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नड्डा ने छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का किया बचाव, आपातकाल का दिया उदाहरण; CJP का तंज- 50 साल में कुछ नहीं बदला?

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया। राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे “सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति” बताया। उन्होंने अपने छात्र जीवन और आपातकाल (1975-77) के दौरान हुई गिरफ्तारी का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्र राजनीति करने वालों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी सांसदों द्वारा छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाए जाने के बाद जे.पी. नड्डा ने कहा कि वह स्वयं छात्र आंदोलन से जुड़े रहे हैं और आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार में उन्हें कई बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई कानून अपने हाथ में लेता है तो पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ती है और दिल्ली में भी पुलिस ने वही किया।

नड्डा ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और यदि प्रदर्शन के दौरान स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती है तो पुलिस को आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई असामान्य घटना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून लागू करने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

नड्डा के इस बयान पर Cockroach Janta Party (CJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर लिखा, “क्या आपका मतलब है कि पिछले 50 वर्षों में देश में कुछ भी नहीं बदला?” CJP ने तंज कसते हुए कहा कि यदि वर्तमान पुलिस कार्रवाई की तुलना आपातकाल के दौर से की जा रही है, तो यह स्वयं इस बात का संकेत है कि असहमति से निपटने के सरकारी तौर-तरीकों में कोई बदलाव नहीं आया।

राज्यसभा में नड्डा के बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष लगातार 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई गिरफ्तारियों, हिरासत और कथित बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।

CJP ने भी केंद्र सरकार से अपनी पूर्व घोषणाओं को लागू करने की मांग दोहराई। पार्टी का कहना है कि सरकार ने आश्वासन दिया था कि आंदोलन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की जाएगी, लेकिन इस संबंध में अभी तक स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है।

विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार को घेरा है। सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है, जबकि विपक्ष और कुछ मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग दावे किए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।

छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े आरोप-प्रत्यारोप अब संसद से लेकर सड़कों तक राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन चुके हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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