अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/हांगकांग | 23 जुलाई 2026
चीन में एक आवारा कुतिया ‘वांग वांग’ और उसके पिल्लों के साथ कथित बर्बरता का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद चीन में भारी जनाक्रोश देखने को मिला। हालांकि, चीनी अधिकारियों ने वीडियो और उससे जुड़ी कई पोस्ट हटाने तथा ऑनलाइन चर्चा सीमित करने की कोशिश की। इसके बावजूद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने अभियान को चीन से बाहर तक पहुंचा दिया है और अमेरिका, ताइवान, हांगकांग समेत कई जगहों पर न्याय की मांग तेज हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून के अंत में ग्वांगडोंग प्रांत के जिएयांग शहर में चार नाबालिग लड़कों द्वारा एक कुतिया और उसके पिल्लों के साथ कथित क्रूरता का वीडियो सामने आया था। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि आरोपियों की उम्र 14 वर्ष से कम होने के कारण उन पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। अधिकारियों के अनुसार उन्हें एक विशेष विद्यालय भेजा जाएगा।
चीन में पशुओं के साथ क्रूरता को दंडित करने वाला कोई व्यापक कानून नहीं है। इसी कारण सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार से पशु संरक्षण कानून बनाने की मांग की। हालांकि, समय के साथ इस मामले से जुड़े कई पोस्ट और चर्चाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटती गईं।
सेंसरशिप के बीच पशु अधिकार समर्थकों ने अभियान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और ताइपे में डिजिटल बिलबोर्ड लगाकर “जस्टिस फॉर वांग वांग” की मांग उठाई गई। हांगकांग और मकाऊ में भी लोगों ने पोस्टर अभियान चलाया, जबकि विभिन्न देशों के समर्थकों ने कई भाषाओं में इस घटना की जानकारी साझा की।
चीन के भीतर भी कई सामाजिक संगठनों और निजी कंपनियों ने पशु संरक्षण के समर्थन में अभियान चलाया। कुछ स्टेडियमों और सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं के प्रति दया और सम्मान का संदेश प्रदर्शित किया गया। हालांकि, कुछ स्थानों पर स्थानीय प्रशासन के निर्देश के बाद ऐसे पोस्टर हटाए जाने की भी खबरें सामने आईं।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल इस घटना में न्याय की मांग करना नहीं, बल्कि चीन में पशुओं के प्रति क्रूरता को अपराध घोषित कराने के लिए जनमत तैयार करना भी है। उनका मानना है कि हर जीव को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
यह मामला अब चीन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, इंटरनेट सेंसरशिप और पशु संरक्षण कानूनों पर नई बहस का कारण बन गया है। सेंसरशिप के बावजूद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न्याय की मांग लगातार जारी है।




