अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मिनाब (ईरान) | 23 जुलाई 2026
ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में स्थित शजरे तैय्यबेह प्राइमरी स्कूल का BBC की टीम ने दौरा किया है। इसी स्कूल पर 28 फरवरी 2026 को हुए मिसाइल हमले में 120 बच्चों समेत कुल 156 लोगों की मौत हुई थी। यह हमला अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष के शुरुआती घंटों में हुआ था। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान यह हमला हुआ, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने अब तक इसकी आधिकारिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में सैन्य जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पुराने खुफिया आंकड़ों के कारण स्कूल को गलती से सैन्य परिसर का हिस्सा समझ लिया गया था। इस मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल आज भी मलबे में तब्दील है। कई कक्षाओं की दीवारें टूटी हुई हैं, छतें ढह चुकी हैं और बच्चों की कुर्सियां, किताबें तथा रंग-बिरंगी दीवारें उस भयावह दिन की गवाही देती हैं। स्कूल की पहली कक्षा की शिक्षिका अमिनेह नदेमी ने बताया कि रमज़ान के कारण बच्चे सुबह प्रार्थना के बाद अपनी-अपनी कक्षाओं में लौटे थे। इसी दौरान आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। स्कूल प्रशासन ने एहतियातन अभिभावकों को बच्चों को घर ले जाने के लिए बुलाना शुरू किया, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद स्कूल पर मिसाइल आ गिरी।
नदेमी ने बताया कि विस्फोट के बाद पूरी इमारत जोर से हिली और देखते ही देखते धुएं, आग और मलबे से भर गई। उन्होंने कहा कि कई बच्चे उनके सामने घायल हो गए और कुछ मलबे में दब गए। उन्होंने जैसे-तैसे कुछ बच्चों को नीचे मौजूद लोगों तक पहुंचाया, लेकिन तब तक स्कूल का बड़ा हिस्सा ढह चुका था। उनके अनुसार, बाद में पता चला कि जिन बच्चों को वह सुरक्षित समझ रही थीं, उनमें से कई मलबे के नीचे दबे रह गए।
बचाव अभियान में शामिल ईरानी रेड क्रिसेंट के कर्मियों ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचने पर चारों ओर अफरा-तफरी थी। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों की तलाश में बिना किसी सुरक्षा के मलबे की ओर दौड़ पड़े थे। राहतकर्मियों का कहना है कि कई शव इतने बुरी तरह क्षत-विक्षत थे कि उनकी पहचान केवल कपड़ों, जूतों या मोजों के आधार पर करनी पड़ी। कई परिवारों को अपने बच्चों के शव मिलने में घंटों लग गए।
BBC की रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूल के ठीक बगल में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का एक परिसर मौजूद था। उपग्रह चित्रों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार उसी परिसर पर भी सटीक मिसाइल हमले किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 से स्कूल और सैन्य परिसर के बीच अलग दीवार और प्रवेश द्वार मौजूद थे तथा स्कूल का पता सार्वजनिक वेबसाइटों पर भी उपलब्ध था। इसके बावजूद अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि पुराने सैन्य मानचित्र और खुफिया जानकारी के कारण स्कूल को सैन्य क्षेत्र का हिस्सा मान लिया गया होगा। अमेरिकी रक्षा विभाग ने केवल इतना कहा है कि जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
ईरान सरकार इस हमले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठा रही है और इसे नागरिकों, विशेषकर बच्चों पर हमला बता रही है। वहीं कुछ ईरानी सरकार विरोधी समूहों का भी कहना है कि मिनाब की त्रासदी ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्धों में आम नागरिक सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं और “सटीक सैन्य कार्रवाई” का दावा हमेशा वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
स्कूल से कुछ दूरी पर बने कब्रिस्तान में हर शाम मृत बच्चों और शिक्षकों के परिजन पहुंचते हैं। माता-पिता अपने बच्चों की कब्रों पर बैठकर उन्हें याद करते हैं और न्याय की मांग दोहराते हैं। कई परिवारों का कहना है कि उनके बच्चे हथियार नहीं, बल्कि स्कूल बैग, किताबें और कॉपियां लेकर पढ़ने गए थे। उनका सवाल है कि आखिर उन मासूम बच्चों की क्या गलती थी।
मिनाब का यह स्कूल अब केवल एक दुर्घटनास्थल नहीं, बल्कि युद्ध में नागरिकों की सुरक्षा, सैन्य जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों पर उठ रहे गंभीर सवालों का प्रतीक बन चुका है। घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग लगातार तेज हो रही है, जबकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।




