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ईरान-अमेरिका युद्ध और भड़का: मिसाइल हमले, नए प्रतिबंध और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 31 जुलाई 2026

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध लगातार और व्यापक होता जा रहा है। गुरुवार को दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का नया दौर देखने को मिला, जबकि संघर्ष की आंच अब जॉर्डन, कुवैत और मिस्र तक पहुंचती दिखाई दे रही है।

ईरान ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में उसके तीन सैनिक मारे गए हैं। वहीं अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की सबसे बड़ी एयरलाइन माहान एयर और उससे जुड़े कई चीनी संस्थानों पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका का आरोप है कि माहान एयर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को सैन्य रसद, हथियारों और ड्रोन नेटवर्क में सहायता पहुंचाती रही है।

उधर अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने का प्रस्ताव एक बार फिर गिर गया। इससे ट्रंप प्रशासन को सैन्य अभियान जारी रखने की राजनीतिक राहत मिली।

ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन और कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए और अमेरिकी लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचाया। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सभी मिसाइल और ड्रोन या तो रोक दिए गए या अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहे और किसी अमेरिकी विमान को नुकसान नहीं हुआ।

इस बीच मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर ड्रोन हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है, जबकि हूती विद्रोहियों ने इसमें अपनी भूमिका से इनकार किया है।

युद्ध के असर अब वैश्विक खेल और व्यापार पर भी दिखाई देने लगे हैं। सुरक्षा कारणों से एनबीए ने इस वर्ष अबू धाबी में होने वाले अपने प्री-सीजन मुकाबले रद्द कर दिए हैं। वहीं लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण समुद्री बीमा कंपनियों ने हाई-रिस्क क्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया है।

इस बीच एक ताजा AP-NORC सर्वे में लगभग दो-तिहाई अमेरिकी नागरिकों ने माना कि ईरान के साथ जारी युद्ध “सार्थक नहीं रहा”। सर्वे के अनुसार ईरान मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में भी गिरावट दर्ज की गई है।

लगातार बढ़ते सैन्य हमले, नए आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती भागीदारी ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है।

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