मजबूत कारोबार, बेहतर प्रबंधन और लंबे समय तक टिकने वाली वृद्धि पर जोर दिखाई देता है। पहले कई नई कंपनियों के लिए तेजी से बढ़ना और बड़ी कीमत हासिल करना सफलता का मुख्य पैमाना माना जाता था, लेकिन अब निवेशक यह भी पूछ रहे हैं कि कंपनी वास्तव में पैसा कैसे कमाएगी, ग्राहक उसके उत्पाद के लिए भुगतान क्यों करेगा, उसका खर्च कितना है और क्या वह लंबे समय तक अपने पैरों पर खड़ी रह सकती है। मिहिर जोशी के नेतृत्व के सामने GVFL की पुरानी निवेश विरासत को इसी नए और अधिक जिम्मेदार निवेश दौर से जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी है।

केवल तेजी से बढ़ना नहीं, मजबूत कंपनी बनाना अब ज्यादा जरूरी

भारत के स्टार्टअप क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में एक महत्वपूर्ण सबक सीखा है कि केवल तेजी से बढ़ना ही सफलता नहीं है। किसी कंपनी की कीमत कागज पर बहुत बड़ी हो सकती है, उसके पास लाखों ग्राहक हो सकते हैं और उसे लगातार नया निवेश भी मिल सकता है, लेकिन अगर उसका मूल कारोबार मजबूत नहीं है तो यह सफलता लंबे समय तक नहीं टिक सकती। यही कारण है कि GVFL अब नई कंपनियों को देखते समय केवल उनके बढ़ने की रफ्तार नहीं देखती, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करती है कि ग्राहक उनके उत्पाद को क्यों खरीदेगा, कंपनी अपने पैसे का इस्तेमाल कितनी समझदारी से कर रही है, उसका प्रबंधन कितना मजबूत है और भविष्य में वह अपने कारोबार को बड़े स्तर पर कैसे ले जाएगी। अंतरिक्ष, रक्षा, जैव तकनीक और आधुनिक निर्माण जैसे क्षेत्रों में यह सोच और जरूरी हो जाती है, क्योंकि यहां शुरुआती निवेश बड़ा हो सकता है और कमाई शुरू होने में समय लग सकता है। इसलिए अच्छी तकनीक और अच्छे कारोबार के बीच संतुलन बनाना ही लंबे समय की सफलता की कुंजी है।

आत्मनिर्भरता का नया रास्ता: जरूरी तकनीक अपने देश में तैयार करना

भारत में आत्मनिर्भरता का अर्थ अब केवल अधिक सामान देश में बनाने तक सीमित नहीं है। असली आत्मनिर्भरता तब होगी जब देश महत्वपूर्ण तकनीकों को भी स्वयं विकसित कर सके। रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर, चिकित्सा उपकरण, आधुनिक बैटरी, जैव तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्र आज किसी भी बड़े देश की आर्थिक ताकत के साथ उसकी सुरक्षा से भी जुड़े हुए हैं। दुनिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति व्यवस्था में आई परेशानियों ने यह साफ कर दिया है कि जरूरी तकनीक के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए भारत की कोशिश अब केवल विदेशी सामान की जगह भारतीय सामान बनाने की नहीं, बल्कि विदेशी तकनीक की जगह अपनी तकनीक खड़ी करने की भी है। GVFL जिन क्षेत्रों में निवेश कर रही है, उनमें से कई सीधे इसी लक्ष्य से जुड़े हैं। अगर भारत इन क्षेत्रों में मजबूत कंपनियां तैयार करता है तो इसका लाभ केवल रोजगार या कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की तकनीकी स्वतंत्रता और रणनीतिक ताकत भी बढ़ेगी।

अगले पांच साल: स्वास्थ्य से क्वांटम तकनीक तक नए अवसरों की तलाश

आने वाले पांच वर्षों में GVFL की नजर कई नए क्षेत्रों पर है। कंपनी एक तरफ अपनी मौजूदा कंपनियों को आगे बढ़ाने, उनके संस्थापकों को सलाह देने, बेहतर प्रबंधन तैयार करने और नए बाजारों तक पहुंचने में मदद करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ अगले निवेश कोष के जरिए भविष्य की नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। स्वास्थ्य तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी तकनीक, जैव तकनीक, अंतरिक्ष, रक्षा, परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था, शिक्षा, उपभोक्ता तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग और नई तरह की सामग्री से जुड़ी तकनीकें उसके लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इनमें से कुछ क्षेत्र आज शुरुआती अवस्था में हैं और यह भी संभव है कि इनके बड़े कारोबारी परिणाम सामने आने में लंबा समय लगे। लेकिन निवेश की दुनिया में अक्सर सबसे बड़े अवसर वहीं पैदा होते हैं जहां भविष्य अभी पूरी तरह साफ नहीं होता। GVFL अपने लंबे अनुभव का इस्तेमाल ऐसे उद्यमियों को जल्दी पहचानने के लिए करना चाहती है जो आज भले छोटी कंपनी चला रहे हों, लेकिन जिनकी तकनीक भविष्य में पूरे उद्योग को बदलने की ताकत रखती हो।

