लाइफस्टाइल | मौबानी मजूमदार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 जुलाई 2026
108 दिनों का संकल्प, बिना एक भी दिन रुके पूरा किया
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास अपने लिए कुछ मिनट निकालना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे समय में मुंबई के दो प्रोफेशनल्स ने ऐसा काम किया है, जो हर किसी को प्रेरित कर सकता है। कम्युनिकेशन उद्यमी आनंद महेश तलारी और ब्रांड एवं क्रिएटिव कंसल्टेंट हसरत अली ने 1 मार्च से 16 जून तक लगातार 108 दिनों तक हर दिन 108 सूर्य नमस्कार करने का संकल्प लिया। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने एक भी दिन अपना अभ्यास नहीं छोड़ा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से ठीक पहले पूरा हुआ यह संकल्प बताता है कि योग केवल शरीर को फिट रखने का तरीका नहीं, बल्कि अनुशासन और बेहतर जीवन जीने का माध्यम भी है।
यह सिर्फ फिटनेस चैलेंज नहीं, खुद से किया गया एक वादा था
आनंद और हसरत कहते हैं कि उनका उद्देश्य कोई रिकॉर्ड बनाना या लोगों को प्रभावित करना नहीं था। उन्होंने यह संकल्प खुद को बेहतर बनाने के लिए लिया था। उनके लिए हर सुबह योग करना एक ऐसी आदत बन गई, जिसने शरीर के साथ-साथ मन को भी मजबूत किया। उनका मानना है कि जब इंसान खुद से किया गया वादा निभाता है, तो उसका आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है।
आंकड़े बताते हैं मेहनत की पूरी कहानी
इन 108 दिनों में दोनों ने मिलकर 11,664 सूर्य नमस्कार पूरे किए। इस दौरान उन्होंने लगभग 135 घंटे योगाभ्यास किया और करीब 1 लाख 40 हजार सचेत श्वासें लीं। हर सुबह करीब 75 मिनट उन्होंने सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योग निद्रा को दिए। लेकिन उनका कहना है कि सबसे बड़ी उपलब्धि ये आंकड़े नहीं हैं। असली सफलता यह है कि अब वे पहले से ज्यादा शांत, ऊर्जावान और एकाग्र महसूस करते हैं। उनके काम करने की क्षमता बढ़ी है और मानसिक तनाव भी काफी कम हुआ है।
सबसे बड़ी चुनौती थी रोज सुबह 4:30 बजे उठना
दोनों का कहना है कि 108 सूर्य नमस्कार करना उतना मुश्किल नहीं था, जितना हर दिन सुबह 4:30 बजे उठना। मुंबई की उमस, लंबी यात्राएं, व्यस्त काम और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपना नियम नहीं तोड़ा। उनका मानना है कि किसी भी अच्छी आदत की शुरुआत मुश्किल जरूर होती है, लेकिन कुछ समय बाद वही आदत जीवन का हिस्सा बन जाती है।
अगर ऐसा संकल्प लें तो तैयारी भी जरूरी है
आनंद और हसरत सलाह देते हैं कि जो लोग इस तरह का योग अभ्यास शुरू करना चाहते हैं, वे जल्दबाजी न करें। शुरुआत अपनी क्षमता के अनुसार करें और यदि कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। उनका यह भी मानना है कि अगर कोई साथी साथ हो, तो लक्ष्य पूरा करना आसान हो जाता है क्योंकि दोनों एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहते हैं।
योग का असली मतलब सोशल मीडिया नहीं, आत्मपरिवर्तन है
आजकल फिटनेस का मतलब अक्सर सोशल मीडिया पर तस्वीरें या वीडियो साझा करना समझ लिया जाता है। लेकिन आनंद और हसरत की यात्रा इससे बिल्कुल अलग संदेश देती है। उनके अनुसार योग किसी को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। योग शरीर, मन और सांस के बीच संतुलन बनाता है और इंसान को भीतर से मजबूत करता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले एक प्रेरक संदेश
हर साल 21 जून को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाती है। इस बार का विषय है “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग”। यानी योग को जीवनभर स्वस्थ रहने का माध्यम माना गया है। आनंद और हसरत की 108 दिनों की यह यात्रा इसी संदेश को सच्चे अर्थों में सामने लाती है। उन्होंने दिखाया कि बड़े बदलाव किसी एक दिन में नहीं आते, बल्कि रोज किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही बड़ी सफलता बनते हैं।
108 दिन पूरे हुए, लेकिन सफर नहीं रुका
108 दिनों का लक्ष्य पूरा होने के बाद भी दोनों ने योग छोड़ने का फैसला नहीं किया। अब उन्होंने अपने रोजाना के अभ्यास में नए योगासन, प्राणायाम और ध्यान को भी शामिल कर लिया है। उनका कहना है कि अब योग उनके लिए कोई चुनौती नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
ABC National News की विशेष टिप्पणी
आधुनिक जीवन में तनाव, भागदौड़ और अनियमित दिनचर्या आम बात हो गई है। ऐसे समय में आनंद महेश तलारी और हसरत अली की यह कहानी बताती है कि अच्छी सेहत किसी चमत्कार से नहीं मिलती। इसके लिए हर दिन थोड़ा समय, मजबूत इरादा और अनुशासन चाहिए।
11,664 सूर्य नमस्कार केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह 108 दिनों तक हर सुबह खुद से किए गए एक वादे को निभाने, हार न मानने और बेहतर जीवन की ओर लगातार बढ़ते रहने की प्रेरक कहानी है।




