अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 31 जुलाई 2026
अमेरिका में चुनावी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि चीन ने करोड़ों अमेरिकी मतदाताओं के पंजीकरण (Voter Registration) से जुड़े डेटा तक पहुंच बनाई, जिसे व्हाइट हाउस ने “चुनावी हस्तक्षेप” (Election Interference) का मामला बताया है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी फैक्ट शीट के अनुसार, चीन के हाथ ऐसे मतदाता रिकॉर्ड भी लगे जिनमें कुछ गैर-सार्वजनिक (Non-Public) जानकारी शामिल थी। यह दस्तावेज़ अमेरिकी खुफिया एजेंसियों—CIA, NSA, DHS और Office of the Director of National Intelligence—की मंजूरी के बाद जारी किया गया।
प्रशासन का दावा है कि चीनी साइबर नेटवर्क ने 2022 में व्यावसायिक वेबसाइटों पर उपलब्ध मतदाता पंजीकरण डेटा भी हासिल किया। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, खुफिया एजेंसियों का मानना है कि चीन ने कुछ डेटा खरीदा, कुछ चोरी किया और कुछ साइबर हैकिंग के जरिए हासिल किया, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कितना डेटा किस तरीके से प्राप्त किया गया।
व्हाइट हाउस का कहना है कि 2020 तक चीन ने 18 राज्यों से करोड़ों मतदाताओं का डेटा जुटाया और 2023 तक यह संख्या लगभग 22 करोड़ (220 मिलियन) रिकॉर्ड तक पहुंच गई।
हालांकि, इस दावे पर चुनाव विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अमेरिका के कई राज्यों में मतदाता पंजीकरण रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होते हैं और केवल इन रिकॉर्ड तक पहुंच बना लेने से चुनाव प्रक्रिया या मतदान परिणामों में सीधे हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि 2021 में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया था कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में चीन सहित किसी भी विदेशी शक्ति ने मतदान, वोटों की गिनती या मतदाता पंजीकरण जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप नहीं किया था। वहीं, चीन ने एक बार फिर अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता।
व्हाइट हाउस के इस नए दावे ने अमेरिका में चुनावी सुरक्षा, साइबर खतरों और विदेशी हस्तक्षेप को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।