2030 का भारत: दुनिया की तकनीक इस्तेमाल करने से आगे उसे बनाने का सपना

भारत लंबे समय से अपनी इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक प्रतिभा के लिए दुनिया में जाना जाता है। भारतीय इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ दुनिया की कई बड़ी कंपनियों और शोध संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब अगली चुनौती यह है कि यही प्रतिभा भारत में ऐसी कंपनियां बनाए जो अपनी तकनीक के दम पर दुनिया के बाजार में मुकाबला कर सकें। अंतरिक्ष, रक्षा, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक, आधुनिक निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत के सामने बड़ा अवसर है। सरकार का सहयोग, वैज्ञानिक प्रतिभा, विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल तथा निजी निवेश मिलकर 2030 तक भारत को दुनिया के प्रमुख नई तकनीक वाले देशों में शामिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए केवल पैसा पर्याप्त नहीं होगा। लंबे समय तक शोध में निवेश, अच्छे वैज्ञानिक संस्थान, आसान और स्पष्ट नियम, धैर्य रखने वाले निवेशक और दुनिया के स्तर की गुणवत्ता तैयार करने की इच्छा भी उतनी ही जरूरी होगी।

नए उद्यमियों के लिए संदेश: फैशन के पीछे नहीं, असली समस्या के पीछे जाइए

नई तकनीक बनाने वाले उद्यमियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि केवल उस क्षेत्र में कंपनी शुरू न करें जिसकी उस समय सबसे ज्यादा चर्चा हो रही हो। ऐसी समस्या खोजें जिसका समाधान वास्तव में लोगों, उद्योग या देश को चाहिए। कठिन तकनीक बनाने में समय लगता है और इस यात्रा में कई बार असफलता भी मिलती है। पहला नमूना काम न करे, ग्राहक बदलाव मांगे, सरकारी मंजूरी में देर हो या निवेश मिलने में कठिनाई आए—ये सब इस यात्रा का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन जिस तकनीक को बनाने में कई वर्षों का शोध, मेहनत और अनुभव लगा हो, वही आगे चलकर कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। इसलिए GVFL की सोच का मूल संदेश है कि उद्यमी अपने विचार पर विश्वास रखें, ग्राहक के करीब रहें, गलतियों से सीखते रहें और शुरुआत से ऐसी गुणवत्ता का लक्ष्य रखें जो केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के बाजार में भी स्वीकार की जा सके।

GVFL की असली पहचान: केवल निवेशक नहीं, भविष्य के विचारों पर भरोसा करने वाली संस्था

GVFL की 35 साल की कहानी को केवल इस बात से नहीं समझा जा सकता कि उसने कितनी कंपनियों में पैसा लगाया। असली सवाल यह है कि उसने कितने ऐसे विचारों पर भरोसा किया जिनका भविष्य उस समय साफ नहीं था, कितने उद्यमियों को उस समय सहारा मिला जब उनकी कंपनी बहुत छोटी थी और कितनी नई तकनीकों को बाजार तक पहुंचने का मौका मिला। 1990 में GVFL ने उस समय नए विचारों में निवेश करना शुरू किया जब भारत में स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल जैसे शब्द आम नहीं थे। आज वही संस्था ऐसे समय में अंतरिक्ष, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक और दूसरी कठिन तकनीकों की तरफ बढ़ रही है जब भारत दुनिया में अपनी नई तकनीकी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। दौर बदल गया है, कारोबार बदल गया है और तकनीक भी बदल गई है, लेकिन एक बात आज भी वही है—भविष्य की बड़ी कंपनी को उस समय पहचानना जब बाकी दुनिया उसे अभी एक छोटे विचार के रूप में देख रही हो।

 

ABC NATIONAL NEWS का नजरिया: भारत की अगली बड़ी कारोबारी कहानी नई तकनीक लिख सकती है

भारत के स्टार्टअप दौर की पहली बड़ी सफलता इंटरनेट, ऑनलाइन कारोबार, डिजिटल भुगतान और सॉफ्टवेयर कंपनियों ने लिखी। अब अगली कहानी कहीं अधिक बड़ी और महत्वपूर्ण हो सकती है। यह कहानी उन भारतीय कंपनियों की होगी जो केवल देश के करोड़ों ग्राहकों को सेवाएं नहीं देंगी, बल्कि ऐसी तकनीक तैयार करेंगी जिसका इस्तेमाल दुनिया करेगी। इसके लिए निवेशक को केवल पैसा लगाने वाला व्यक्ति बनकर नहीं रहना होगा। उसे वैज्ञानिक की सोच समझनी होगी, इंजीनियर की कठिन यात्रा को पहचानना होगा, बाजार की जरूरत जाननी होगी और ऐसे उद्यमी पर तब भरोसा करना होगा जब उसकी सफलता की कोई गारंटी न हो। GVFL के पास इस नई चुनौती के सामने 35 वर्षों का अनुभव है। उसने उस भारत में निवेश की शुरुआत की थी जहां नए विचार पर पैसा लगाना भी असामान्य था और अब वह उस भारत के साथ आगे बढ़ रही है जो अंतरिक्ष से लेकर रक्षा, सेमीकंडक्टर, जैव तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। अगर 2030 तक भारत दुनिया की बड़ी नई तकनीकी शक्तियों में शामिल होता है तो उसकी सफलता के पीछे केवल बड़ी कंपनियां नहीं होंगी, बल्कि वैज्ञानिक, इंजीनियर, उद्यमी, विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, सरकार और ऐसे निवेशक भी होंगे जिन्होंने कठिन रास्तों पर चलने वाले विचारों को समय और पूंजी दोनों दिए। 1990 में सवाल था कि क्या भारत में किसी नए विचार पर भरोसा करके निवेश किया जा सकता है। आज सवाल इससे कहीं बड़ा है—क्या भारत दुनिया की अगली बड़ी तकनीकी कंपनियां खुद खड़ी कर सकता है? GVFL की 35 साल की यात्रा इस सवाल का जवाब विश्वास के साथ ‘हां’ में देती दिखाई देती है।

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