अंतरराष्ट्रीय | समी अहमद | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 23 जुलाई 2026
नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह अपनी अब तक की कूटनीतिक नीति में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वह इस सप्ताह भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला अवसर होगा जब शाह किसी विदेशी राजदूत से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे। यह जानकारी प्रधानमंत्री के सहयोगियों और राजनयिक सूत्रों के हवाले से दी गई है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद बालन शाह ने एक अनौपचारिक नीति अपनाई थी कि वह किसी भी विदेशी राजदूत के साथ अलग से मुलाकात नहीं करेंगे। इसी वजह से उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका समेत कई देशों के राजनयिकों के बैठक संबंधी अनुरोध ठुकरा दिए थे। उनके इस रुख की नेपाल के राजनीतिक दलों, पूर्व राजनयिकों और विदेश नीति विशेषज्ञों ने आलोचना की थी। उनका तर्क था कि इस तरह की दूरी नेपाल के कूटनीतिक हितों और पारंपरिक विदेश नीति के अनुकूल नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात का फैसला यह संदेश देने की कोशिश है कि नेपाल अपनी विदेश नीति में भारत और चीन दोनों को समान महत्व देता है। काठमांडू किसी भी पड़ोसी देश के प्रति झुकाव का संकेत नहीं देना चाहता और दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ना चाहता है।
यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री बनने के 100 दिनों के भीतर बालन शाह को कई घरेलू चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भारत-नेपाल सीमा पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लागू करने के फैसले के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद पुलिस कार्रवाई के विरोध में एक राइड-शेयर चालक के आत्मदाह की घटना ने भी सरकार को दबाव में ला दिया और देशभर में विरोध तेज हो गया।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन, दोनों नेपाल के सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार हैं। ऐसे में दोनों देशों के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात का फैसला केवल प्रोटोकॉल में बदलाव नहीं, बल्कि काठमांडू की बदलती कूटनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इन प्रस्तावित बैठकों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दोनों मुलाकातों का एजेंडा और किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर भी कोई औपचारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।




