अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 29 जुलाई 2026
ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में आमने-सामने मुलाकात हुई। करीब डेढ़ घंटे तक चली बंद कमरे की इस बैठक को दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे समय में हुई यह बातचीत न केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति पर भी केंद्रित रही।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार बैठक “सकारात्मक और बेहद उपयोगी” रही। हालांकि बातचीत का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन बैठक के बाद नेतन्याहू ने इसे अपने हालिया दौरों की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक बताया।
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में नेतन्याहू ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी बातचीत केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि दोनों नेताओं के बीच पूर्ण साझेदारी, आपसी समर्थन और साझा रणनीतिक लक्ष्यों पर स्पष्ट सहमति बनी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों नेताओं पर अपने-अपने देशों में राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। इजरायल में नेतन्याहू आगामी चुनावों की तैयारी में हैं, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप को नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले लंबे खिंचते युद्ध और उसके आर्थिक प्रभावों को लेकर विपक्ष के साथ-साथ आम जनता की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ा है, जिससे ट्रंप प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ा है।
बैठक से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि दोनों नेताओं के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी है कि नेतन्याहू ईरान के संभावित परमाणु केंद्र पिकऐक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) से जुड़ी खुफिया जानकारी पर चर्चा करना चाहते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें वहां की गतिविधियों की पूरी जानकारी है और फिलहाल इसे कोई बड़ा खतरा नहीं मानते। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल चाहता है कि अमेरिका इस पूरे अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ा रहे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्राथमिकताओं में मौजूद कुछ अंतर की ओर इशारा करता है। जहां इजरायल ईरान के खिलाफ लगातार सख्त रुख बनाए रखना चाहता है, वहीं ट्रंप प्रशासन युद्ध को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने से बचना चाहता है।
इसके बावजूद बैठक के बाद जिस तरह नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप की खुलकर सराहना की, उससे यह संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पहले की तरह मजबूत बनी हुई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखना और पश्चिम एशिया में अमेरिकी-इजरायली सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों नेताओं की साझा प्राथमिकता बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच घटनाक्रम वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। वहीं यदि दोनों देश साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं, तो क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु संकट को नियंत्रित करने की दिशा में नए कदम देखने को मिल सकते हैं।
व्हाइट हाउस की इस अहम बैठक ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहेंगे।




