अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/नई दिल्ली | 13 जुलाई 2026
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि चीन ने शिनजियांग के सुदूर रेगिस्तानी इलाके में अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक ‘आर्ले बर्क-क्लास’ (Arleigh Burke-class) डेस्ट्रॉयर की पूर्ण आकार की प्रतिकृति तैयार की है। माना जा रहा है कि इसका इस्तेमाल मिसाइल परीक्षण और युद्ध अभ्यास के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस नकली युद्धपोत को एक विशेष रेल प्रणाली पर स्थापित किया गया है, जिससे इसे चलते हुए जहाज़ की तरह इस्तेमाल किया जा सके। सैटेलाइट तस्वीरों में करीब 6 मीटर चौड़ी रेल लाइन और उस पर लगा जहाज़ के आकार का लक्ष्य स्पष्ट दिखाई देता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस व्यवस्था के जरिए अपनी एंटी-शिप मिसाइलों की सटीकता और लक्ष्य भेदन क्षमता का परीक्षण कर रहा है।
यूएस नेवल इंस्टीट्यूट के मुताबिक, शिनजियांग स्थित रुओकियांग टेस्ट रेंज पहले से ही बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों के लिए इस्तेमाल होती रही है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि नकली युद्धपोतों पर लगाए गए सेंसर, मापन उपकरण और विस्तृत संरचना इस बात का संकेत हैं कि चीन लंबे समय से वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है।
आर्ले बर्क-क्लास डेस्ट्रॉयर अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण युद्धपोतों में शामिल हैं। ये विमानवाहक पोतों की सुरक्षा, हवाई रक्षा, मिसाइल हमलों और लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान भी अमेरिकी नौसेना ने इसी श्रेणी के युद्धपोतों का व्यापक उपयोग किया था।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन की एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति का हिस्सा है। यदि इन परीक्षणों से विकसित नई तकनीक परिचालन स्तर तक पहुंचती है, तो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों के लिए चुनौती और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ताइवान, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन अपनी सैन्य तैयारियों को तेज करते हुए संभावित समुद्री संघर्ष की हर स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है। ऐसे में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में और अधिक तीखी हो सकती है।




