राष्ट्रीय/ राजनीति | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
लोकसभा में NEET, पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर घमासान; विपक्ष ने गृह मंत्री से मांगा जवाब, सरकार ने कहा—युवाओं के हित में लाया गया नया कानून
नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS
संसद के मानसून सत्र के सातवें दिन लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। सप्ताहभर के गतिरोध के बाद शुरू हुई बहस जल्द ही NEET, पेपर लीक, छात्र आंदोलन और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रित हो गई। विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “दिल्ली कौन चला रहा है? अमित शाह कहां हैं? अगर दिल्ली में छात्रों पर जो कुछ हुआ है, उसकी जिम्मेदारी तय करनी है तो गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई की गई और यदि सरकार वास्तव में छात्रों के हितों के प्रति गंभीर है तो उसे इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना होगा। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि केवल नया कानून लाने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा, बल्कि सरकार को अपने आचरण से भी भरोसा दिलाना होगा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ बल प्रयोग क्यों किया गया और इस पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही कौन लेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं का विश्वास केवल प्रचार या कैमरे के एंगल बदलने से नहीं जीता जा सकता, बल्कि उनके दर्द को समझने और न्याय देने से जीता जा सकता है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश के युवाओं का गुस्सा केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवस्था पर उनका भरोसा भी टूट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान जिस तरह की कार्रवाई हुई, उसने लोकतंत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जवाबदेही तय किए बिना कोई भी नया कानून प्रभावी साबित नहीं होगा।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली पहले से सुरक्षित होती तो इस कानून की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कानून का स्वागत है, लेकिन यह सरकार की उस विफलता का भी संकेत है जिसके कारण लाखों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में पड़ा। उन्होंने कहा कि युवाओं को सहानुभूति नहीं, बल्कि भरोसेमंद और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था चाहिए।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन और सु वेंकटेशन ने NEET को पूरी तरह समाप्त करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि यह परीक्षा राज्यों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के खिलाफ है तथा गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं कर पाती। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था शिक्षा को कोचिंग उद्योग पर निर्भर बना रही है।
वहीं सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि संशोधन विधेयक युवाओं के हितों की रक्षा के लिए लाया गया है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, पेपर लीक रोकने और दोषियों को तेजी से सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि NEET पुनर्परीक्षा बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत देशभर के 5,440 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर कराई गई और प्रश्नपत्र 13 भाषाओं में उपलब्ध कराए गए।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है और विपक्ष केवल केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर राज्यों की जिम्मेदारियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। वहीं शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने सुझाव दिया कि NEET जैसी परीक्षाओं में छात्रों को एक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए ताकि एक परीक्षा किसी छात्र का पूरा भविष्य तय न करे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले छह घंटे और आवश्यकता पड़ने पर चर्चा का समय बढ़ाने की घोषणा की। सरकार ने विपक्ष की मांग स्वीकार करते हुए दस घंटे तक चर्चा कराने की सहमति भी जताई। दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगता रहा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
संसद में हुई इस तीखी बहस ने साफ कर दिया कि NEET, पेपर लीक और छात्र आंदोलन अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच चुका है। विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का दावा है कि नया संशोधन कानून युवाओं के भविष्य की रक्षा और परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।




