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पैलेट गन विवाद: राहुल के सबूत और CRPF जांच के दावों के बावजूद सरकार अपने रुख पर कायम, कहा- नहीं हुआ इस्तेमाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

दिल्ली में 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार संसद में यह दोहरा रही है कि प्रदर्शनकारियों पर किसी प्रकार की गोली या पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया, वहीं कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मेडिकल रिपोर्टों और घायल छात्रों का हवाला देकर अपने आरोपों पर कायम हैं। इसी बीच, The Indian Express और Hindustan Times की रिपोर्टों में भी ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान केवल आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे और किसी प्रकार की गोली नहीं चलाई गई। उन्होंने कहा कि जब गोली चली ही नहीं, तो उसके आदेश का सवाल ही नहीं उठता। सरकार का यह भी कहना है कि पुलिस कार्रवाई से जुड़े आदेश संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा दिए जाते हैं, न कि मंत्रियों द्वारा।

हालांकि, राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि उन्होंने पैलेट गन से घायल छात्रों से मुलाकात की है और AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट में भी पैलेट से लगी चोटों का उल्लेख है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, तो छात्रों को ऐसी चोटें कैसे आईं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से जवाब और जवाबदेही दोनों की मांग की।

इस बीच, The Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि CRPF की आंतरिक जांच के दौरान सामने आया कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में तैनात RAF के एक जवान ने पैलेट गन से कुल सात राउंड फायर किए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से पांच राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे, जबकि दो जमीन पर दागे गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह फायरिंग कथित तौर पर उस समय हुई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया।

उधर Hindustan Times ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि उसकी जांच में सामने आया है कि कम से कम एक दर्जन RAF कर्मियों को पैलेट गन उपलब्ध कराई गई थी। अखबार ने यह भी कहा कि कम से कम पांच प्रदर्शनकारियों ने पैलेट लगने का दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्ग थाने की डेली डायरी (DD) में भी पैलेट गन से फायरिंग किए जाने का उल्लेख होने की बात सामने आई है। इसके अलावा कुछ मेडिकल दस्तावेजों में शरीर के विभिन्न हिस्सों में पैलेट जैसी चोटों का जिक्र भी किया गया है।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस अपने आधिकारिक रुख पर कायम है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी अपने फैक्ट-चेक में कहा कि गोली लगने के दावों की पुष्टि मेडिकल-लीगल रिपोर्ट (MLC) से नहीं होती। पुलिस के अनुसार, संबंधित घायल की चोट साधारण और कुंद (ब्लंट) प्रकृति की थी तथा मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने का कोई प्रमाण नहीं मिला। पुलिस पहले भी कह चुकी है कि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया।

CRPF महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि बल मुख्यालय पूरे घटनाक्रम का पेशेवर तरीके से आकलन कर रहा है और समीक्षा पूरी होने के बाद आधिकारिक निष्कर्ष सामने रखा जाएगा। अभी तक CRPF ने The Indian Express में प्रकाशित आंतरिक जांच संबंधी दावों की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।

इस प्रकार मामले में फिलहाल कई परस्पर विरोधी दावे मौजूद हैं। सरकार और दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी मेडिकल रिपोर्टों और कथित पीड़ितों के आधार पर अपने आरोप दोहरा रहे हैं। वहीं The Indian Express और Hindustan Times की रिपोर्टों में आंतरिक जांच, ड्यूटी रिकॉर्ड और चिकित्सा दस्तावेजों के आधार पर पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे किए गए हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच और संबंधित एजेंसियों के अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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